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बोहरा समाज में खतना पर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर सुनवाई

10 जुलाई को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने केस की सुनवाई करते हुए कहा था कि इस तरह की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ पॉस्को एक्ट है, जिसमें नाबालिग उम्र की लड़कियों के निजी अंगों को छूना अपराध है

Updated On: Jul 16, 2018 09:46 AM IST

FP Staff

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बोहरा समाज में खतना पर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के खतने पर प्रतिबंध लगाने को लेकर दायर याचिका पर आज यानी सोमवार को फिर सुनवाई होगी. यह याचिका पिछले साल वकील सुनीता तिवारी ने दायर की थी.

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह याचिकाकर्ता सुनीता तिवारी के केस की पैरवी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जिस भी लड़की का खतना किया जाता है वो बड़ी होने तक इसी सदमे के साथ जीती है.

बीते 10 जुलाई को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सिंह की बेंच ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा था कि इस तरह की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ पॉस्को एक्ट है, जिसमें नाबालिग उम्र की लड़कियों के निजी अंगों को छूना अपराध है.

वहीं सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने दाउदी बोहरा वीमेंस एसोसिएशन फॉर रिलिजिएस फ्रीडम की ओर से कोर्ट में पेश होकर कहा था कि इस्लाम धर्म में हजारों वर्षों से खफ्द और खतना जैसी प्रथा चली आ रही है. इसमें लड़की के निजी अंग का बहुत ही छोटा से हिस्से को काटा जाता है जो नुकसानदायक नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि यह मुस्लिम पुरुषों की ही तरह की परंपरा है.

इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि पुरुषों में निजी अंगों का खतना करने के कुछ लाभ हैं, जिसमें एचआईवी फैलने का खतरा कम होना शामिल है, लेकिन महिलाओं का खतना हर हाल में बंद होना चाहिए, क्योंकि इसके काफी दुष्परिणाम हैं.

उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और अफ्रीका के 27 देशों में इस पर पूरी तरह प्रतिबंध है.

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