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अयोध्या के दीपोत्सव में दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला क्यों बनीं खास मेहमान, जानिए वजह

अयोध्या में होने वाले दीवाली के कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेडी को ही मुख्य अतिथि क्यों बनाया गया है

Updated On: Nov 06, 2018 03:51 PM IST

FP Staff

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अयोध्या के दीपोत्सव में दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला क्यों बनीं खास मेहमान, जानिए वजह
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अयोध्या में होने वाले दूसरे भव्य दीपोत्सव के लिए सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. खास बात ये है कि दिवाली समारोह में दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम जुंग-सूक हिस्सा लेंगी. उनके स्वागत के लिए शहर को खूब सजाया गया है. सड़कें और धरोहर इमारतें रोशनी से नहाई हुई हैं. सरयू नदी के घाट पर भगवान राम और भगवान हनुमान की मूर्ति लगाई गई हैं, जबकि मुख्य कार्यक्रम के आयोजन स्थल के पास भव्य तोरण द्वार बनाया गया है.

मगर इन सब के बीच एक अहम सवाल ये उठता है कि इस आयोजन में दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेडी को ही मुख्य अतिथि क्यों बनाया गया है. आइए जानते हैं क्या है इसकी वजह-

दरअसल कोरियाई सरकार अयोध्या से ताल्‍लुक रखने वाली दक्षिण कोरिया की रानी सूरीरत्न (हिव ह्वांग ओक) की याद में अयोध्या में एक स्मारक बनाना चाहती है. इस सिलसिले में दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति की पत्‍नी सूक रानी सूरीरत्न (हिव ह्वांग ओक) स्मारक के भूमि पूजन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी.

कहा जाता है कि 48वीं सदी में सूरीरत्न विवाह कोरिया के गया राज्य के राजा किम सूरो से हुआ था.

एक सपने से शुरू हुआ था सूरीरत्ना का हियो ह्वांग बनने का सफर

किॆंवदंतियों के मुताबिक 16 साल की उम्र में सूरीरत्ना को सपना आया था कि समुद्र पार करने के बाद उन्हें पति की प्राप्ति होगी. उन्होंने यह सपना अपने माता-पिता को बताया और फिर निकल गईं अपने पति की खोज में. नांव से समुद्र पार करने के बाद सूरीरत्ना कोरिया पहुंची. यहां उनकी मुलाकात राजा सूरो से हुई. उन्होंने अपने सपने के बारे में राजा को बताया और फिर उन दोनों की शादी हो गई.

शादी के बाद सूरीरत्ना का नाम बदल कर हियो ह्वांग रख दिया गया. कहा जाता है कि सूरीरत्ना अपने साथ एक पत्थर भी लेकर गईं थीं. जो कि उनके मरने के बाद उनकी कब्र पर रखा गया. सुनने में यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक लग सकती है. लेकिन कई पुरातत्व अधिकारियों ने कुछ ऐसे सबूत दिए हैं जो अयोध्या और कोरिया की सभ्यताओं के मेल को दर्शाते हैं.

भारत में बनाया जाएगा सूरीरत्ना का मंदिर

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक पुरातत्विदों ने कुछ ऐसे पत्थर खोजे हैं, जिन पर दो मछलियां बनी हुई हैं. उनका कहना है कि यह पत्थर ही साबित करते हैं कि कोरिया और अयोध्या के बीच सांस्कृतिक धरोहरों का संबंध था. वहीं कोरिया के गिमहे शहर की राजशाही कब्रों के डीएनए सैंपलों से भी भारतीय और कोरियाई सभ्यताओं के संबंध को प्रमाणित किया जाता रहा है.

साल 2016 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने एक प्रस्ताव पास किया गया था. जिसके मुताबिक अयोध्या में राजकुमारी सूरीरत्ना का भव्य मंदिर बनाया जाना था. प्रधानमंत्री मोदी और कोरियाई प्रधानमंत्री के बीच इस मंदिर पर भी बातचीत हुई है.

सांगुक युसा में मिलता है अयुता और हियो ह्वांग का जिक्र

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 13वीं सदी के कोरियाई दस्तावेजों में राजकुमारी सूरीरत्ना का जिक्र मिलता है. सांगुक यूसा नाम के इन दस्तावेजों में राजकुमारी सूरीरत्ना को गया राज्य के राजा सूरो की पत्नी बताया गया है. सांगुक युसा को बौद्ध भिक्षुओं के एक समूह ने एकत्रित किया था जो कि कोरिया के तीन साम्राज्यों से जुड़े तथ्यों पर आधारित है. इनमें बेजेके, सिला और गोगुरेयो साम्राज्य शामिल थे. आज के कोरिया का नाम इसी गोगुरेयो साम्राज्य से बना है.

इन दस्तावेजों के मुताबिक हियो अयुता साम्राज्य की राजकुमारी थी. जो की 16 साल की उम्र में कोरिया आई थी. उनकी शादी सूरो से हुई थी और उन्हें गया की पहली महारानी का सम्मान भी मिला था. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर माना जाता है कि राजकुमारी हियो की कब्र गिमहे शहर में है. किंवदंतियों के मुताबिक गिमहे मे हियो की कब्र पर जो पत्थर लगा है उसे राजकुमारी अयोध्या से लेकर गईं थीं.

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