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बाबा राम रहीम का 'लूट ऑफ लव', पढ़ें पीड़ितों की कहानी उनकी जुबानी

जांच के दौरान सीबीआई को आश्रम की दो दर्जन से ज्यादा साध्वियों के यौन शोषण का पता चला

Narendra Kaushik Updated On: Aug 26, 2017 05:39 PM IST

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बाबा राम रहीम का 'लूट ऑफ लव', पढ़ें पीड़ितों की कहानी उनकी जुबानी

20 साल के राकेश धवन को पूरा यकीन है कि ये उनके गुरु गुरमीत राम रहीम की कृपा और ध्यान तकनीक का असर है कि, जो उनके पेट की 5 मिलीमीटर बड़ी पथरी पिघली है.

पंजाब के एक मध्यम आयु वर्ग के किसान, जो गुरमीत राम रहीम के निजी सुरक्षा दस्ते के सदस्य हैं, और कोर्ट की पेशी और सार्वजनिक जगहों पर उनकी हिफाजत करते हैं. उनका कहना है कि डेरा प्रमुख ने अपनी कृपा से एक इंटरव्यू में उनके बेटे की मदद की, जिससे उसकी सरकारी नौकरी लग सकी.

गुरमीत राम रहीम के मीडिया हैंडलर आदित्य इंसा, जो कि दिल्ली के एम्स अस्पताल में नेत्र चिकित्सक रह चुके हैं, खुद की एक कामुक और रसिया व्यक्ति की छवि से मुक्ति के लिए डेरा प्रमुख को श्रेय देते हैं.

साल 2015 में एक इंटरनेशनल मैगजीन के लिए लेख लिखते वक्त मैंने डेरा सच्चा सौदा का दौरा किया था. उस दौरान सिरसा के आश्रम में मैंने गुरमीत राम रहीम की कृपा और चमत्कारों की तरह-तरह की कहानियां सुनीं. जिन पर आप सहज विश्वास नहीं कर सकते.

बाबा का 'लूट ऑफ लव'

डेरा बाबा के समर्थकों ने मुझे बताया कि गुरू द्वारा फेंके गए उनके पुराने कपड़े, मोजे और टोपी को वो लोग बड़ी श्रद्धा से उठा लेते हैं, और स्मृति चिन्ह के रूप में अपने पास संभाल कर रखते हैं. गुरू की ये चीजें पाकर समर्थक खुद को बड़ा भाग्यशाली समझने लगते हैं.

डेरा प्रमुख की दो बेटियां और एक बेटा है. बड़ी बेटी का चरणप्रीत और छोटी का नाम अमरप्रीत है. इनके अलावा राम रहीम ने एक बेटी को गोद ले रखा है. गुरमीत राम रहीम के बेटे की शादी भठिंडा के पूर्व विधायक हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी से शादी हुई है.

बधियाकरण केस में बाबा के खिलाफ याचिका दायर करने वालों में से एक हंसराज चौहान के मुताबिक, साल 2000 में श्रीगंगानगर के शाह सतनामजी स्पेशियलटी अस्पताल में जब उनके अंडकोष हटा दिए गए, तब बाबा गुरमीत राम रहीम बहुत खुश हुए थे. मुलाकात के दौरान बाबा ने उनसे कहा था, 'अब तुम असली मर्द बन गए हो. साथ ही अपने एक पुराने कपड़े को फेंकते हुए कहा था कि, 'लूट ऑफ लव'.

अक्सर परिवार का ही कोई न कोई सदस्य ही अपने परिजन को डेरे में दाखिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जैसे कि कुरुक्षेत्र के निवासी रंजीत सिंह को ही लीजिए. जिनकी जुलाई 2002 में डेरा के अनुयायियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. उन्होंने अपनी दो महिला रिश्तेदारों को आश्रम में दाखिल कराया था. इनमें से ही एक ने बाद में बाबा के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज कराया था, जिसमें गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराया गया है.

रंजीत सिंह ने अपनी महिला रिश्तेदारों के कटु अनुभवों और उत्पीड़न की कथा सुनकर उन्हें आश्रम से वापस बुला लिया था. उधर डेरा प्रमुख को शक था कि, उस गुमनाम चिट्ठी के प्रकाशन के पीछे रंजीत का हाथ है, जिसमें एक साध्वी ने उनपर यौन शोषण का आरोप लगाया था.

