S M L

गन्ना किसानों के भुगतान के लिए चीनी मिलों को 7000 करोड़ देगी सरकार

मंगलवार को इस संबंध में आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में कोई निर्णय लिए जाने की संभावना है

Bhasha Updated On: Jun 05, 2018 11:37 AM IST

0
गन्ना किसानों के भुगतान के लिए चीनी मिलों को 7000 करोड़ देगी सरकार

किसानों का गन्ना बकाया 22,000 करोड़ रुपए से अधिक हो जाने से चिंतित सरकार नकदी की तंगी से जूझ रही चीनी मिलों के लिए 7,000 करोड़ रुपए से अधिक के राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है.

सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को इस संबंध में आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में कोई निर्णय लिए जाने की संभावना है.

पिछले महीने सरकार ने गन्ना किसानों के लिए 1500 करोड़ रुपए की उत्पादन से संबद्ध सब्सिडी की घोषणा की थी ताकि गन्ना बकाए के भुगतान के लिए चीनी मिलों की मदद की जा सके. चीनी मिलें गन्ना उत्पादकों का भुगतान करने में असमर्थ हैं क्योंकि चीनी उत्पादन वर्ष 2017-18 (अक्टूबर - सितंबर) में अब तक 3.16 करोड़ टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद चीनी कीमतों में तेज गिरावट आने से उनकी वित्तीय हालत कमजोर बनी हुई है.

यूपी में ही किसानों के 12,000 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया

देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में ही किसानों की 12,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बकाया है. सूत्रों के मुताबिक, चीनी मिलों की तरफ से किसानों की बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित हो सके इसके लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं. उन्होंने कहा, 'इनमें 7,000 करोड़ रुपए का एक राहत पैकेज प्रस्तावित है.'

खाद्य मंत्रालय ने 30 लाख टन चीनी के बफर स्टॉक बनाने का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा कि चीनी स्टॉक को बनाए रखने की लागत सरकार द्वारा वहन की जाएगी, जिसके कारण राजकोष पर करीब 1,300 करोड़ रुपए का बोझ आने का अनुमान है. बफर स्टॉक बनाने के अलावा, खाद्य मंत्रालय ने 30 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम एक्स-मिल बिक्री मूल्य तय करने, मासिक चीनी को जारी करने की व्यव्स्था को पुन: लागू करने और प्रत्येक मिल के लिए कोटा तय करके मिलों पर स्टॉक रखने की सीमा तय करने का प्रस्ताव किया है.

चीनी उद्योग की मदद के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने इथेनॉल की नई क्षमता के विस्तार और निर्माण के लिए चीनी मिलों को 4,500 करोड़ रुपए पर छह फीसदी ब्याज सब्सिडी का प्रस्ताव दिया है. यह योजना चीनी मिलों को ऋण चुकाने के लिए पांच साल का समय प्रदान करता है. सूत्रों ने बताया कि केवल ब्याज सब्सिडी के कारण सरकार को 1,200 करोड़ रुपए का बोझ वहन करना होगा.

पेट्रोलियम मंत्रालय इथेनॉल मूल्य बढ़ाने के बारे में भी सोच रहा है ताकि चीनी मिल जल्द से जल्द किसानों को भुगतान कर सकें. वर्तमान में, चीनी की औसत एक्स- मिल कीमत 25.60 से 26.22 रुपए प्रति किलो की सीमा में है, जो उनकी उत्पादन लागत से कम है. केंद्र ने चीनी आयात शुल्क को दोगुना कर 100 फीसदी तक बढ़ा दिया है और घरेलू कीमतों में गिरावट को रोकने के लिए निर्यात शुल्क को खत्म कर दिया है. उसने चीनी मिलों से 20 लाख टन चीनी निर्यात करने को भी कहा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
DRONACHARYA: योगेश्वर दत्त से सीखिए फितले दांव

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi