S M L

हेमराज की विधवा का दर्द: मेरा पति भारतीय उच्च वर्ग के गुनाहों की भेंट चढ़ गया

खुमकला को अब मलाल है कि, उसने अपने पति की बातों को गंभीरता से न लेकर बहुत बड़ी गलती की, जिसके चलते उसने अपने पति को खो दिया

Updated On: Oct 25, 2017 02:31 PM IST

Reecha Aryal

0
हेमराज की विधवा का दर्द: मेरा पति भारतीय उच्च वर्ग के गुनाहों की भेंट चढ़ गया

आरुषि तलवार हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति यानी आरुषि तलवार के माता-पिता को बरी कर दिया. लेकिन आरुषि हत्याकांड में हम सभी एक अहम बात दरकिनार कर देते हैं. हम करीब-करीब यह भुलाए बैठे हैं कि आरुषि के साथ उसी घर में हेमराज की भी हत्या हुई थी. हेमराज, जो कि तलवार दंपति का घरेलू नौकर था. इस हत्याकांड में सभी का फोकस सिर्फ आरुषि और तलवार दंपति पर ही रहा, लेकिन किसी ने भी हेमराज और उसके परिवार की बात करना मुनासिब नहीं समझा. अब सुनते हैं हेमराज की विधवा खुमकला का दर्द.

तलवार दंपति कोर्ट से बरी हो जाएंगे इसपर जरा भी शक नहीं था

हेमराज की विधवा खुमकला बंजादे को इस बात में जरा भी शक नहीं था कि दोहरे हत्याकांड में तलवार दंपति कोर्ट से बरी हो जाएंगे. खुमकला के मुताबिक जो कुछ हुआ उससे उसे जरा भी हैरत नहीं हुई, बल्कि यह उसकी बदकिस्मती है कि कोर्ट ने सबूतों के अभाव में न सिर्फ तलवार दंपति की उम्रकैद की सजा माफ की बल्कि उन्हें बरी भी कर दिया. दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को सीबीआई कोर्ट के साल 2013 के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें आरुषि और हेमराज की हत्या के लिए तलवार दंपति यानी डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार को दोषी ठहराया गया था.

खुमकाल का कहना है कि उसे 12 अक्टूबर के फैसले के बारे में अपने पड़ोसियों से जानकरी मिली. खुमकला के मुताबिक, 'वो (तलवार दंपति) अमीर और ताकतवर लोग हैं. खुमकला को इस बात का भी अफसोस है कि किसी ने भी उसके पति की मौत पर ध्यान नहीं दिया. मई 2008 में हुए इस हत्याकांड के बाद सिर्फ इक्का-दुक्का पत्रकार ही उसके परिवार की सुध लेने पहुंचे'. खुमकला का कहना है कि हेमराज की मौत ने उसके परिवार को तोड़कर रख दिया, लेकिन इस पूरे मामले में सारा फोकस आरुषि की मौत पर ही रहा.

Arushi Talwar

फ़र्स्टपोस्ट के साथ बातचीत के दौरान खुमकला का सारा दर्द उमड़ आया. उसने मायूसी भरे लहजे में कहा, 'एक बेकसूर इंसान की मौत की परवाह किसी को नहीं है?' खुमकला ने बताया कि उसके परिवार ने भारत में नरेश यादव नाम के एक वकील के जरिए गाजियाबाद कोर्ट में तलवार दंपति के खिलाफ केस दायर किया था. नवंबर 2013 में सीबीआई कोर्ट ने तलवार दंपति को हत्याकांड में दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. सीबीआई कोर्ट के फैसले को तलवार दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

पूरे मामले में हेमराज का नाम बेकार में घसीटा गया

खुमकला अपने 19-साल के अपने बेटे प्रजवाल और हेमराज की 80 साल की बुजुर्ग मां के साथ नेपाल में रहती हैं. उनकी 29 साल की एक बेटी भी है, जो शादीशुदा है और अपने ससुराल में रहती है. खुमकला आज भी इस बात को मानने से इनकार करती हैं कि, हेमराज की हत्या इसलिए हुई क्योंकि वो आरुषि के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया था. खुमकला का कहना है कि इस पूरे मामले में हेमराज का नाम बेकार में घसीटा गया. खुमकला को लगता है कि इस मामले में उसे कभी इंसाफ नहीं मिल पाएगा. इसलिए वो सिर्फ प्रार्थना ही कर सकती हैं कि कोई चमत्कार हो और उसके परिवार को इंसाफ मिल सके.

खुमकाला ने याद करते हुए बताया कि, हेमराज अक्सर शिकायत करता था कि, 'राजेश तलवार बहुत गुस्सैल स्वभाव का इंसान है'. खुमकला के मुताबिक पति की बात सुनकर वो उसे इन सब बातों की अनदेखी करने और सिर्फ काम पर ध्यान देने को कहा करती थी. खुमकला को अब मलाल है कि, उसने अपने पति की बातों को गंभीरता से न लेकर बहुत बड़ी गलती की, जिसके चलते उसने अपने पति को खो दिया.