हंसराज पर हुए जुर्म दर्शाते हैं डेरा की क्रूरता

टोहाना निवासी 37 साल के हंसराज चौहान का कहना है कि वो महज 5 साल के थे. जब माता-पिता उन्हें गुरू के पास ले गए थे. उस वक्त गुरमीत राम रहीम ने उनसे पंजाबी भाषा में एक मंत्र का पाठ करने के लिए कहा था. जिसका अर्थ होता है कि भगवान सत्य और निराकार है. मंत्र का पाठ करने के बाद गुरू ने उन्हें खाने के लिए मिठाई दी थी. शुरू में उनका काम आश्रम में आने वाले लोगों को पानी पिलाना था. इसके अलावा सभा में गुरु के आगमन और प्रवचनों के बारे में घोषणा करने की जिम्मेदारी भी उनके पास थी.

इसके बाद हंसराज आश्रम में खेतीबाड़ी और गुरू के प्रवचनों की रिकॉर्डिंग का काम देखने लगे. साथ ही उन्होंने गुरू के प्रवचनों के दौरान भजन गाना और संगीत बजाना भी शुरू कर दिया.

विवाद बढ़ता देख राम रहीम ने सर्वोच्च सिख बॉडी अकाल तख्त से माफी मांगी थी. इस मामले में 2009 में सिरसा और 2014 में बठिंडा कोर्ट में केस दर्ज किया गया था. हालांकि बाद में कोर्ट ने इस केस को खारिज कर दिया था.

गुरमीत राम रहीम के खिलाफ गवाह बन चुके सिरसा निवासी 44 साल के गुरदास तूर को उनके कांस्टेबल पिता ने आश्रम में दाखिल कराया था. तूर के मुताबिक, लोग हंसराज चौहान और महिला गायकों के गाने सुनना पसंद करते थे. तूर ने आगे बताया, 1994 में हिमाचल प्रदेश में आश्रम के निर्माण में हंसराज समेत कई नए अनुयायियों ने काफी सहयोग किया था.

हंसराज चौहान रोजाना अपने गृहनगर टोहाना से सिरसा आते-जाते थे. लेकिन 5 साल बाद उन्हें सिरसा आश्रम के छात्रावास में साधु की तरह रहने के निर्देश दिए गए. इसे हंसराज की बड़ी पदोन्नति माना गया, क्योंकि इसके लिए हंसराज ने गुरमीत राम रहीम के निजी कक्ष में जाकर अनुरोध किया था.

हंसराज ने आह भरते हुए बताया कि, इसके बाद उन्हें श्री सतनामजी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में ले जाया गया. जहां ऑपरेशन के जरिए उनके दोनों अंडकोष हटा दिए गए. अब हार्मोन के असंतुलन की वजह से उनके न तो मूंछें उगती हैं और न ही बगलों और छाती के बाल.

क्या सिखाया जाता है आश्रम में

आश्रम में अनुयायियों को सिखाया जाता है कि, गुरूजी से कभी सवाल मत करना. उनके सम्मान की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहना. चाहे उसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े. यही वजह है कि गुरमीत राम रहीम पर उंगली उठने पर डेरा समर्थक बहुत जल्द हिंसा पर उतारू हो जाते हैं. मैंने खुद ऐसा व्यक्तिगत अनुभव किया है. साल 2013 में उत्तरी दिल्ली में एक चुनाव पूर्व सर्वे के दौरान मैं एक डेरा समर्थक से मिला. जब मैंने उससे उसकी आस्था पर सवाल पूछा तो वो भड़क गया और मुझे गालियां देने लगा. हाल ये हुआ कि उस डेरा समर्थक की बदतमीजी से बचने के लिए मुझे वहां से भागना पड़ा.

