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सब्जी बेचने वाला छात्र बना 12वीं बोर्ड का टॉपर

छत्तीसगढ़ सरकार ने आईआईटी में जाने का सपना पूरा करने के लिए मदद का हाथ बढ़ाया

Subhesh Sharma Updated On: Jun 19, 2017 08:44 AM IST

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सब्जी बेचने वाला छात्र बना 12वीं बोर्ड का टॉपर

याद कीजिए अपनी टीनेज उम्र के बारे में. जब आप इंटर या हाईस्कूल में होते थे. कैसे पढ़ाई या दूसरे खर्चों से जुड़ी हर जरूरत के लिए किस तरह मम्मी-पापा से मदद मांगा करते थे. पापा, फलां गाइड खरीद लूंगा तो ज्यादा नंबर आएंगे. पापा, फलां कोचिंग में क्रैश कर लूंगा तो मैथ्स की पूरी तैयारी हो जाएगी. मम्मी, पायलट पेन से लिखने पर एक्जाम में ज्यादा अच्छी रायटिंग बनेगी.

हम ऐसी मांगें कितनी आसानी से रख दिया करते थे कि शायद आज याद भी नहीं होगा कि इनकी जिंदगी में कितनी अहमियत होती है. इन सब के बावजूद भी हममें से कितने ऐसे लोग हैं जो स्टेट टॉपर बनने का तमगा हासिल कर पाए? हमारी जिंदगी से अलग कई बच्चे अपनी किशोरावस्था में न सिर्फ कामयाबी की मिसाल बनाते हैं. बल्कि वो अपनी जिंदगी में सामान्य चीजों को हासिल करने के लिए आम लोगों से ज्यादा मेहनत करते हैं. ऐसे ही एक किशोर हैं छत्तीसगढ़ के धावेंद्र कुमार.

सब्जी बेचने से टॉपर बनने तक का सफर

धावेंद्र कुमार की कहानी वाकई उन लोगों के लिए मिसाल है, जो जिंदगी में मुश्किलों के आगे हार मान लेते हैं. छत्तीसगढ़ के रहने वाले इस 17 साल के छात्र ने जीवन में हर एक परेशानी का डट कर सामना किया है और मां-बाप का नाम रोशन किया है. अपनी मां के साथ मिलकर धावेंद्र एक लोकल सब्जीमंडी में सब्जी बेचा करते हैं. छात्र के पिता एक मामूली किसान हैं. किसी को ये उम्मीद शायद ही रही कि एक दिन ये छात्र राज्य का टॉपर बन कर उभरेगा. छत्तीसगढ़ 12वीं बोर्ड परीक्षा में धावेंद्र ने टॉप किया है. अप्रैल में घोषित हुए बोर्ड एग्जाम के नतीजों में धावेंद्र ने 98.6 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए हैं. लेकिन इस सबके बावजूद उसके जीवन में परेशानियां खत्म नहीं हुई.

मां का भी दिल टूटा

बेटे के टॉप करने के बावजूद माता-पिता के पास अपने टैलेंटेड बच्चे को आगे पढ़ाने के पैसे नहीं है. धावेंद्र आईआईटी में एडमिशन पाना चाहता है, लेकिन उसके माता-पिता के पास राजस्थान के कोटा में अपने बच्चे की कोचिंग फीस देने के पैसे नहीं है. कोचिंग फीस करीब 1.3 लाख रुपए है, जोकि इस गरीब परिवार के लिए दे पाना मुमकिन नहीं है.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक बालोद प्रशासन ने धावेंद्र को आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद देने का वादा किया था. लेकिन अभी तक उसे किसी भी तरह कोई मदद नहीं दी गई है. धावेंद्र बताते हैं कि मैं कोटा गया था लेकिन वापस आ गया. मुझे लगता है सरकार को टॉपर्स की कोई इज्जत नहीं है.

बेटे को सरकार की ओर से कोई मदद ने मिलने के चलते धावेंद्र की मां भी काफी दुखी है. वो बताती हैं कि मेरे बेटे ने 10वीं में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और 12वीं में उसने टॉप किया है. लेकिन कोई भी हमारी मदद नहीं कर रहा. हमारे पास सिर्फ दो एकड़ जमीन है. हम उस जगह की फीस नहीं भर सकते, जहां वो पढ़ना चाहता है.

छोड़ दी थी उम्मीद

कहते हैं ऊपर वाले के घर देर अंधेर नहीं. इस छात्र के संघर्ष और टॉप करने के बावजूद सरकार द्वारा मदद न मिलने की खबर मीडिया में सामने आने के बाद धावेंद्र किस्मत ने पलटी खाई और राज्य सरकार ने अलावा उसकी मदद के लिए बहुत से लोगों ने हाथ आगे बढ़ाया.

छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह ने भी इस मामले पर ध्यान दिया. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, राज्य सरकार में डायरेक्टर ऑफ पब्लिक रिलेशंस ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कलेक्टर से डिट्रिक्ट एजुकेशनल ऑफिसर के साथ धावेंद्र का जॉइंट अकाउंट खुलवाने को कहा. साथ ही सीएम ने जल्द से जल्द छात्र के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर कराने को भी कहा.

केमिस्ट्री और मैथ्स में आए 99 अंक

धावेंद्र ने कहा कि मुझे बहुत से फोन आ रहे हैं और हर कोई मेरी मदद करना चाहता है. बहुत से लोगों ने मुझे अकाउंट डिटेल्स भेजने को भी कहा है. धावेंद्र की इंस्पायरिंग स्टोरी ढेरों लोग प्रभावित हुए हैं और सोशल मीडिया पर इस छात्र की कहानी वायरल हो गई है. इस साल करीब चार लाख छात्रों ने 12वीं का एग्जाम दिया था. जिसमें धावेंद्र ने 500 में से 493 अंक हासिल किए हैं. वो केमिस्ट्री और मैथ्स में 99 अंक लाए हैं. जबकि उनके सबसे कम 93 अंक अंग्रेजी में आए हैं.

(तस्वीर: छत्तीसगढ़ न्यूज लाइव)

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