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सब्जियों की बढ़ती कीमतों की क्या है वजह, जीएसटी, मौसम या जमाखोरी

कुछ दिन पहले तक 20-25 रुपए किलो बिकने वाली सब्जियां अचानक से 100 रुपए के करीब पहुंच गई हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Nov 14, 2017 08:27 PM IST

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सब्जियों की बढ़ती कीमतों की क्या है वजह, जीएसटी, मौसम या जमाखोरी

देश में सात महीने के बाद एक बार फिर से खुदरा और थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. महंगाई दर में यह बढ़ोतरी खासतौर पर सब्जियों और खाना-पान के सामानों में जीएसटी और ईंधन के दाम बढ़ने से हुई है. सरकार के लाख दावे के बावजूद टमाटर सहित और सब्जियों के कीमतों में खासा बढ़ोतरी से लोग परेशान हैं. कुछ सब्जियां एक बार फिर से लोगों के बजट से बाहर हो गई हैं.

गौरतलब है कि देश में खुदरा महंगाई 3.58 प्रतिशत तक पहुंच गई है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर खुदरा महंगाई दर मापी जाती है. महंगाई की यह दर पिछले सितंबर में 3.2 प्रतिशत रही, जबकि इसी साल मार्च में यह दर 3.89 प्रतिशत के स्तर पहुंच गई थी.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी सीएसओ की ओर से सोमवार को खुदरा महंगाई के आंकड़ों को जारी किया गया है. इन आंकड़ों को देखने के बाद यह मालूम पड़ता है इस साल अक्टूबर में सब्जियों के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं. दूध और अंडे से भरपूर खाद्य पदार्थों के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई है.

देश में पिछले एक-दो सप्ताह से टमाटर सहित कुछ सब्जियों के दाम दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं. टमाटर के दाम में लगातार तेजी से रसोई का बजट बिगड़ने लगा है. देश के कई इलाकों में टमाटर 60 से 80 रुपए प्रति किलो बिक रहे हैं. दो सप्ताह पहले तक यही टमाटर 20-25 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहे थे.

टमाटर व्यापारियों का कहना है कि हिमाचल और महाराष्ट्र से आने वाला टमाटर मंडियों तक नहीं पहुंच रहा है. खासतौर पर शिमला में बर्फ पड़ने से टमाटर के दाम में खासा उछाल आया है. हम आपको बताना चाहते हैं कि देश में इस साल टमाटर और प्याज की अच्छी पैदावार हुई थी. कुछ महीने पहले तक जिस टमाटर और प्याज को किसान एक रुपए और दो रुपए प्रति किलो बेचने को मजबूर थे. उस टमाटर-प्याज की कीमत में अचानक इतनी उछाल कैसे हो गई?

गौरतलब है कि मौसम की वजह से टमाटर की कीमत हर साल जून से सितंबर के दौरान बढ़ जाती है. लेकिन, इस बार फसल की अच्छी पैदावार होने के कारण 15 दिन पहले तक टमाटर के दामों में तेजी नहीं आई थी. लेकिन, जैसे ही शिमला में बारिश हुई और जीएसटी की वजह से मंडी में टमाटर की आवक कम होने लगी और दाम बढ़ने लगे. दिल्ली की आजादपुर थोक मंडी में टमाटर की थोक कीमत 40 से 50 रुपए किलो पहुंच गई है. यह रिटेल मार्केट में 60 से 80 रुपए किलो तक बिक रहा है. देश के बाकी हिस्सों में भी टमाटर के दामों में बढ़ोतरी जारी है.

टमाटर व्यापारियों का मानना है कि शिमला में बर्फ गिरने से आने वाला टमाटर रास्ते में फंस गया या फिर सड़ गया. टमाटर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहा है. इस वजह से दाम बढ़ गए हैं. आजादपुर मंडी दुकान नं. डी-1401 के थोक विक्रेता वरुण चौधरी फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए इस समय टमाटर का सीजन नहीं है.

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शिमला में बर्फ पड़ी है, इसी वजह से टमाटर मंडी तक नहीं पहुंच पा रहा है. पिछले कई सालों का इतिहास आप देख लें इस महीने में हर साल टमाटर का रेट बढ़ जाते हैं. रही बात प्याज के दाम में बढ़ोतरी की तो इसलिए रेट बढ़ा है, क्योंकि पिछले साल नासिक में प्याज को दो से चार रुपए किलो तक भी कोई खरीददार नहीं मिल रहा था. नासिक साइड के किसानों ने इस साल प्याज की फसल कम लगाई, इसी वजह से प्याज के दाम भी बढ़ गए हैं.’

पिछले सप्ताह तक केवल धनिया, अदरक और लहसुन के दाम बढ़े थे. लेकिन, इस सप्ताह से अन्य सब्जियों के दामों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. कुछ लोगों का मानना है कि सब्जियों के खुदरा और थोक दाम में काफी अंतर है. किसानों से आधी कीमत पर सब्जी खरीद कर व्यापारी मनमानी कीमत पर बेच रहे हैं. सबसे ज्यादा मध्यम वर्गीय और गरीब लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं. थोक में मात्र 10 रुपए किलो बिकने वाला सेहजन 40 रुपए किलो बिक रहा है. भिंडी भी 50 रुपए प्रति किलो के रेट तक पहुंच गई है. और तो और धनिया और मिर्च ने भी लोगों को रुलाना शुरू कर दिया है.

गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर 6 में सब्जी बेचने वाले एक व्यापारी नंद कुमार ने फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा, ‘ पिछले कुछ दिनों से टमाटर और प्याज की बिक्री में कुछ कमी आ गई. अच्छी क्वालिटी के टमाटर खरीदने वाले अब एक-दुक्के लोग ही आते हैं. लंबा वाला हरा बैगन 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है. जो ग्राहक आते भी हैं वह एक पाव या आधा किलो से ज्यादा नहीं खरीदते हैं. कुछ हरी सब्जियों के भाव में भी तेजी आई है.’

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व्यापारियों का कहना है कि आलू की आवक अभी पर्याप्त है. इसके कारण इनकी कीमत में बढ़ोतरी की संभावना नहीं के बराबर है. टमाटर-प्याज के थोक और रिटेल दामों में अचानक आई तेजी से केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी परेशान हो गई हैं. खाद्य मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को मुनाफाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है. दूसरी तरफ प्याज की कम पैदावार से चिंतित केंद्र सरकार ने प्याज को आयात करने का फैसला किया है.

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