लाखों में लगती है सब्जियां और फलों की बोली

अनुयायियों के लिए गुरमीत राम रहीम के शब्द पत्थर की लकीर हैं, उन पर कोई भी सवाल नहीं उठा सकता है. सिरसा के आश्रम में सब्जियों और फलों की टोकरियों की होने वाली नीलामी इस बात को साबित भी करती है. इस नीलामी में शामिल होने के लिए अलग-अलग इलाकों के लोगों को न्यौता भेजा जाता है. जहां सब्जियों और फलों की एक टोकरी को लाखों रुपए में नीलाम किया जाता है. जबकि उसकी बाजारू कीमत महज कुछ सौ रुपये ही होती है.

डेरे के पूर्व मैनेजर फकीर चंद 1991 में गायब हो गए थे, हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि फकीर चंद को डेरा प्रमुख ने गायब कराया. यह मामला भी सीबीआई के पास जांच के लिए आया था.

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन यानी सीबीआई को डेरा प्रमुख के खिलाफ जांच में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि डेरे का कोई भी अनुयायी गुरू के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं था. जांच के दौरान सीबीआई को आश्रम की दो दर्जन से ज्यादा साध्वियों के यौन शोषण का पता चला. लेकिन एफआईआर और गवाहों के अभाव में सीबीआई उन मामलों पर कार्रवाई नहीं कर पाई. पीड़ित साध्वियों को गुरमीत राम रहीम के गुफानुमा बैडरूम में ले जाने वाली ज्यादातर महिला गार्ड्स ने सभी आरोपों से इनकार कर दिया.

फिर भी लोगों को क्यों है विश्वास

डेरा समर्थकों का विश्वास है कि गुरू उन्हें मोक्ष के मार्ग पर ले जाएंगे. वो बड़ी शान से गुरू द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक कार्यों और नशा मुक्ति कार्यक्रमों का बखान करते हैं. फतेहाबाद में एक रेस्टोरेंट के मालिक डेरा प्रमुख के बहुत बड़े भक्त हैं. उनके मुताबिक, गुरू ने पंजाब को नशा मुक्त कराने में बड़ा योगदान दिया है.

इस रेस्टोरेंट मालिक के बेटे का दावा है कि डेरे से जुड़ने के बाद उसकी सिगरेट पीने की लत दूर हो गई. अनुयायियों का कहना है कि, गुरू ने रक्तदान और नेत्र शिवरों का आयोजन करके गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया है. साथ ही वो सेक्स वर्कर्स की शादी कराने और दैवीय आपदाओं में मदद के लिए हमेशा आगे रहे हैं.

जांच एजेंसियों को भटकाने के लिए किए सामाजिक कार्यक्रम

गुरमीत राम रहीम ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि अगर आपको तेजाब हमले की पीड़ित किसी लड़की की जानकारी है, तो मुझे सूचित करें, मैं उसे अपनी बेटी के तौर पर अपनाकर उसका इलाज कराऊंगा. अगर वो चाहेगी तो मैं उसकी शादी भी कराऊंगा. डेरा प्रमुख के इस ट्वीट को 8,500 बार रिट्वीट किया गया था.

सिरसा के सांध्य दैनिक के संपादक रामचंद्र छत्रपति पर 24 अक्टूबर 2002 को कातिलाना हमले का आरोप है. छत्रपति को घर से बुलाकर पांच गोलियां मारी गई थीं.21 नवंबर 2002 को छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी. ये केस भी कोर्ट में चल रहा है.

लेकिन गुरमीत राम रहीम के विरोधियों का मानना है कि बाबा के सभी सामाजिक कार्यक्रम उनपर बलात्कार, हत्या और बधियाकरण के आरोप लगने के बाद शुरू हुए, ताकि जांच एजेंसियों को भटकाया जा सके. डेरा प्रमुख को सभी अनुयायी पिताजी का दर्जा देते हैं. लेकिन गुरू कभी उनकी गलतियों और गुनाहों की जिम्मेदारी नहीं लेते.

साल 2015 में एक इंटरव्यू के दौरान गुरमीत राम रहीम ने मुझसे कहा था कि उनके किसी समर्थक या गार्ड ने अगर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर गोली चलाई है. और रणजीत सिंह की हत्या की है, तो इसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. आपको बता दें कि छत्रपति मामले में पुलिस ने जो रिवॉल्वर आला-ए-कत्ल के तौर पर बरामद की थी, उसका लाइसेंस डेरा के मैनेजर के नाम पर था.

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