विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

राम रहीम: समाज में गैरबराबरी और भेदभाव से पैदा होते हैं ये बाबा

डेरा उस खाली जगह को भरता है, जहां राज्य फेल हो जाते हैं. चरमराती बेसिक सेवाओं की हालत में डेरा उन्हें अपनी मदद से आकर्षित करता है.

Kangkan Acharyya Updated On: Aug 29, 2017 11:40 AM IST

0
राम रहीम: समाज में गैरबराबरी और भेदभाव से पैदा होते हैं ये बाबा

स्वयंभू बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह के पीछे प्रशंसकों की इतनी बड़ी फौज होने की वजहें क्या हैं? अंधविश्वास निश्चित रूप से एक कारण है. लेकिन उसका संगठन डेरा सच्चा सौदा, जो सामाजिक ओहदा, ताकत की भावना और वित्तीय सुरक्षा भक्तों को देता है, उसका असर भी कई गुना दिखता है.

उसके कई अनुयायियों ने समूचे हरियाणा में जो उपद्रव मचाया, सरकारी और निजी संपत्ति को बर्बाद किया, उसने राज्य सरकार के प्रशासनिक तंत्र को पंगु बना दिया. सिरसा शहर में राज्य सरकार के प्रभुत्व को दोबारा स्थापित करने के लिए पुलिस को फ्लैग मार्च करना पड़ा.

इसमें कोई दोराय नहीं कि राम रहीम पर अंधविश्वास उसके अधिकतर अनुयायियों को डेरा के साथ जोड़ता है. डेरा के प्रचार के ताकतवर तंत्र ने फिल्मों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मौखिक प्रचार से राम रहीम की अलौकिक शक्तियों का लगातार प्रचार किया. उसके भक्तों के दिमाग पर इस तंत्र का प्रभाव हरियाणा की सड़कों पर तब दिखा, जब पिताजी (अनुयायियों के बीच इस नाम से लोकप्रिय) को बलात्कार का दोषी ठहराया गया.

ये भी पढ़ें: राम रहीम: हर जुर्म की सजा मिली तो जिंदगी भर जेल में रहेगा बाबा

समाज में बंटे ओहदों में भेदभाव है वजह

लेकिन भक्तों के पास से एके-47 राइफल्स और पिस्टल मिलना अलग संकेत देता है. वास्तविकता ये है कि आस्था की चादर के पीछे कुछ और भी कारण हैं, जिसने डेरा की लोकप्रियता को बढ़ाया है और इसे वैसा बना दिया है जैसा यह आज दिखता है. ओहदा, ताकत और वित्तीय सुरक्षा इनमें से कुछ कारण हैं. भारत ने सदियों से बाबाओं का उभार देखा है. इन बाबाओं के बनाए गए अधिकतर संप्रदाय भारतीय समाज में प्रचलित जाति प्रथा को नकारते हैं. इससे निचले पायदान पर रहने वाली जातियों को यहां एक तरह की आजादी का आभास होता है.

नए जमाने के गुरु माने गए राम रहीम ने अपनी तथाकथित अध्यात्मिकता को जाति प्रथा से खार खाए लोगों के खांचे में फिट कर दिया. राम रहीम को सजा होने से पहले तक डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी रहे विक्रम खत्री ने कहा कि मुख्याधारा के कुछ धर्मों में तथाकथित निचली जाति के लोगों को पूजास्थलों में पर्याप्त सम्मान नहीं मिलता है. यही वजह उन्हें अध्यात्मिक शांति के लिए दूसरा ठिकाना खोजने पर मजबूर करती है.

ये भी पढ़ें: राम रहीम को 20 साल जेल: अब क्या-क्या दांव खेल सकते हैं राम रहीम

उनका कहना है, 'अधिकतर मंदिरों में, तथाकथित निचली जाति के लोगों को तब तक बाहर इंतजार करने को कहा जाता है, जब तक दूसरे लोग पूजा नहीं कर लेते. कई बार उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. लेकिन डेरा में ऐसा नहीं होता है. धार्मिक कार्यक्रमों में सबको बराबर माना जाता है. सत्संग के लिए या फिर गुरु का प्रवचन सुनने के लिए हम सब एक जगह बैठते हैं. इसमें हमेशा बराबरी का भाव होता है.'

