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स्मॉग में आनंद विहार से ग्राउंड रिपोर्ट: सरकारी कोशिश गंभीर कम खानापूर्ति ज्यादा लग रही है

लोगों को मानना है कि अधिकारी साइट्स पर विजिट नहीं कर रहे हैं. इसी का नतीजा है कि कौशांबी बस अड्डे और गाजियाबाद की कई साइट्स पर अभी भी निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं.

Updated On: Nov 01, 2018 09:23 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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स्मॉग में आनंद विहार से ग्राउंड रिपोर्ट: सरकारी कोशिश गंभीर कम खानापूर्ति ज्यादा लग रही है
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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की भयावह तस्वीर सामने आने के बाद केंद्र और राज्य सरकारें अब जाग गई हैं. केंद्र और दिल्ली सरकार ने प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए 70 से ज्यादा टीमें बनाई हैं. केंद्र और राज्य सरकारों की सारी मशीनरी अब एक्शन में दिखने लगी हैं. प्रदूषण पर काम करने वाली स्टेट और सेंटर की कई एजेंसियां अब ग्राउंड पर भी नजर आने लगी हैं.

बृहस्पतिवार को पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) की कई टीमों ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जाकर स्थिति का जायजा लिया. ईपीसीए की एक टीम सबसे पहले दिल्ली-एनसीआर की सबसे प्रदूषित जगहों में से एक आनंद विहार पहुंची. टीम ने यहां प्रदूषण की स्थिति का जायजा लिया. ईपीसीए चेयरमैन भूरे लाल यादव ने खुद आनंद विहार बस अड्डे और आनंद विहार से सटे गाजियाबाद के कौशांबी बस अड्डे जाकर मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई फिर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.

बृहस्पतिवार सुबह-सुबह ईपीसीए चेयरमैन भूरे लाल यादव अपनी टीम के साथ आनंद विहार और गाजियाबाद के कौशांबी बस अड्डे पहुंचे. भूरे लाल यादव आनंद विहार आने से पहले वहां की स्थिति के बारे में पहले से ही रिसर्च कर रखी थी. आनंद विहार में देर रात तक ट्रैफिक का भारी दबाव और यूपी रोडवेज बसों की मनमानी का पूरा सुबूत भूरे लाल अपने साथ लाए.

भूरे लाल ने गाजियाबाद के डीएम और वहां मौजूद अन्य अधिकारियों से प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए किए गए उपायों को बताने को कहा. अधिकारियों के जवाब से नाखुश भूरे लाल ने वहां मौजूद सभी अधिकारियों की जमकर क्लास ली. भूरे लाल ने अपने मोबाइल में वीडियो दिखाते हुए गाजियाबाद के कई अधिकारियों को फटकार लगाई.

( तस्वीर: रविशंकर सिंह )

( तस्वीर: रविशंकर सिंह )

भूरे लाल ने गाजियाबाद के अधिकारियों से कहा क्यों इस जगह पर रात को बसें घंटों खड़ी रहती हैं? क्यों ऑटो और दूसरी गाड़ियों को भी यहां से नहीं हटाया जा रहा है? बाहरी बसें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की गाड़ियां क्यों घंटों रोड पर खड़ी रहती हैं? भूरे लाल यादव ने वहां मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी हालत में रोड पर गाड़ी नहीं होनी चाहिए. यूपी रोडवेज की बस हो या फिर कोई प्राइवेट बसें इस रोड पर ज्यादा देर तक नहीं रुक सकती हैं.

गाजियाबाद के कौशांबी बस अड्डे का जायजा लेने के बाद भूरे लाल यादव ने आनंद विहार बस अड्डे की तरफ रुख किया. भूरे लाल ने आनंद विहार बस अड्डे में मौजूद अधिकारियों को भी प्रदूषण फैलाती कई रोडवेज बसों का वीडियो दिखाया. भूरे लाल ने हरियाणा, राजस्थान और यूपी से आने वाली गाड़ियों पर, जो प्रदूषण फैलाती हैं, सख्ती से लगाम लगाने को कहा.

