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ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में फेल शराबबंदी! पहले लेने जाना पड़ता था, अब होती है होम डिलिवरी

राज्य के आलाधिकारियों के द्वारा शराबबंदी कानून की सफलता को लेकर खूब सारे आंकड़े पेश किए जा रहे हैं. लेकिन, धरातल पर हकीकत कुछ और ही है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 25, 2018 08:44 AM IST

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ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में फेल शराबबंदी! पहले लेने जाना पड़ता था, अब होती है होम डिलिवरी

बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू हुए दो साल से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है. बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून की सफलता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं. राज्य के आलाधिकारियों के द्वारा शराबबंदी कानून की सफलता को लेकर खूब सारे आंकड़े पेश किए जा रहे हैं. लेकिन, धरातल पर हकीकत कुछ और ही है.

बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बाद तस्करों ने शराब तस्करी की नई-नई तरकीब इजाद कर ली है. स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों को शराब तस्करी का नया अड्डा बना दिया गया है.

ट्रकों में नीचे शराब और ऊपर आलू-प्याज रखा मिल रहा है. बाइक और टायरों के ट्यूब में शराब भरा मिल रही है. गाड़ियों के पार्ट्स और बॉडी से लेकर गैस सिलेंडर और तेल टंकियों में शराब मिल रही है. तेल के कंटेनरों में से शराब के पैकेट बरामद किए जा रहे हैं. एम्बुलेंस और डाक गाड़ियों को भी शराब तस्करों ने नहीं छोड़ा है. बिहार में शराब की तस्करी बड़े पैमाने पर की जा रही है.

कहां से लाई जाती है इतनी बड़ी मात्रा में शराब?

पुलिस की मुस्तैदी के बावजूद बिहार में धड़ल्ले से शराब का कारोबार चल रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार में इतने बड़े पैमाने पर शराब कहां से लाया जाता है और उसके संरक्षण में किन-किन लोगों को हाथ रहता है? इतना कुछ होने के बावजूद बिहार पुलिस पर शराब तस्कर से सांठ-गांठ के क्यों आरोप लग रहे हैं? साथ ही विपक्ष क्यों बिहार पुलिस पर तस्कर को पकड़ने के बजाए बड़े पैमाने पर संरक्षण देने का आरोप लगा रही है? बेशक बिहार सरकार के आंकड़ों की बाजीगरी में पूर्ण शराबबंदी को कामयाबी के तौर पर प्रचार और प्रसार किया जा रहा है. लेकिन, हकीकत में बिहार में शराब पीने वालों के लिए होम डिलिवरी का विकल्प मौजूद है.

पिछले दिनों बिहार सरकार का एक आंकड़ा सामने आया था, जिसमें कहा गया था शराबबंदी के बाद से 6 लाख से भी अधिक छापेमारी की जा चुकी है. एक लाख से भी अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज किए जा चुके हैं. लगभग डेढ़ लाख लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पूरे राज्य में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से अब तक 25 लाख लीटर देशी और विदेशी शराब की रिकॉर्ड बरामदी हुई है.

ये आंकड़े बताते हैं कि बिहार पुलिस काफी सतर्क और अपने कर्तव्य के प्रति जवाबदेह है. शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू कराने में सीएम नीतीश कुमार भी काफी सख्त रहते हैं. नीतीश कुमार शराबबंदी को लेकर पिछले कई मौकों पर अधिकारियों को लताड़ लगा चुके हैं. राज्य के डीजीपी से लेकर कई जिलों के एसपी और डीएम की क्लास लगा चुके हैं. इसके बावजूद बिहार में शराब बंदी के बाद जो हालात पैदा हुए हैं, उससे गांव-कस्बे और शहर में रहने वाले लोगों का रहना मुश्किल हो गया है. पूरे बिहार में होम डिलिवरी के द्वारा शराब की खपत अभी भी जारी है.

सत्ता और पुलिस की सांठगांठ

विपक्षी पार्टियों के नेताओं और स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि बिहार पुलिस और सत्ता पक्ष की सांठगांठ से बिहार में शराबबंदी कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

राज्य में पिछले दिनों कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद से विपक्षी पार्टियों के दावों में काफी दम नजर आने लगा है. मुजफ्फरपुर के एसएसपी विवेक कुमार की गिरफ्तारी हो या कुछ महीने पहले मुजफ्फरपुर के ही स्थानीय पत्रकार की गाड़ी से करोड़ों रुपए की शराब की बोतलों की बरामदगी और हाल ही में बीजेपी सांसद हरि मांझी के बेटे और उसके दोस्तों को शराब के नशे में पार्टी करते पकड़ा जाना इसका जीता-जागता उदाहरण है.

हरि मांझी, फोटो न्यूज18 से

हरि मांझी, फोटो न्यूज18 से

लोगों का मानना है कि राज्य सरकार चाहे जितना भी दावा कर ले, लेकिन बिहार के गांव-देहात में कुछ और ही नजारा देखने को मिल रहा है. बिहार के गली-मोहल्ले और चौक-चौराहों पर यह चर्चा सुनने को मिलती है कि किस तरह से बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. इस काम में स्थानीय पुलिस-प्रशासन और राजनीतिक सांठ-गांठ का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है.

हाल के कुछ दिनों में बिहार पुलिस के नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों पर शराब माफिया के साथ सांठ-गांठ के गंभीर आरोप लग रहे हैं. स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि पुलिस महकमे की गाढ़ी कमाई का अब यह मुख्य जरिया बन गया है. पकड़े जाने पर पुलिस के द्वारा बोली लगाई जाती है. बात अगर बन गई तो छोड़ दिया जाता है और बात नहीं बनी तो अखबार की सुर्खियां बन जाती है.

क्रियान्वयन में रह गईं हैं खामियां

बिहार को करीब से जानने वाले लोग कहते हैं बेशक नीतीश कुमार का यह प्रयास ऐतिहासिक था, लेकिन इसके इंप्लीमेंटेशन में बहुत खामियां नजर आ रही हैं. नीतीश कुमार चाह कर भी इसको अब दूर नहीं कर पाएंगे.

बिहार के हर जिले की लगभग यही कहानी है. फर्स्टपोस्ट हिंदी ने बिहार के बेगुसराय जिले के कई गांवों के लोगों से बात की. इन लोगों का कहना है कि नीतीश कुमार की नियत में कोई खोट नहीं है. नीतीश कुमार ने अच्छा कदम उठाया है. शराब पीने वालों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आ गई है.

बेगुसराय जिले के मेधौल गांव के रहने वाले मुकेश कुमार जो पेशे से एक शिक्षक हैं, फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए पुलिस निर्दोष लोगों को बेवजह परेशान करती है. जगह-जगह बैरिकेडिंग कर नर्दोष लोगों को घंटों रोक कर सवाल-जवाब करती है. ब्रेथ ऐनलाइजर और मेडिकल टेस्ट के बहाने राहगीरों से अवैध वसूली की जा रही है. इसमें कई ऐसे लोग होते हैं जो वाकई में शराब पी रखे होते हैं. अधिकांश लोग पकड़े जाने के बावजूद पैसे और पावर के सहारे छूट जाते हैं. लेकिन, जिससे पुलिस की बात नहीं बनती है वह जेल भेज दिया जाता है. पुलिस अगर चाह लेगी तो बिहार में शराब का अवैध कारोबार बिल्कुल नहीं चलने दिया जाएगा. हमलोग खुद पुलिस को जानकारी देने से बचते हैं, क्योंकि पुलिस उल्टे सूचना देने वालों पर भी कार्रवाई शुरू कर देती है. पुलिस को अच्छी तरह से और पूरी तरह से जानकारी रहती है कि किस गांव में और किसके यहां शराब बेची और खरीदी जा रही है.’

मेघौल गांव के ही कपिलदेव सिंह फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘शराब पीने वाला आदमी तरह-तरह की तरकीब के जरिए शराब की बोतलें और पाउच हासिल कर लेता है. गांव-देहात में धड़ल्ले से शराब की स्मगलिंग की जा रही है. खासकर युवा पीढ़ी का इस धंधे के प्रति काफी ज्यादा झुकाव देखा जा रहा है. नेपाल-भूटान से चोरी-छिपे शराब की तस्करी कराई जा रही है. समाज ने इसका बहिष्कार जरूर किया है, लेकिन जो पीने वाला है वह इसका बहिष्कार नहीं कर रहा है. पहले की तुलना में काफी लोगों ने पीना बंद कर दिया है. लेकिन, अभी भी काफी लोग हैं जो इधर-उधर से मंगा कर शराब पी रहे हैं.’

बिहार पुलिस की गाड़ियों से ही मिलती है शराब

बिहार में अवैध शराब के विरुद्ध दिन हो या रात हर समय अभियान चलाए जा रहे हैं. बिहार पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि देर रात तक शराब के नाम अवैध उगाही की जाती है. बिहार में पूर्ण शराब बंदी कानून लागू होने के बाद से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेता शराब पीने के आरोपों में गिरफ्तार हो चुके हैं. शराब पीने के जुर्म में कई नेता और नेता पुत्र अब भी जेल की हवा खा रहे हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

कानून का सख्ती से पालन हो इसकी जिम्मेदारी पुलिस पर ही होती है. पर, बिहार पुलिस की गाड़ियों से खुद शराब की बोतलें मिलना बिहार पुलिस के रवैये पर सवाल खड़ा करता है. पिछले दिनों बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस की एक जीप ने एक महिला को कुचल दिया था. महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी. घटनास्थल पर पुलिस की जीप से शराब को बोतलें और चिकन मिला था. बिहार पुलिस की जीप से शराब की बोतलें और चिकन मिलने का यह फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. विपक्षी पार्टियों ने इस फोटो के वायरल होने के बाद बिहार में शराब बंदी को लेकर नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला था.

इस घटना के सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा था. तेजस्वी ने अपने ट्वीट में तब कहा था, ‘नीतीश कुमार के सीधे नियंत्रण में पुलिस है. जिस पुलिस से शराबबंदी करवा रहे हैं, वह खुद हमेशा शराब और कबाब साथ रखती है. नीतीश कुमार बताएं कि उनकी मार्गदर्शक पार्टी बीजेपी शाषित राज्य यूपी और झारखंड से बिहार में शराब की तस्करी क्यों हो रही है?’

जेडीयू नेता के वरिष्ठ नेता श्याम रजक फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए नीतीश कुमार की सरकार ना किसी को फंसाती है और न किसी को बचाती है. ऐसे कई कदम हैं जो इस सरकार ने उठाए हैं. एमएलए, एमपी, मंत्री या एसपी कोई भी हो कानून अपने हिसाब से काम करता है. शराबबंदी कानून का बिहार में पूरी तरह से पालन किया जा रहा है. पुलिस को अगर कोई जानकारी मिलती है तो पुलिस उसपर तत्परता से कार्रवाई कर रही है. जहां तक यूथ की स्मगलिंग में संलिप्तता का सवाल है इस बात से हम इत्तेफाक नहीं रखते हैं. बिहार का यूथ गरीब हो सकता है, लेकिन वह लालची नहीं हो सकता है. कुछ लोग हैं जो इस तरह के काम करते हैं पुलिस उन पर कार्रवाई कर रही है.’

श्याम रजक आगे कहते हैं, ‘होम डिलीवरी की जहां तक बात है उस पर विपक्ष से मेरा आग्रह होगा कि वह भी सदन में शपथ लिए थे कि हम न शराब पिएंगे और न पीने देंगे और न ही इसका प्रचार करेंगे. ये लोग अपनी शपथ और अपनी बात का ही खंडन कर रहे हैं. अगर इन लोगों के पास कोई जानकारी है तो प्रशासन को खबर करनी चाहिए. कानून का पालन हमलोगों की सजगता से भी किया जा सकता है. शराबबंदी कानून लागू होने के बाद प्रदेश में कानून व्यवस्था काफी दुरुस्त हुई है. गरीबों के घर में खुशहाली और आपराधिक वारदातों में काफी कमी आई है. विपक्ष को यह सब भी तो प्रचार करना चाहिए.’

कुलमिलाकर सत्ता पक्ष की लाख दलील हो इसके बावजूद बिहार में शराब का घंधा अब स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों से संचालित होना शुरू हो गया है. पिछले दिनों ही पूर्वी चंपारण के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से शराब का अवैध धंधा चलाए जाने का खुलासा हुआ था. कुछ दिन पहले ही एक स्कूल से शराब का अवैध धंधा चलाए जाने का मामला सामने आया था. खासकर बिहार के कुछ युवाओं ने इस अवैध कारोबार को कमाई का अपना मुख्य धंधा बना लिया है. बिहार पुलिस के सहयोग से यह धंघा बिहार के हर गांव और हर शहर में खूब फल-फूल रहा है.

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