जाति से ऊपर इंसान का तर्क है लुभावना

डेरा अपने अनुयायियों को उपनाम बदलकर 'इंसान' करने के लिए प्रेरित करता है. इसे एक ऐसा नियम मानकर प्रचारित किया जाता है कि 'डेरा' मनुष्य के दूसरे गुणों के मुकाबले इंसानियत को ज्यादा तवज्जो देता है. इसलिए हैरानी नहीं होनी चाहिए कि डेरा के अनुयायियों में अधिकतर जाति प्रथा में निचली पायदान पर रहने वाले लोग हैं. उदार माहौल के अलावा, ऐसा लगता है कि डेरा अपने अनुयायियों को नए सामाजिक ओहदे का वादा भी करता है.

हरियाणा के पंचकुला में गुरमीत राम रहीम को बलात्कार मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सिरसा एक भूतिया शहर के रूप में बदलता नज़र आ रहा है.

हरियाणा के पंचकुला में गुरमीत राम रहीम को बलात्कार मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सिरसा एक भूतिया शहर के रूप में बदलता नज़र आ रहा है.

उनका कहना है कि 'एक अनुयायी जो अपनी जाति या गांव के अधिकतर लोगों को आसानी से मना लेता है उसे उनका नेता माना जाता है. चार सौ से पांच सौ लोगों के समूह में उसका सामाजिक ओहदा अध्यात्मिक गुरु का हो जाता है. अधिकतर लोग ये ओहदा हासिल करने डेरा आते हैं. ये नेता डेरा और उनके अनुयायियों के बीच संपर्क सूत्र होता है. वो डेरा के सभी संदेश उसके अनुयायियों तक पहुंचाता है और ये सुनिश्चित करता है कि जरूरत के समय पर ये लोग गुरु के साथ खड़े हों.'

नेताओं के संबंधों ने बढ़ावा दिया

ऐसा लगता है कि राजनीतिक नेताओं के साथ डेरा प्रमुख के संबंधों ने भी भक्तों की संख्या बढ़ाने में मदद की. सभी राजनीतिक दलों के नेता सार्वजनिक स्थानों पर उनके सामने सिर झुकाते थे.

ये भी पढ़ें: गुरमीत राम रहीमः बुराई के इन भगवानों के लिए हम और हमारा समाज दोषी है

यह केवल लंबे समय से उपेक्षित लोगों के लिए ही राम रहीम को सत्ता का केंद्र समझना संभव था, जो हरियाणा की राज्य सरकार के समानांतर था. ऐसा लगता है कि कई लोगों ने उसे सत्ता तंत्र के मार्ग के रूप में देखा था. डेरा के एक अन्य अनुयायी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि 'पिताजी' को नेताओं से नजदीकियों के कारण ही हरियाणा में ताकतवर माना गया. इस विशेष अनुयायी ने फर्स्टपोस्ट को बताया कि संगठन से उनका लगाव तब बढ़ा, जब कई भक्तों ने उनसे कहा कि डेरा का हिस्सा बनने के बाद उनका काम हो सकता है.

उन्होंने बताया कि डेरा में ये अक्सर कहा जाता था कि 'पिताजी' का एक फोन कॉल हरियाणा के किसी सरकारी कार्यालय में काम कराने के लिए काफी था. कई लोग उनके पास सिर्फ अपना काम कराने के लिए आते थे. इसके अलावा, डेरा ने अपने भक्तों को बेहतरीन मेडिकल सेवाएं उपलब्ध करा रखी है. भारत में जहां, स्वास्थ्य पर अपने जेब से 89.2 फीसदी तक खर्च करना पड़ता है, वहां इस मोर्चे पर कोई भी मदद गरीबों के लिए बड़ी राहत मानी जाती है.

इसी तरह फर्स्टपोस्ट का तर्क है कि डेरा प्रमुख उस खाली जगह को भरता है, जहां राज्य अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाते हैं. यह लेख इस बात को रेखांकित करता है कि "समूचे देश में जहां स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा रही हैं, गुरमीत राम रहीम के आश्रम में उनके लाखों भक्त बेहतरीन मेडिकल सेवा का लाभ उठाने को लेकर आश्वस्त हैं."

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi