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J&K को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टली

कोर्ट ने कहा कि अभी जम्मू-कश्मीर की स्थिति बहुत ही संवेदनशील है. ऐसे में इस समय इस याचिका पर कोई भी सुनवाई कराना ठीक नहीं है

Updated On: Nov 16, 2018 07:12 PM IST

FP Staff

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J&K को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टली

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को अप्रैल 2019 तक टाल दिया है. कोर्ट ने कहा कि अभी जम्मू-कश्मीर की स्थिति बहुत ही संवेदनशील है. ऐसे में इस समय इस याचिका पर कोई भी सुनवाई कराना ठीक नहीं है.

बीते सितंबर के महीने में जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने और इस राज्य के बारे में कानून बनाने के संसद के अधिकार को सीमित करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए दिल्ली प्रदेश बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह जनहित याचिका दायर की थी. इसमें कहा गया है कि जम्मू कश्मीर संविधान सभा 26 जनवरी, 1957 को भंग होने के साथ ही संविधान बनाते वक्त ‘अस्थाई’ स्वरूप का विशेष प्रावधान और अनुच्छेद 370 (3) खत्म हो गया था.

उपाध्याय ने जम्मू कश्मीर के अलग संविधान को ‘मनमाना’ और ‘असंवैधानिक’ घोषित करने का सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है. याचिका में कहा गया है कि यह भारत के संविधान की सर्वोच्चता और ‘एक राष्ट्र, एक संविधान, एक राष्ट्रगान और एक राष्ट्रीय ध्वज’ के सिद्धांत के विपरीत है.

याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर के संबंध में एक ‘अस्थाई प्रावधान’ है

वकील आर.डी उपाध्याय के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया है कि अनुच्छेद 370 का अधिकतम जीवन संविधान सभा की मौजूदगी तक था, जो संविधान को अपनाने के साथ ही 26 जनवरी, 1950 तक था.

याचिका के अनुसार यह अनुच्छेद राज्य विधान सभा को कोई भी कानून बनाने का अधिकार प्रदान करता है जिसे संविधान के तहत दूसरे राज्यों के नागरिकों के साथ समता के अधिकार या दूसरे अधिकारों का उल्लंघन करने के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती है.

याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर के संबंध में एक ‘अस्थाई प्रावधान’ है और यह केंद्रीय और समवर्ती सूची के तहत आने वाले विषयों पर कानून बनाने के संसद के अधिकार में कटौती करके संविधान के विभिन्न प्रावधानों को लागू किए जाने को सीमित करता है. याचिका के अनुसार इसके परिणामस्वरूप यह राज्य को अपने निवासियों के लिए विशेष अधिकार और सुविधाएं प्रदान करता है.

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