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गुजरात चुनाव पर क्या कहता है ज्योतिष: नतीजे आएंगे और सबको चौंकाएंगे

गुजरात चुनाव की पेचीदगी को मद्देनजर चुनावी भविष्यवाणियां भी दिलचस्प हो चली हैं

Updated On: Nov 28, 2017 08:37 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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गुजरात चुनाव पर क्या कहता है ज्योतिष: नतीजे आएंगे और सबको चौंकाएंगे

जैसे-जैसे गुजरात चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है आंकलन और वादों की झड़ी लगनी शुरू हो गई है. चाय बेचने से लेकर देश बेचने तक की बात हो रही है. क्या होगा परिणाम, किसकी बनेगी सरकार. इस मुद्दे पर गुजरात सहित देश के कई हिस्सों में चर्चाओं का बाजार गर्म है. राजनीतिक पंडितों के साथ-साथ ज्योतिष के पंडित भी अपने-अपने हिसाब से गणित लगाने में लग गए हैं.

सोमवार को पीएम मोदी के मैदान में उतरते ही गुजरात का चुनाव गुजरात का बेटा बनाम बाहरी बनता दिख रहा है. हाथ का दावा है कि अब की बार पंजे में सरकार तो उधर बीजेपी कह रही है कि अबकी बार भी खिलेगा कमल.

हालांकि, इस बार ज्योतिष के जानकार भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. इन ज्योतिषाचार्यों का आकलन है कि हर दिन ग्रहों की दिशा बदलती है. ऐसे में ठीक-ठीक अनुमान लगाना मुश्किल साबित होता है. फिर भी ज्योतिष के जानकार पीएम मोदी को ही अपनी पसंद बता रहे हैं.

खास बात यह है कि इन चुनावों में बीजीपी और कांग्रेस पार्टी से कहीं ज्यादा पीएम मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है. खासकर गुजरात चुनाव का सीधा असर नरेंद्र मोदी के 2019 के मिशन और राहुल गांधी के भविष्य पर पड़ने वाला है.

नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद पहली बार पीएम मोदी के लिए यह चुनाव उनकी लोकप्रियता का नया पैमाना साबित करने वाला है तो राहुल गांधी के लिए चुनावों की नतीजे उनके लिए भविष्य की राजनीति की इबारत लिखेंगे.

modi rajkot

खास बात यह है कि इस बार राजनीतिक पंडितों के साथ ज्योतिष भी स्पष्ट बात करने की स्थिति में नहीं लग रहे हैं. कुछ ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि विपरीत परिस्थिति में भी मोदी बाजी मार ले जाएंगे तो कुछ प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य इस मुद्दे पर बोलने से बच रहे हैं.

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कुछ प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ज्योतिष में कहा गया है कि राजतंत्र के बारे में कभी भी फलांदेश नहीं करना चाहिए. वाराणसी के रहने वाले ज्योतिषाचार्य आचार्य वैभव फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए कुछ ज्योतिषाचार्यों की मानसिकता यह होती है कि जो भी सत्ता पक्ष के नजदीक दिखे या जिसके पक्ष में भी जनाधार होता दिखाई दे, उसके पक्ष में फलांदेश कर दें. गुजरात में इस बार की परिस्थितियां पहले की तुलना में अलग होती हुई दिखाई दे रही हैं. मैं इसलिए इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलना चाहता हूं कि कुछ लोगों के मन की बात न बोलूं तो वह सोशल मीडिया पर लठैती करने लगते हैं. मेरा मानना यह है कि सत्ता के बारे में भविष्यवाणी करना ठीक बात नहीं है.’

वहीं चंडीगढ़ के रहने वाले ज्योतिषाचार्य भारती शर्मा फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए साल 2014 से जो नरेंद्र मोदी की लहर चल रही थी वह इस बार तो नहीं रहेगी. गुजरात में भी पहले की तुलना में सीटों की संख्या में बीजेपी की कमी आएगी. हिमाचल प्रदेश में भी काफी मशक्कत के बाद सरकार बनेगी. मोदी जी पर शनि की साढ़े साती चल रही है क्योंकि चंद्रमा उनके भाग्य स्थान का मालिक है इसलिए मोदी जी का अभी तक जादू चल रहा था और उनके लिए यह पॉजिटिव था. लेकिन, 26 अक्टूबर 2017 से मोदी जी की पहली वाली स्थिति नहीं रहेगी. अब मोदी जी अगर अच्छी बात भी करेंगे तो वह उनके विपरीत जाएगी. इसके बावजूद क्योंकि विपक्ष मजबूत नहीं है इसलिए जीत तो ये जाएंगे पर सीटें कम आएंगी.’

