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ग्रेटर नोएडा: जिंदगी भर की कमाई झोंक कर नए घर में शिफ्ट हुआ था परिवार, पल भर में हुआ खत्म

राम त्रिवेदी ने कहा कि मैने और मेरे भाई शिवम ने जिंदगी भर की सेविंग से करीब 22 लाख रुपए में यह घर खरीदा था, जिसके मलबे में आज मेरा पूरा परिवार दबा हुआ है

FP Staff Updated On: Jul 19, 2018 09:41 AM IST

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ग्रेटर नोएडा: जिंदगी भर की कमाई झोंक कर नए घर में शिफ्ट हुआ था परिवार, पल भर में हुआ खत्म

राम त्रिवेदी को मंगलवार रात पता चला कि उनका घर गिर गया है. वह हड़बड़ी में ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी गांव पहुंचे. इस घर में वह चार दिन पहले ही अपने परिवार के साथ शिफ्ट हुए थे. राम त्रिवेदी तो इस हादसे से बच गए क्योंकि वो शहर से बाहर थे लेकिन जब वहां पहुंचे तो उनकी पत्नी, बेटी, मां और भाई मलबे में दब चुके थे.

त्रिवेदी का पांच लोगों का परिवार है जिसने जिंदगीभर की सेविंग इस घर को खरीदने में लगा दी. उन्होंने बताया, 'मैंने और मेरे भाई शिवम ने मिलकर करीब 22 लाख रुपए में यह घर खरीदा था. उस समय, ब्रोकर कासिम ने हमें आश्वासन दिया था कि बिल्डिंग बहुत अच्छी है, किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी. अगर मुझे पता होता कि इससे मेरा पूरा परिवार खत्म हो जाएगा तो मैं इस बिल्डिंग के पास भी नहीं भटकता. शनिवार 14 जुलाई को ही हमने यहां गृह प्रवेश किया था और हम काफी खुश थे कि अब हमारा अपना घर है.' हालंकि अभी उनके रिश्तेदारों के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन वो बुरी तरह डरे हुए हैं. इस घटना की वजह से शाहबेरी गांव में बन रही नई इमारतों की सुरक्षा पर उठ रहे सवालों ने स्थानीय निवासियों के बीच डर पैदा कर दिया है.

अब तक 9 लोगों के शव हुए बरामद

मंगलवार रात नोएडा में गिरी छ: मंजिला बिल्डिंग के मलबे में से बुधवार रात 10 बजे तक 9 शवों को बाहर निकाला गया है. यहां अभी भी करीब 12 लोगों के दबे होने की आशंका है. इस बिल्डिंग के पास ही एक और बिल्डिंग भी बन रही थी, वो भी गिर गई और करीब 12 मजदूर उसमें फंस गए. घटनास्थल पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की चार कंपनियां तैनात की गई हैं.

राम त्रिवेदी ने कहा, 'मेरी पत्नी प्रियंका, मां राजकुमारी और एक साल बेटी पंखुड़ी और भाई शिवम वहां फंसे हुए हैं. एनडीआरएफ के कर्मचारी बार-बार कह रहे हैं कि उन्हें बचा लेंगे, लेकिन बढ़ते समय के साथ मेरी उम्मीदें टूट रही हैं. मैं यहां से तब तक नहीं जाऊंगा जब तक परिवार के बारे में पता नहीं चलता.'

10 से ज्यादा परिवारों के फंसे होने की आशंका

एक एनडीआरएफ अधिकारी ने कहा, 'पुलिस का प्रारंभिक अनुमान था कि अंदर केवल चार परिवार हैं. लेकिन बाद में पता चला कि अंदर 10 परिवार फंसे हुए हैं. कुछ स्थानीय लोग कह रहे हैं कि करीब 15-16 परिवार हैं. इसलिए करीब 25-26 लोग अंदर फंसे हो सकते हैं.'

घटनास्थल के पास रहने वाले अनिल कुमार ने बताया, 'करीब 9:15 बजे मैने बहुत तेज आवाज सुनी, मुझे लगा कि ब्लास्ट हो गया इसलिए मैं दुकान से बाहर आया. करीब पांच मिनट तक तो धूल और मिट्टी की वजह से मैं कुछ देख नहीं सका. फिर हमें पता चला कि क्या हुआ है और तब तक मौके पर पुलिस पहुंच चुकी थी.'

खराब मटीरियल के इस्तेमाल के चलते हुए हादसा

कई लोगों ने दावा किया है कि नोएडा-गाजियाबाद जिला सीमा के पास स्थित इस गांव में तेजी से हो रहे कंस्ट्रक्शन ने लोगों की जिंदगी खतरे में डाल दी है. मुर्तजा अहमद ने बताया, 'करीब दो साल पहले यहां कुछ भी नहीं था. फिर कंस्ट्रक्शन का दौर शुरू हुआ और सभी छायादार बिल्डरों, ठेकेदारों को अच्छा मौका मिल गया. यह बिल्डिंग (जो गिर गई) केवल एक साल पहले ही बनी थी. हमें इस बात का डर है कि जल्द ही मीडिया और एनडीआरएफ की टीम ऐसी ही किसी दूसरी घटना के लिए यहां वापस लौटेगी.'

इस गांव में ऐसी कई इमारतें हैं जहां कार्य प्रगति पर है. ऐसा ही कंस्ट्रक्शन करने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर ने पहचान जाहिर न करने कि शर्त पर बताया कि वे नियमित रूप से कोनों में कटौती करते हैं, सरिया भी सस्ता वाला ही इस्तेमाल करते हैं और सीमेंट भी खराब क्वालिटी की ही होती है. जबकि इमारतें बहुत भारी हैं इसलिए इनकी नींव मजबूत होनी चाहिए. हम जानते हैं कि इससे लोगों की जान को खतरा है, लेकिन हमारे जैसे दिहाड़ी मजदूर को भी तो अपना पेट पालना है, इसलिए हम कुछ कह नहीं सकते.'

इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस घटना के लिए बिल्डर और उसके दो सहयोगियों की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम बचाव कार्य कर रहे हैं. कुछ लोग मलबे में दबे हुए हैं. जो लोग इस घटना में मारे गए उनके साथ हमारी संवेदनाएं हैं.

नोएडा के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक पंकज सिंह ने कहा, 'यह (घटना) दुर्भाग्यपूर्ण है. अवैध निर्माण रोक दिया जाना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. मामले में अधिकारियों की अनदेखी के लिए भी सख्त कार्रवाई भी की जानी चाहिए.'

(न्यूज 18 के लिए उदय सिंह राणा की रिपोर्ट)

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