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जीएसटी की राह रोकने के लिए नोटबंदी को विपक्ष ने बनाया नया हथियार

जीएसटी के लागू होने की राह में बाधा पैदा हो सकती है

Updated On: Jan 09, 2017 09:17 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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जीएसटी की राह रोकने के लिए नोटबंदी को विपक्ष ने बनाया नया हथियार

लंबे समय से अटकी हुई महत्‍वाकांक्षी अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली जीएसटी (माल एवं सेवा कर) के सामने एक और अड़चन आ गई है- नोटबंदी. अब तक हालांकि यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि जीएसटी परिषद की बैठक में केंद्र और राज्‍यों के बीच चल रही परिचर्चा को यह किस हद तक प्रभावित करेगी, लेकिन इस बात के साफ संकेत हैं कि कुछ राज्‍य इस मसले पर विरोध का रुख अपनाएंगे.

शनिवार को हुई जीएसटी परिषद की पांचवीं बैठक में कुछ राज्‍यों के वित्‍त मंत्रियों ने नोटबंदी और उसके चलते राज्‍यों में पैदा हुई नई वित्‍तीय परिस्थिति का मुद्दा उठाया था. बैठक के बाद केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'राज्‍यों के वित्‍त मंत्री नोटबंदी और उससे उपजी वित्‍तीय परिस्थिति पर बहस करना चाहते थे लेकिन यह विषय जीएसटी परिषद के अधिकार-क्षेत्र में नहीं आता है.'

जीएसटी के लागू होने की राह में बाधा

मुख्‍य विपक्ष की जगह हथियाने की कोशिश में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी नोटबंदी का मुद्दा उठाकर इस विरोध की अगुवाई में जुट गई हैं जिसके चलते जीएसटी के लागू होने की राह में बाधा पैदा हो सकती है. कुछ दूसरे राज्‍य जो जीएसटी पर ऐसा ही सोच रहे हैं, उनके साथ जा सकते हैं.

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फोटो: पीटीआई

नोटबंदी की कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल के वित्‍त मंत्री अमित मित्रा ने कहा था कि अप्रैल 2017 से जीएसटी को लागू कर पाना मुश्किल होगा. उन्‍होंने कहा था कि 500 और 1000 के नोटों को अचानक बंद कर दिए जाने से आर्थिक सुस्‍ती आ गई है और राज्‍यों को अपेक्षा से उलट ज्‍यादा नुकसान हो रहा है. उनका संकेत दरअसल टीएमसी प्रमुख के इस विचार की पुष्टि कर रहा था कि जीएसटी को लागू करने का लक्ष्‍य अव्‍यावहारिक होगा और यह मसला अब नोटबंदी में फंस चुका है.

पेशे से अर्थशास्‍त्री अमित मित्रा फिक्‍की के महासचिव रह चुके हैं. संयोग है कि जीएसटी पर राज्‍यों के वित्‍त मंत्रियों की विशेषाधिकार प्राप्‍त समिति के प्रमुख के बतौर उन्‍होंने अतीत में जीएसटी के पक्ष में राज्‍यों को एकमत करने में अहम भूमिका निभाई थी.

ममता नोटबंदी के आधार पर जीएसटी का विरोध करने पर आमादा हैं और उन्‍होंने नोटों पर लगी बंदिश को वापस लेने की भी मांग की है.

आर्थिक उदारीकरण के बाद सबसे बड़ा कर सुधार

माना जा रहा है कि जीएसटी 1991 में लागू हुई आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार होगा. इसके तहत पूर्ववर्ती उत्‍पादन-आधारित अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली को त्‍याग कर एक ऐसी करप्रणाली अपनाई जाएगी जो उपभोग के चरण में ही लागू होगी. पिछले डेढ़ दशक से इसकी कोशिश चल रही है और माना जा रहा है कि केंद्र और राज्‍यों के कर लगाने के अधिकारों में यह बुनियादी रूप से बदलाव ला देगा, साथ ही कर और राजस्‍व का दायरा भी विस्‍तृत कर देगा.

सबसे पहले इस पर चर्चा साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान हुई थी लेकिन इसे लागू करने की मंशा सबसे पहले पूर्व वित्‍त मंत्री पी. चिदंबरम ने 2006 में अपने बजटीय भाषण में जताई थी.

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कांग्रेस पार्टी ने इस विधेयक का सैद्धांतिक समर्थन किया है लेकिन उसका जोर हमेशा इस कर की दर को 18 फीसदी पर तय करने का रहा है.

राज्‍यों को है चिंता

केंद्र का अनुमान है कि जीएसटी प्रणाली को अपनाने से राज्‍यों को पहले वर्ष में होने वाले नुकसान का मुआवजा 50,000 करोड़ के आसपास बैठेगा. इसकी भरपाई एक कोष से की जाएगी, जिसमें 26,000 करोड़ की राशि कोयले पर लगाए गए स्‍वच्‍छ पर्यावरण शुल्‍क से जुटाई जाएगी और बाकी 24,000 करोड़ स्‍वास्‍थ्‍य को नुकसान पहुंचाने वाले उत्‍पादों जैसे तम्‍बाकू, पान मसाला इत्‍यादि और कार आदि लग्‍जरी सामानों पर लगाए गए शुल्‍क से आएगा. राज्‍यों की एक चिंता इन सामानों पर लगाए जाने वाले शुल्‍क को लेकर भी है क्‍योंकि कुछ को लगता है कि इसके चलते उन्‍हें घाटा हो जाएगा. उन्‍हें आशंका है कि इस शुल्‍क से आने वाला राजस्‍व केंद्र की झोली में चला जाएगा.

शनिवार को हुई बैठक में हालांकि कुछ प्रगति इस मामले में देखी गई. केंद्रीय माल और सेवा कर (सीजीएसटी) तथा राज्‍य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) में शामिल नौ कानूनी प्रावधानों पर एक आम सहमति कायम हो सकी है.

विवादास्‍पद मसलों पर सहमति बनना बाकी

केंद्र और राज्‍यों के बीच हालांकि कुछ विवादास्‍पद मसलों पर अब भी सहमति बनना बाकी है, जैसे क्रॉस एम्‍पावरमेंट और दोहरे नियंत्रण का मुद्दा (क्रॉस एम्‍पावरमेंट के मॉडल के अंतर्गत यह तय किया जाना है कि 1.5 करोड़ के सालाना टर्नओवर से ज्‍यादा का करदाता सभी करों के मामले में किसी एक कर अधिकरण से ही निपटे). प्रस्‍तावित राष्‍ट्रव्‍यापी जीएसटी के तहत केंद्र और राज्‍यों के बीच प्रशासनिक, लेखा और मूल्‍यांकन संबंधी अधिकारों का बंटवारा एक अहम विवाद का विषय है.

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जीएसटी की बैठक के बाद वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'क्रॉस एम्‍पावरमेंट पर विवाद निर्णायक है और इसे हल होने में थोड़ा वक्‍त लगेगा. हम सहमति के कितना करीब हैं, इस पर मैं अभी उम्मीद लगाए हुए हूं और कुछ कहना नहीं चाहूंगा. हमारी कोशिश होगी कि 1 अप्रैल से जीएसटी को लागू कर दिया जाए लेकिन अगर ऐसा नहीं हो सका, तब अंतिम अवधि 16 सितंबर की होगी जो कि एक संवैधानिक बाध्‍यता है.'

'सरकार क्रॉस एम्‍पावरमेंट के मसले पर अड़ी'

जून में जेटली के साथ राज्‍यों के वित्‍त मंत्रियों की हुई बैठक में कांग्रेस पार्टी की 18 फीसदी वाली मांग से दूरी बनाते हुए केंद्र के पक्ष का समर्थन कर चुके केरल के वित्‍त मंत्री थॉमस इसाक ने कहा है कि सरकार अगर क्रॉस एम्‍पावरमेंट के मसले पर अड़ी हुई है, तो ऐसे में जीएसटी की राह मुश्किल होगी.

बैठक के बाद इसाक ने कहा, 'क्रॉस एम्‍पावरमेंट के मॉडल पर आम सहमति नहीं बनी है, इसलिए जीएसटी का कानून अधूरा है. मुआवजे का कोई कानून बनाए बगैर ही फॉर्मूला तय कर दिया गया. हम अगली बैठक में इस पर दोबारा चर्चा करेंगे.'

जीएसटी परिषद की अगली बैठक 11 और 12 दिसंबर को होनी तय है.

 

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