साल 2017 का गुजरात विधानसभा चुनाव को 2019 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख दाव पर लगी है तो बीजेपी के चाणक्य अमित शाह की भी अग्निपरीक्षा की घड़ी है. हालांकि, पहले 2014 फिर 2019 में देश और उत्तरप्रदेश को जीतकर अमित शाह ने यह साबित कर दिया है कि अमित ‘नीति’ का फिलहाल तोड़ किसी के पास नहीं हैं.

Amit Shah

यह भी सही है कि राहुल गांधी ने जिस तरह से गुजरात में कमान संभाली है, इससे उनकी छवि बेहतर जरूर हुई है. लेकिन, कांग्रेस के लिए गुजरात अभी भी काफी दूर की कौड़ी साबित होने वाला है.

यहां पर गुजरात के मिजाज को समझना बहुत जरूरी है. गुजरात में आज भी ‘मोटा भाई’ का कोई मुकाबला नहीं है. पाटीदार समुदाय नाराज जरूर है और शायद यही वजह है कि मीडिया और पोल पंडितों का एक धड़ा यह धारणा बनाने में जरूर सफल हुआ है कि गुजरात का गणित जटील हो गया है.

गौरतलब है कि नाराज पाटीदार समुदाय का वोट अभी भी किसी एक के खाते में जाते नहीं दिख रहा है. इसकी वजह एक और भी है. इससे पहले भी ‘मोटा भाई’ के नेतृत्व में चुनाव हुए हैं. नाराजगी तब भी थी. इस समुदाय ने ‘मोटा भाई’ को कभी निराश नहीं किया. इसको आप एक तरह से गुजरात का ‘मोटा गणित’ कह सकते हैं.

इस गणित को तब और बल मिल जाता है जब ग्रहों का गणित भी कुछ इसी ओर इशारा कर रहा हो. इससे ना सिर्फ बीजेपी बल्कि ‘मोटा भाई’ को भी राहत मिलती दिख रही है.

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इस पर इसलिए भी ध्यान देना जरूरी है क्योंकि साल 2014 में जब चुनावी विश्लेषक और मीडिया यह फैसला नहीं कर पा रहे थे कि अब की बार किसकी सरकार बनेगी. उस समय ग्रहों के गणित को समझने वाले कई ज्योतिषाचार्यों ने बता दिया था कि अब की बार किसकी सरकार बनेगी.

साल 2014 में भी ज्योतिष का आकलन अकाट्य हुआ और सत्ता की बागडोर बीजेपी के हाथ में गई. एक बात और याद दिलाना जरूरी है 2014 में देश की जनता और राजनीतिक गलियारे के महारथी प्रधानमंत्री कैंडिडेट के नाम की घोषणा के बावजूद यह मान रहे थे कि अंकों के खेल में हो सकता है कि नरेंद्र मोदी के नाम पर सहमति न बनें और एन वक्त पर प्रधानमंत्री का ताज किसी ओर के सिर पर चला जाए. परिणाम आने तक संशय था, लेकिन ग्रहों का गणित इस उहा-पोह में नहीं था.

Rahul Gandhi garlanded

2014 के बाद दिल्ली, बिहार और पंजाब को छोड़ दें तो जहां भी चुनाव हुए बीजेपी की सरकार बनी जीत के इस सीरीज ने मोदी का हौसला जरूर बढ़ाया है, लेकिन गुजरात में होने वाला चुनाव मोदी के लिए साख का सवाल है. क्योंकि 2019 में फाइनल मैच खेलना है, इसलिए इस सेमीफाइनल को जीतना जरूरी है. संयोग देखिए ग्रहों का गणित भी एक बार फिर से जीत की ओर इशारा कर रहा है.

कुल मिलाकर साफ है कि गुजरात कई मायने में मोदी और शाह के लिए उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजों से भी कहीं ज्यादा अहम साबित होने वाला है. गुजरात कहीं बीजेपी के हाथ से फिसल गया तो पीएम मोदी और बीजेपी के लिए सियासी गणित भी बदल सकता है. मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी गुजरात से हैं और विपरीत चुनाव परिणाम का असर भी उनके कार्यकाल पर भारी पड़ेगा.

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