S M L

यहां बेची और खरीदी जाती हैं औरतें लेकिन नहीं उठाता कोई आवाज

शबनम अब 9वें बच्चे की मां है. फिलहाल वह अपने चौथे पति के यहां है. हरियाणा की दुनिया में जहां महिलाओं की आबादी सिकुड़ रही है वहां शबनम की पहचान बतौर 'पारो' है.

FP Staff Updated On: Jul 26, 2018 09:08 PM IST

0
यहां बेची और खरीदी जाती हैं औरतें लेकिन नहीं उठाता कोई आवाज

कभी शादीशुदा नहीं रही. शबनम, बमुश्किल 12 साल की थी जब उसके घर एक 'दीदी' आईं और उसे अपने साथ हरियाणा जाने के लिए मनाया. उस वक्त 13 साल की शबनम ने सवाल किया था, 'क्या हरियाणा खूबसूरत है? वो किस तरह का खाना खाते हैं? क्या वहां बारिश होती है?' शबनम को बताया गया कि यह 'जादू भरी' जगह है जहां से ताजमहल, लाल किला, कुतुब मीनार और दूसरे स्मारक भी दिखेंगे.

शबनम अब 9वें बच्चे की मां है. फिलहाल वह अपने चौथे पति के यहां है. उदासी से शबनम ने कहा, 'वह मुझे ज्यादा दिन नहीं रखेंगे. जैसे ही मैं एक लड़के को जन्म दूंगी वह मुझे निकाल देंगे.' हरियाणा की दुनिया में जहां महिलाओं की आबादी सिकुड़ रही है वहां शबनम की पहचान बतौर 'पारो' है. उसे असम से 30,000 रुपए में इसलिए लाया गया था ताकि 40 वर्षीय राहिम का 'वंश' खत्म ना हो. जब उसने लड़की को जन्म दिया तो राहिम उसे अपने साथ रखने को तैयार नहीं हुआ. इसके बाद उसने शबनम को दूसरे गांव में बेच दिया.

शबनम, 4 बार बेची गई. उसने कभी ताजमहल या कोई और स्मारक नहीं देखे. वास्तव में, वह कभी मेवात के बाहर नहीं गई. हरियाणा में लिंग अनुपात 1,000 लड़कों पर 834 लड़कियां है. वहीं यहां के पुरुष-प्रधान समाज में पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, ओडिशा, झारखंड से महिलाएं आसानी से खरीद ली जाती हैं. इतना ही नहीं कई बार तो सीमा पार से भी महिलाओं की खरीदारी कर ली जाती है.

हाल ही में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने भारत को महिलाओं के लिए दुनिया की सबसे असुरक्षित जगह बताया है. जिस देश ने 'माता' (मां) को नाम में जोड़ा है, वहा भी महिलाओं की सबसे बड़ी संख्या शोषित हो रही है. वह मजबूर होकर मानव तस्करों के जरिए शादी करने, काम करने और सेक्स स्लेव बनने को मजबूर हैं.

इनकी संख्याओं का कोई आधिकारिक सरकारी डेटा नहीं है. ऐसा माना जाता है कि हर साल सैकड़ों महिलाओं को धोखा दिया जाता है और उन्हें 'पारो' बनने के लिए मजबूर किया जाता है. यह कई सालों से हो रहा है.

एक ग्रामीण ने बताया, 'आप पारो की तलाश में हैं? आप उन्हें अगले लेन के सभी घरों में पाएंगे.' गांव के निवासी ने मेवात जिले के मिट्ठन गांव की ओर जाने वाली लेन की तरफ इशारा किया. चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि यहां सभी को पता है कि 'पारो' अलग-अलग हिस्से से लाई गई हैं. वे अक्सर परिवार में भाइयों के बीच साझा करते हैं और वे दूसरे ग्रामीणों को बेच दी जाती हैं, लेकिन कोई भी इस पर सवाल नहीं करता. गौशिया खान ने कहा, 'कई बार तो पारो 8-9 बार बेची जाती हैं.'

मूलतः हैदराबाद की रहने वाली 59 वर्षीय गौशिया खान खुद को 'पारो' नहीं बुलाती हैं. उन्होंने कहा, 'मेरे पति हैदराबाद गए और मुससे शादी की.' हालांकि कुछ समय और बातचीत करने के बाद उन्होंने बताया कि उनके देवर ने उन्हें बेचने की कोशिश की थी. वह हर बार बच निकलती थीं. गौशिया ने लगभग खुद के बारे में कहते हुए कहा, 'महिलाएं यहां सुरक्षित नहीं है. हमें खुद को सुरक्षित रखने के लिए बहुत मजबूत रहना पड़ता है.'

