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मानेकचौक: गुजराती खाने का मार्केट जिसमें गुजरात का कुछ भी नहीं

मीठा सैंडविच और शेज़वान चटनी के साथ पाव भाजी आपको सिर्फ इसी मार्केट में मिलेगी

Updated On: Nov 27, 2017 12:15 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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मानेकचौक: गुजराती खाने का मार्केट जिसमें गुजरात का कुछ भी नहीं

शाम के 7.30 बजे थे. बड़ी दुकानों की रौनक उतर रही थी. अगली सुबह फिर से खुलने की तैयारी के साथ कुछ दुकानों का शटर भी गिर रहा था. अहमदाबाद की अनजानी गलियों में मैं यहां का फेमस मानेकचौक मार्केट खोज रही थी. मानेकचौक, एक ऐसा बाजार जहां खाने-पीने की तमाम चीजें मिलती हैं. लाल दरवाजा से करीब एक किलोमीटर चलने के बाद मुझे यह मार्केट मिला. करीब आधे घंटे तक इधर उधर घूमने के बाद भी मुझे खाने-पीने की कोई ढंग की दुकान नहीं मिली.

वहां से लौटने का मन बना चुकी थी. तभी सोचा किसी से पूछ लूं कि क्या यही मानेकचौक मार्केट है. गुजर रहे राहगीर से मैंने पूछा, ‘क्या मानेकचौक यही है.’ उसने कहा, ‘हां.’ मैंने तुरंत पूछा लेकिन यहां खाने पीने की कोई दुकान तो है नहीं. उसने मुस्कुराते हुए कहा, ‘बस आधे घंटे के बाद देखना.’

आधे घंटे में पूरा बाज़ार

रात के 8 बज गए थे. पूरा नजारा एकदम बदल गया. मुझे लगा एलिस इन वंडरलैंड की तरह मैं भी किसी फूडलैंड में आ गई हूं. हर तरफ से छोटे-छोटे ठेले आ रहे थे. हर एक ठेले के साथ करीब 10-15 लोग बिजली की स्पीड से सेटअप लगा रहे थे. फटाफट 8-10 ठेलों ने अपनी जगह पकड़ ली. एक टेंपररी बोर्ड में बल्ब के प्लग फिट कर दिए गए.

वो जगह जो आधे घंटे पहले अंधेरे में डूब गई थी अब फिर से रोशनी में नहा गई. जिस जगह पर आधा घंटा पहले बड़ी दुकानों दबदबा था वहां अब छोटे ठेलों का कब्जा हो गया था. कुछ एक बड़ी दुकानें जो खुली हुई थीं उनके सामने फटाफट पर्दा लगा दिया गया था, ताकि बड़ी दुकानें पूरी तरह छिप जाएं. पूरी सड़क पर एकदम चिपकाकर टेबल और कुर्सियां लगा दी गई थीं. कुर्सियां एक दूसरे से इतनी ज्यादा चिपकी थीं कि उनसे तब तक बाहर नहीं निकला जा सकता जब तक उस कतार के सभी लोग बाहर ना निकल जाएं. लेकिन हैरानी की बात थी कि इस तरह की व्यवस्था से किसी को शिकायत नहीं थी और ना ही किसी को दिक्कत हो रही थी.

इस बाजार की रौनक पुरजोर थी. लोगों की भीड़ उमड़ चुकी थी. खाली कुर्सियां एक एक करके भर चुकी थीं. डोसा, पुलाव, सैंडविच, पिज्जा, पाव भाजी और पापड़ ही इस बाजार की डिमांड थी. मैं हैरान थी. अहमदाबाद का सबसे बड़ा फूड हब और एक भी गुजराती डिश नहीं. यही इस बाजार की खासियत थी कि फूड लवर्स के इस बाजार में देश के अलग-अलग कोने की डिश थी, जिसे गुजराती बड़े चाव से खा रहे थे.

हर खाने का अलग अंदाज

क्या आपने कभी पावभाजी के साथ चाईनीज़ शेजवान चटनी खाई है. अगर आप गुजरात में नहीं रहते हैं तो शायद आपको यह मौका नहीं मिला होगा. आमतौर पर मोमोज़ और नूडल्स जैसे चाइनीज खाने में इस्तेमाल होने वाली शेजवान चटनी यहां पाव भाजी के प्लेट का हिस्सा थी. यह कॉम्बिनेशन क्यों था इस बात का जवाब किसी के पास नहीं था.

गुजरात के बाजार में मुंबई के पाव के साथ चायनीज़ चटनी एक अनोखा उदाहरण है

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कुछ इसी तरह का गुजराती तड़का डोसा में भी देखने को मिला. प्लेन डोसा में आम तौर पर कुछ नहीं होता. लेकिन इस बाजार में प्लेन डोसा में तीन-चार चम्मच मक्खन डालते हैं. जी हां, अगर आपने यह सोचकर प्लेन डोसा ऑर्डर किया कुछ हल्का खाया जाए तो उसके लिए यह बाजार नहीं है. मानेकचौक का सैंडविच भी इतना हेवी है कि सिर्फ एक प्लेट में आपका डिनर हो सकता है.

गुजरात समुद्र के किनारे बसा राज्य है. कच्छ के रण जैसे नमकीन इलाकों की खारी जलवायु के चलते यहां सब्जियां कम उगाई जाती हैं. इसीलिए गुजराती खाने में हरी सब्जियों का इस्तेमाल कम होता है. जैन प्रभाव वाले ज्यादातर गुजराती लोग शाकाहारी होते हैं. इसलिए दूसरे समुद्र तटीय इलाकों की तरह मछलियां और सी-फूड भी नहीं खाते हैं. इन्हीं सबके चलते गुजराती खाने में बेसन, दाल, और कढ़ी के साथ-साथ मक्खन और चीज़ का भरपूर इस्तेमाल होता है.

manekchowk market (1)

हालांकि मानेकचौक के खाने में दुनिया भर के बाज़ारीकरण का प्रभाव दिख रहा था. यहां सैंडविच की कई वैरायटी थी. अगर आपका मीठा खाने के मन हो और सैंडविच भी खाना चाहते हैं तो चॉकलेट सैंडविच या पाइनएपल सैंडविच ट्राई कर सकते हैं. यहां पिज्जा भी एक अलग अंदाज में पेश किया जाता है. एक छोटे बन के ऊपर सॉस की एक लेयर लगाकर बेक करते हैं. फिर उसके ऊपर भरपूर चीज स्प्रेड किया जाता है. इस तरह बिना किसी टॉपिंग का तैयार हो जाता है लजीज पिज्जा.

अगर आप अपने ऑर्डर का इंतजार कर रहे हैं तो पापड़ खाते हुए टाइमपास कर सकते हैं. इस बाजार में रात 8 बजे से लेकर 1 बजे तक रौनक रहती है. उसके बाद यह बाजार उतनी ही स्पीड से सिमट जाता है जितनी तेजी से यह लगा था. इसी के साथ वंडरलैंड की तरह यह फूडलैंड भी मिनटों में मेरी आंखों के सामने से गायब हो जाता है.

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