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हाशिमपुरा नरसंहार: 16 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद, 42 लोगों की हुई थी हत्या

हाईकोर्ट ने प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (पीएसी) के 16 पूर्व जवानों को हत्या, अपहरण, आपराधिक साजिश और सबूतों को नष्ट करने का दोषी करार दिया

Updated On: Oct 31, 2018 01:08 PM IST

FP Staff

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हाशिमपुरा नरसंहार: 16 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद, 42 लोगों की हुई थी हत्या
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 1987 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हाशिमपुरा नरसंहार मामले में एक अल्पसंख्यक समुदाय के 42 लोगों की हत्या के जुर्म में 16 पीएसी जवानों को बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई. दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 सितंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 31 साल पहले मई 1987 में मेरठ के हाशिमपुरा में 42 लोगों की हत्या कर दी गई थी. जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को पलट दिया जिसमें उसने आरोपियों को बरी कर दिया था.

हाईकोर्ट ने प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (पीएसी) के 16 पूर्व जवानों को हत्या, अपहरण, आपराधिक साजिश और सबूतों को नष्ट करने का दोषी करार दिया. अदालत ने नरसंहार को पुलिस द्वारा निहत्थे और निरीह लोगों की ‘लक्षित हत्या’ करार दिया.

इस मामले में 21 मार्च 2015 को निचली अदालत द्वारा हत्या और अन्य अपराधों के आरोपी 16 पुलिसकर्मियों को बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. निचली अदालत ने संदेह के आधार पर पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया था. दोषी करार दिए गए पीएसी के सभी 16 जवान रिटायर हो चुके हैं.

ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को यूपी सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और कुछ अन्य पीड़ितों ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इस मामले में बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी याचिका दायर कर तत्कालीन मंत्री पी चिदंबरम की भूमिका की जांच की मांग की थी. अदालत ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की.

क्या है हाशिमपुरा नरसंहार मामला?

1986 में केंद्र सरकार ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलने का आदेश दिया था. इसके बाद वेस्ट यूपी में माहौल गरमा गया. 14 अप्रैल 1987 से मेरठ में धार्मिक उन्माद शुरू हो गया. कई लोगों की हत्या हुई, तो दुकानों और घरों को आग के हवाले कर दिया गया था. हत्या, आगजनी और लूट की वारदातें होने लगीं.

इसके बाद भी मेरठ में दंगे की चिंगारी शांत नहीं हुई थी. इन सबको देखते हुए मई के महीने में मेरठ शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ा और शहर में सेना के जवानों ने मोर्चा संभाला. इसी बीच 22 मई 1987 को पुलिस, पीएसी और मिलिट्री ने हाशिमपुरा मोहल्ले में सर्च अभियान चलाया.

आरोप है कि जवानों ने यहां रहने वाले किशोरों, युवकों और बुजुर्गों सहित कई 100 लोगों को ट्रकों में भरकर पुलिस लाइन ले गए. शाम के वक्त पीएसी के जवानों ने एक ट्रक को दिल्ली रोड पर मुरादनगर गंग नहर पर ले गए थे. उस ट्रक में करीब 50 लोग थे. वहां ट्रक से उतारकर जवानों ने एक-एक करके लोगों को गोली मारकर गंग नहर में फेंक दिया. इस घटना में करीब 8 लोग सकुशल बच गए थे, जिन्होंने बाद में थाने पहुंचकर इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

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