हैदराबाद से आने के कुछ सालों बाद और हरियाणवी से बात करना सीख ली है. खान अब वह महिला है जो मजबूत होने का सपना देखती है. वह जिला कानूनी प्राधिकरण का सदस्य है और मजबूत, हिंसक विवाह में फंसी महिलाओं की एकमात्र बचावकर्ता बन गई है. खान ने कहा, 'मैं एक पुलिस अधिकारी की तरह महसूस करती हूं.'

खान, संकट में फंसी महिलाओं की मदद के लिए गांवों में यात्रा करती हैं. फिरोजपुर नामक गांव में उनका घर अक्सर रेस्क्यू शेल्टर में बदल जाता है. खान ने कहा, 'ऐसा वक्‍त भी था जब लगभग 20-25 महिलाएं इकट्ठी हुई थीं क्योंकि उनके पति हिंसक थे या उनके परिवार के सदस्यों ने उन्हें बेचने या बलात्कार करने की कोशिश की थी.'

मेवात जिले में रहने वाली गौशिया ने कहा, 'मैंने कोशिश की है, लेकिन मैं अकेले ऐसा नहीं कर सकती. पुराने, शराब, हिंसक, या विधुर होने वाले पुरुष हरियाणा में पत्नियां नहीं पाते हैं. इसलिए वे पत्नियों को खोजने के लिए अन्य राज्यों में जाते हैं.'

मेवात जिले के किरंज गांव में, बिहिदा अपने 11 बच्चों और उसके दूसरे पति के साथ रहती हैं. पिछले 25 सालों में उसे घर नहीं मिला है. वह नहीं जानती कि उसके माता-पिता जीवित हैं या नहीं. उन्हें अपनों के नाम भी याद नहीं हैं. बांग्लादेश के खुलना जिले से अपने भाई के इलाज के लिए 12 वर्षीय बिहिदा कोलकाता आई थी. आखिरी बार उसने अपने माता-पिता को देखा था. अपने परिवार के साथ आखिरी याद के तौर पर उसने कहा, 'मैंने हावड़ा ब्रिज देखा था.'

एक हिंसक पति के साथ रहने के वर्षों के बाद, बिहिदा ने भागने की कोशिश की थी. तब 19 वर्षीय बिहिदा ने 32 वर्षीय मुआज से विवाह किया. वह हाल ही में विधवा हो गई. "उसने मुझसे शादी कर ली, मैंने एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए.' बिहिदा ने कहा कि वह अपने पति और उसके बच्चों के साथ खुश है लेकिन जब मैंने उसे अपने परिवार के बारे में पूछा, तो उसने मेरा हाथ पकड़कर कहा, 'मुझे कुछ नहीं पता. मैं वास्तव में उन्हें देखना चाहती हूं. क्या तुम मुझे ले जाओगी?.'

हरियाणा में पूरी तरह से अलग जीवन शैली को अपनाने की कोशिश में, बिहिदा की घर की यादें गायब हो गईं. बाद में, गौशिया खान ने मुझे बताया कि बिहिदा की छोटी बहन को भी हरियाणा लाया गया था. वह गायब हो गई. उसने कहा, 'सालों से, कोई नहीं जानता कि उसके साथ क्या हुआ.'

कांत ने कहा कि कुछ सालों तक रहने के बाद ज्यादातर महिलाएं आशा छोड़ देती हैं और सिर्फ जीवन स्वीकार करती हैं. कांत ने कहा, 'कई बार वे बचने की कोशिश करतीं हैं.' कार्यकर्ता ने कहा कि 'पारो' के पास संपत्ति या कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा, 'उनका काम एक परिवार चलाने और बच्चे पैदा करना है, यही कारण है कि उन्हें हरियाणा लाया जाता है.'

कांत ने बताया कि पश्चिम बंगाल से ज्यादातर महिलाएं इसलिए आती हैं क्योंकि वहां आम तौर पर गोरी लड़कियां मिलती हैं. लोग फेयर स्किन कलर के लिए 1 लाख रुपए तक खर्च करने को तैयार रहते हैं. कीमत शरीर के रंग के हिसाब से तय होता है.

ढाकला गांव के खाप पंचायत नेता ओम प्रकाश धनकड़ का मानना है कि बाहर से दुल्हन लाना आश्चर्यजनक नहीं है. उन्होंने कहा, 'यहां तक कि द्रौपदी के पांच पति भी थे.' उन्होंने कहा, हर तीसरे घर में 'पारो' है.

(न्यूज18 के लिए अद्रीजा बोस की रिपोर्ट) 

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
'हमारे देश की सबसे खूबसूरत चीज 'सेक्युलरिज़म' है लेकिन कुछ तो अजीब हो रहा है'- Taapsee Pannu

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi