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इस शख्स ने शुरू की थी तीन तलाक के खिलाफ जंग

1966 में मुंबई में विधानसभा के पास एक मार्च निकाला गया, महिलाओं की हाथों में ट्रिपल तलाक खत्म करने को लेकर बैनर और पर्चे थे जिसका नेतृत्व कर रहे थे हमीद दलवाई

Updated On: Jan 07, 2018 10:37 PM IST

FP Staff

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इस शख्स ने शुरू की थी तीन तलाक के खिलाफ जंग

तीन तलाक को कानूनी दायरे में लाने के लिए संसद में बिल पेश किया जा चुका है जो फिलहाल राज्यसभा में अटका पड़ा है. अगर यह बिल पास हुआ तो इसका पूरा श्रेय शायद मौजूदा सरकार को जाएगा लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं की आज से 50 साल पहले एक एंग्री यंग सेक्युलरिस्ट ने ट्रिपल तलाक को खत्म करने के लिए संघर्ष की शुरुआत की थी. सियासत के इस शोर में तीन तलाक के पहले आंदोलनकारी को भूला दिया गया है. वो नाम इतिहास की गुमनाम गलियों में कहीं खो गया है.

कौन था ये शख्स और क्या हैं उसकी संघर्ष गाथा

इस शख्स का नाम था हमीद दलवाई जिसने 60 और 70 के दशक में तीन तलाक के खिलाफ देश भर में अलख जगाई. हमीद ने ही मुस्लिम महिलाओं को ये हिम्मत दी की तलाक- ए- बिद्दत यानी इंस्टेंट तलाक के खिलाफ घरों से बाहर निकलें. हमीद ने महिलाओं को अपने लिए आवाज उठाने का जज्बा दिया

जब पहली बार तीन तलाक के खिलाफ उठी आवाज

1966 में मुंबई में विधानसभा के पास एक मार्च निकाला गया. महिलाओं की हाथों में ट्रिपल तलाक खत्म करने को लेकर बैनर और पर्चे थे जिसका नेतृत्व कर रहे थे हमीद दलवाई. ट्रिपल तलाक के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन का ये पहला मामला था.

इस मार्च में केवल 7 महिलाएं थीं जो तीन तलाक की शिकार हुई थी. महज 7 महिलाओं के मोर्चे की ये खबरे जब अगले दिन अखबारों की सुर्खियां बनीं तो पूरा मुस्लिम समाज हिल गया. रातों रात हमीद दलवाई सुर्खियों में आ गए.

हमीद का जन्म 29 दिसंबर, 1932 को महाराष्ट्र के कोंकण में हुआ था. इनका ताल्लुक मध्यमवर्गीय परिवार से था. जो आम मुस्लिम परिवारों की तरह धार्मिक रुढियों से बंधा हुआ था.हमीद शुरु से ही सामाजिक कुरीतियों का विरोध करते थे.

जब हमीद के पिता ने चौथी शादी की तो ये नाराज होकर मुंबई चले गए और सामाज कल्याण से जुड़े आंदोलनों में हिस्सा लेने लगे. ये तीन तलाक मुद्दे से उस समय रूबरू हुए जब इनके एक दोस्त की बहन को 18 साल की उम्र में ही तलाक मिला था. बस यही से हमीद दलवाई ने तीन तलाक के खिलाफ जंग छेड़ दी.

हमीद ने देश के संविधान को हर पर्सनल लॉ से उपर माना. हमीद ने सबसे पहले मुस्लिम महिलाओं को कानूनी जानकारी देनी शुरु की ताकि औरतें अपने हक को लेकर जागरुक बन सकें.

हमीद ने मुस्लिम सत्यशोधक समाज की स्थापना की जिसका मकसद था तीन तलाक को खत्म करके महिलाओं को समान अधिकार देना.

तीन तलाक के खिलाफ निकाले गए जुतूस में हमीद दलवाई (सबसे दाएं), तस्वीरः साभार न्यूज18

तीन तलाक के खिलाफ निकाले गए जुलूस में हमीद दलवाई (सबसे दाएं), तस्वीरः साभार न्यूज18

जब पहली बार मुस्लिम महिलाओं तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाई

हमीद की अगुवाई में देश में पहली बार मुस्लिम महिलाओं ने बेखौफ होकर तीन तलाक के खिलाफ हल्ला बोला. 1970 में मुस्लिम महिलाओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाई.

इस कॉन्फ्रेंस की सफलता से बौखलाए विरोधी भी हमीद की इस मुहिम के विरोध में उतर पड़े इसके बाद कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हमीद के खिलाफ आंदोलन शुरु हो गए. उनकी सभाओं में पथराव तक किया जाने लगा साथ ही कई बार उनपर जानलेवा हमला भी हुआ.

हमीद की ये पहल मौलवियों को रास नहीं आई जिसका खामियाजा हमीद के साथ उनके परिवार को भी भुगतना पड़ा.

आखिरकार रंग लाई हमीद दलवाई की मुहिम

विरोध और प्रदर्शन के दौर में हमीद दलवाई की मुहिम रंग लाई और बात दिल्ली तक पहुंच गई. उस समय राष्ट्रपति रहे ज्ञानी जैल सिंह, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी इस मुहिम की तारीफ की.

तत्कालीन विदेशमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तो यहां तक कह दिया था कि हिंदू समाज को भी एक दलवाई चाहिए.

उनकी मौत के बाद इस मुहिम की कमान उनकी बीवी ने संभाल ली.

1977 में हमीद की किडनी की गंभीर बीमारी से मौत हो गई. हमीद दलवाई की मौत के बाद भी आंदोलन थमा नहीं. उनकी बीवी मेहरुन्निसा ने मुस्लिम सत्यशोधक समाज के काम को आगे जारी रखा. आज भले ही हमीद दलवाई हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी जलाई हुई लौ अब मशाल बनकर हर घर को रौशन कर रही हैं.

(साभारः न्यूज18 हिंदी)

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