खुमकला के मुताबिक, पूरा परिवार हेमराज पर ही निर्भर था, क्योंकि उसकी कमाई से ही पूरा परिवार चलता था. तलवार दंपति हेमराज को वेतन के तौर पर हर महीने 5000 रुपए दिया करते थे, जिनमें से वो हर महीने 3000 रुपए अपने घर भेज दिया करता था. लेकिन मौत से लगभग 6 पहले से हेमराज ने घर में एक भी पैसा नहीं भेजा था. हेमराज की मौत के बाद उसके परिवार की स्थिति बुरी तरह लड़खड़ा गई. अब पूरा परिवार दोस्तों और रिश्तेदारों की दया पर जिंदा है. ये लोग जो मदद कर देते हैं, परिवार का खर्च उसी से चलता है. खुमकला का कहना है कि, हेमराज की मौत के बाद तलवार दंपति ने उसके परिवार की कोई मदद नहीं की. खुमकला को रह-रह कर यह दर्द सालता है कि, 'कोई भी उसके मृत पति को इंसाफ दिलाने की बात नहीं करता है, किसी को भी उसके परिवार की चिंता नहीं, इस संसार में एक गरीब इंसान की कोई कीमत नहीं है.'

Allahabad_high_court wiki

इलाहाबाद हाईकोर्ट

'आरुषि और हेमराज की हत्या राजेश तलवार ने की थी'

खुमकला को पक्का यकीन है कि, आरुषि और हेमराज की हत्या राजेश तलवार ने की थी. उसे यह भी लगता है कि, कहीं न कहीं नूपुर तलवार भी इस दोहरे हत्याकांड की जिम्मेदार हैं. खुमकला का आरोप है कि, 'हेमराज को राजेश तलवार के काले चिट्ठों की जानकारी थी, और शायद आरुषि भी अपने पिता की गंदी करतूतों के बारे में जानती थी. यही वजह है कि दोनों की हत्या कर दी गई'. खुमकला को लगता है कि, 'हेमराज और आरुषि जरूर कोई ऐसा राज जान गए थे, जिसे तलवार दंपति छुपाए रखना चाहते थे, लिहाजा उन्होंने दोनों की हत्या कर दी.'

खुमकला के मुताबिक, 'मेरा पति भारतीय उच्च वर्ग के गुनाहों की भेंट चढ़ गया'. खुमकला का कहना है कि हेमराज की मौत के बाद उसकी और उसके परिवार की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई. उसका बेटा प्रजवाल 10 साल का था, जब हेमराज की मौत हुई. पिता की मौत के बाद से वो गहरे अवसाद में है, जिसकी वजह से वो अपनी पढ़ाई भी जारी नहीं रख पा रहा है. फिलहाल प्रजवाल का इलाज चल रहा है. उसे इलाज के लिए वाराणसी ले जाना पड़ता है, अब तक खुमकला वाराणसी के 6 चक्कर लगा चुकी हैं. अवसाद के अलावा इन दिनों प्रजवाल निमोनिया से भी पीड़ित है, जिससे खुमकला की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

Dentists Rajesh Talwar and wife Nupur are taken to court in Ghaziabad

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद डासना जेल से रिहा होकर घर जाते हुए तलवार दंपति

खुमकला का कहना है कि, 'बेटे प्रजवाल के इलाज के लिए हमें बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है, फिलहाल रिश्तेदारों और पड़ोसियों की मदद से जैसे तैसे उसका इलाज हो पा रहा है'. खुमकला के मुताबिक, 'मेरे बेटे की सेहत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, पैसों की तंगी के चलते न तो हम ढंग से उसका इलाज करा पा रहे हैं और न ही 12वीं के बाद उसकी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं.'

हेमराज का बेटा प्रजवाल कितने गहरे अवसाद में है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वो अपने पिता के बारे में कोई बात नहीं करना चाहता है.

गांववाले अभी भी हेमराज की मौत का शोक मनाते हैं

खुमकला के मुताबिक, हेमराज अगर आज जिंदा होता तो वो दिवाली पर अपने गांव जरूर आता. हेमराज की मौत को 9 साल बीत जाने के बावजूद गांववाले अब भी उसके विनम्र स्वभाव को नहीं भूले हैं. दोस्तों के मुताबिक, हेमराज को गांव के समझदार, लोकप्रिय और हमदर्द इंसान के तौर पर जाना जाता था.

हेमराज 18 साल की उम्र में रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर भारत आ गया था. तीज-त्योहारों पर वो बहुत सक्रिय रहा करता था. त्योहारों पर वो दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने जाया करता था, और उनके लिए सेलरोटी (स्थानीय पकवान) भी बनाया करता था. लेकिन हेमराज की मौत के बाद उसके परिवार के लिए सभी त्योहार फीके हो गए. वहीं रिश्तेदार और दोस्तों ने भी त्योहारों पर खुशियां मनाना बंद कर दीं. दिवाली पर भी इन लोगों में कोई उत्साह या उमंग नजर नहीं आई.

हेमराज का परिवार अब अघाखाची जिले के भूमिका स्थान नगरपालिका इलाके में रहता है. यहां की आबादी तकरीबन 12 हजार है, जिनमें से करीब 30 फीसदी लोग भारत और नेपाल के अलग-अलग इलाकों में नौकरी करते हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi