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कतर की नाकेबंदी: महंगा होगा दोहा का सफर! जानिए भारत पर क्या होगा असर

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कतर में रहने वाले भारतीयों को लेकर होगी

FP Staff Updated On: Jun 06, 2017 12:36 PM IST

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कतर की नाकेबंदी: महंगा होगा दोहा का सफर! जानिए भारत पर क्या होगा असर

सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कतर से अपने कूटनीतिक संबंध तोड़ लिए हैं. इसके चलते अरब जगत में राजनीतिक और आर्थिक संकट की स्थिति तो पैदा हो ही गई है, इस विवाद का भारत पर भी असर हो सकता है.

कतर जाना होगा मुश्किल, महंगा

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कतर में रहने वाले भारतीयों को लेकर होगी. उनके लिए अरब क्षेत्र में यात्रा मुश्किल हो सकती है. हजारों भारतीय हर हफ्ते कतर एयरवेज का इस्तेमाल भारत और कतर के बीच या उस क्षेत्र के लिए यात्रा के लिए करते हैं. हालांकि कतर के लिए उड़ानें बंद नहीं होंगी. हां, उड़ानें लंबी और महंगी हो सकती हैं.

दोहा पहुंचने में अब ज्यादा समय लगेगा क्योंकि सऊदी अरब और बहरीन जैसे देश कतर की उड़ानों पर पाबंदी लगा रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक भारतीय एयलाइन कंपनी के ऑपरेशंस हेड के हवाले से खबर दी है कि यूएई ने भारतीय एयरलाइंस कंपनियों से कह दिया है कि भारत-दोहा रूट वाली फ्लाइट्स को उनके एयर स्पेस से गुजारने के लिए अनुमति लेनी होगी. अगर यूएई इसकी अनुमति देता है तो विमान उस रूट से जा सकते हैं, वरना उत्तर और दक्षिण भारत से उड़ान भरनेवाली फ्लाइट्स को लंबी दूरी वाला रूट अपनाना होगा.’

उड़ानों को अरब सागर के ऊपर से ईरान में प्रवेश करने के बाद सीधे अरब की खाड़ी के रास्ते दोहा जाना होगा. ऐसे में उड़ानों का समय बढ़ सकता है. जाहिर है ऐसे में उड़ानें महंगी भी हो जाएंगी. दोहा रूट बदलने से भारतीय यात्रियों पर बड़ा असर होगा, खासकर अभी गर्मी की छुट्टियों के मद्देनजर. दोहा होकर आगे की ट्रैवल प्लानिंग करने वाले यात्री परेशान होंगे.

बता दें कि जेट एयरवेज, एआई एक्सप्रेस और इंडिगो के साथ-साथ कतj एयरवेज भारत-दोहा के बीच उड़ानें संचालित करती है.

सोमवार को कतर की नाकेबंदी के बाद खाड़ी देशों की कम-से-कम छह एयरलाइंस कंपनियां अमीरात, इतिहाद, एयर अरबिया, फ्लाइ दुबई, सऊदी और गल्फ एयर, कतर से जुड़ी अपनी उड़ानें स्थायी तौर पर रद्द कर चुकी हैं.

तेल होगा महंगा?

फिलहाल भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत पर बड़ा असर नहीं दिख रहा है. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में 1 फीसदी का इजाफा हो गया है. हालांकि भारत की कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी का कहना है कि इससे गैस की सप्लाई पर कोई खास असर नहीं होगा. पेट्रोनेट में पेट्रोनेट एलएनजी भारत की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी है. यह कंपनी सालाना 8.5 मिलियन टन एलएनजी की खरीद कतर से लॉन्ग टर्म करार के तहत करती है.

किसकी ओर जाएगा भारत?

भारत और कतर के बीच व्यापारिक संबंध बहुत मजबूत हैं. कतर को भारत से निर्यात 2014-15 में 1.05 अरब डॉलर के करीब था और कुल दोतरफा व्यापार 15.67 अरब डॉलर पहुंचा था. भारत की कई बड़ी कंपनियों के पास कतर में बड़े प्रोजेक्ट्स हैं. हालांकि भारत से सऊदी अरब से भी अच्छे संबंध हैं. ऐसे में भारत के लिए इस तनातनी में किसी एक पक्ष को चुनना मुश्किल होगा.

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