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राम रहीम: 10 साल में 200 सुनवाई के बाद आया रेप केस में फैसला

24 सितंबर 2002 को इस पर संज्ञान लेते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस केस की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए थे

FP Staff Updated On: Aug 25, 2017 05:13 PM IST

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राम रहीम: 10 साल में 200 सुनवाई के बाद आया रेप केस में फैसला

सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत राम रहीम को रेप का दोषी करार दिया है. इस मामले में अब फैसला 28 अगस्त को सुनाया जाएगा. राम रहीम को 7 साल की सजा सुनाई जा सकती है.

आपको बताते हैं कि राम रहीम पर कैसे चला ये रेप का मामला-

2002: डेरा सच्चा सौदा के आश्रम में रहने दो साध्वियों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट को बेनाम चिट्ठी लिखी. जिसमें उन्होंने गुरमीत राम रहीम पर रेप का आरोप लगाया. उन्होंने इसकी जानकारी डेरा प्रमुख को देने से मना किया था. उनका कहना था कि राम रहीम के पंजाब और हरियाणा के राजनेताओं से अच्छे संबंध हैं. जो उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं.

24 सितंबर 2002: पत्र पर संज्ञान लेते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस केस की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए.

दिसंबर 2003: सीबीआई ने इस केस में जांच शुरू की. सीबीआई ने 18 साध्वियों से इस मामले में पूछताछ की. जिसमें दो साध्वियों ने कबूला कि उन्हें शुद्ध करने के नाम पर उनका रेप किया गया है.

30 जुलाई, 2007: पांच साल बाद सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की.

6 सितंबर 2008: डेरा प्रमुख के खिलाफ ट्रायल शुरू किया गया और उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया.

2009: ट्रायल के दौरान इस मामले की एक पीड़िता ने एक पत्र लिखा. पत्र में लिखा गया था कि गुरमीत राम रहीम उसके पिता समान हैं और राम रहीम ने कभी भी उनके साथ गलत बर्ताव नहीं किया. इस लेटर को सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया.

2010: सीबीआई ने इस पत्र पर आपत्ति जताई. ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता को हस्ताक्षर और लिखावट के नमूने देने के लिए कहा. लेकिन कोर्ट के इस आदेश खिलाफ उनके पिता हाईकोर्ट पहुंचे. जिसमें उन्होंने सीबीआई पर पीड़िता को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया.

अप्रैल 2011: इस बीच सीबीआई कोर्ट अंबाला से पंचकूला शिफ्ट की गई.

2013: हाईकोर्ट ने पीड़िता के पिता के आवेदन को खारिज कर दिया और पीड़िता को अपना सिग्नेचर और लिखावट के नमूने देने को कहा. ट्रायल कोर्ट में इस पर दोबारा सुनवाई शुरू हुई. इसके बाद पीड़िता ने अपनी लिखावट और हस्ताक्षर के नमूने दिए. जिसके बाद आई फोरेंसिक रिपोर्ट से साबित हो गया कि 2009 का लेटर पीड़िता ने नहीं लिखा था. क्योंकि दोनों की लिखावट मेल नहीं खाती थी. 

2007 से 2017 के बीच इस मामले की करीब 200 बार सुनवाई हुई. इस दौरान डेरा प्रमुख राम रहीम को अदालत ने जमानत जारी रखी.

25 अगस्त 2017: आखिरकार डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम रेप केस में दोषी करार हुए. कोर्ट ने 28 अगस्त को सजा सुनाने का ऐलान किया. दोषी करार देने के बाद राम रहीम के समर्थक भड़क उठे और हरियाणा के कई हिस्सों से हिंसा की खबरें आने लगी.

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