बता दें कि ईपीसीए चेयरमैन भूरे लाल के साथ प्रदूषण की ग्राउंड रिपोर्ट में कई बात निकल कर सामने आईं. भूरे लाल का गुस्सा देख कर समझ आ रहा था कि लोग प्रदूषण से निपटने के लिए बेपरवाह नजर आ ही रहे हैं और अधिकारी भी सिर्फ खानापूर्ति के लिए ही कदम उठा रहे हैं. अधिकारियों की सख्ती का असर रोड पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा था.

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी ने वहां मौजूद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक एएसआई से बात की तो उनका कहना था, ‘हमलोगों को बीती रात ही पुरानी गाड़ियों पर सख्ती से निपटने के आदेश मिले हैं, लेकिन हमारे पास अभी भी लिखित कोई आदेश नहीं है. हमारे अधिकारी कह रहे हैं कि जब तक परिवहन विभाग से कोई गाइड-लाइन नहीं आए तब तक वैसे ही काम करो. परिवहन विभाग से जब निर्देश आएगा तो आपलोगों को मिल जाएगा. इसके बावजूद हमलोग अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं.’

ईपीसीए चेयरमैन की टीम में साथ चल रहे एक अधिकारी फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘हमारी कई टीमें इस वक्त दिन-रात दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रही हैं. हमलोग देख रहे हैं कि लोग अंधाधुंध कचरा जला रहे हैं. इन कचरों से टॉक्सिक धुंआ निकल रहा है. दिल्ली के कई औद्योगिक इलाकों में अभी भी इन कचरों को जलाया जा रहा है. लोगों को चाहिए कि कूड़ा सड़क पर न फेंके और न जलाएं.’

बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में वायु की गुणवत्ता खराब होने के बाद 1 नवंबर से 10 नंवबर तक ग्रेडड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) लागू कर दिया गया है. ईपीसीए चेयरमैन इसी का जायजा लेने बृहस्पतिवार को दिल्ली की सड़कों पर निकले थे. हालांकि, यह प्लान दिल्ली में फिलहाल अंशकालिक है. इस प्लान के तहत दिल्ली-एनसीआर में सभी प्रकार के निर्माण कार्यों को पूरी तरह रोक लगा दी गई है. स्टोन क्रशिंग प्लांट, कोयला और बायोमास ईंधन इस्तेमाल करने वाले उद्योग-धंधों को भी 10 नवंबर तक पूरी तरह बंद कर दिया गया है.

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ईपीसीए के अध्यक्ष भूरे लाल यादव के आनंद विहार से जाने के बाद चालू कंस्ट्रक्शन का काम ( तस्वीर: रविशंकर सिंह )

लेकिन, इसके बावजूद कुछ जगहों पर कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ का काम अभी भी धड़ल्ले से चल रहे हैं. ईपीसीए चेयरमैन भूरे लाल यादव ने बृहस्पतिवार के जिस कौशांबी बस अड्डे का मुआयना किया था वहां पर उनके जाते ही एक बार फिर से निर्माण कार्य दोबारा से शुरू हो गए. बृहस्पतिवार को ही फ़र्स्टपोस्ट की टीम ने जब कौशांबी बस अड्डे में दोपहर 2 बजे जाकर देखा तो वहां पर दो मजदूर तोड़-फोड़ का कम कर रहे थे.

गौरतलब है कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने दो दिन पहले ही ग्रेडड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान जिले में लागू किया था. इसके तहत जिले में प्राइवेट निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए गए थे. लेकिन, जीडीए की तरफ से सिर्फ नोटिस ही जारी कर खानापूर्ति कर दी गई. लोगों को मानना है कि अधिकारी साइट्स पर विजिट नहीं कर रहे हैं. इसी का नतीजा है कि कौशांबी बस अड्डे और गाजियाबाद की कई साइट्स पर अभी भी निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं.

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