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भ्रष्टाचार के ताबूत में आखिरी कील ठोकने की तैयारी में मोदी सरकार

सरकार भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करना चाहती है इसके लिए सरकारी विभागों के सतर्कता विंग को एक निश्चित समय सीमा के अंदर कार्रवाई करने को कहा गया है

Yatish Yadav Updated On: Apr 11, 2018 09:03 AM IST

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भ्रष्टाचार के ताबूत में आखिरी कील ठोकने की तैयारी में मोदी सरकार

केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है. इसी के अंतर्गत सरकार ने पिछले हफ्ते सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए हैं कि वो अपने-अपने केंद्रीय विभागों में संवेदनशील पदों की पहचान करें. सरकार इन संवेदनशील पदों की एक बार फिर से समीक्षा करना चाहती है. सरकारी संस्थाओं में संवेदनशील पदों का मतलब होता है कि वो जिस पद पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के बने रहने पर भ्रष्टाचार की गुंजाईश सबसे ज्यादा होती है. सरकार ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए एक और निर्देश दिया है जिसके अंतर्गत संवेदनशील पदों पर तीन साल से जमे अधिकारियों और कर्मचारियों का तत्काल तबादला कर दिया जाए. इतना ही नहीं सरकार ने सभी विभागों को कहा है कि इस संबंध में निर्देश 30 अप्रैल तक निश्चित रूप से जारी कर दिए जाने चाहिए.

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कवायद पर पूरी नजर सरकार में शीर्ष स्तर पर बैठे लोग रख रहे हैं. उच्च स्तर के एक सरकारी सूत्र ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि सरकार के स्तर से सभी मंत्रालयों को सेक्शन 56 (J) के अंतर्गत सभी अधिकारियों की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए गए हैं. इस सेक्शन के मुताबिक सक्षम प्राधिकारियों को उन अधिकारियों को वापस करने का पूरा अधिकार होता है जिन्होंने 50 सालों तक पब्लिक इंटरेस्ट में काम किया हो. इसके साथ ही केंद्रीय विभागों को कहा गया है कि वो अपने-अपने यहां की नियमावली की समीक्षा करें और अगर उन्हें सरकारी निर्देशों को पालन में किसी तरह की समस्या आ रही है तो वो अपने यहां की नियमावली में परिवर्तन लाकर सरकार के दिशानिर्देशों के मुताबिक कार्य करें.

सरकार भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करना चाहती है इसके लिए सरकारी विभागों के सतर्कता विंग को एक निश्चित समय सीमा के अंदर कार्रवाई करने को कहा गया है. उच्च सरकारी सूत्र के मुताबिक सभी मंत्रालयों को कहा गया है कि वो अपने यहां भ्रष्टाचार के एक साल से तीन साल और पांच साल से दस साल तक के लंबित मामलों की तत्काल समीक्षा करें और ये सुनिश्चित करें कि किसी भी हालत में अप्रैल के अंत तक भ्रष्टाचार का कोई भी मामला उनके यहां लंबित न हो.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला कार्मिक मंत्रालय 2015 से ही सभी मंत्रालयों को सभी कैडर के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले के लिए एक ट्रांसफर पॉलिसी बनाने के लिए लगातार कह रहा है. मंत्रालय का मानना है कि नियमित तबादले हमेशा से संस्था के हित में होते हैं और इससे संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होता है. इसके अलावा ट्रंसफर से निहित स्वार्थ का विकास नहीं होता है और कर्मचारियों को अलग जगह और अलग वातावरण में काम करने का अनुभव प्राप्त होता है.

Biplab Kumar Deb takes oath as Tripura chief minister

संवेदनशील पदों पर बैठे लोगों का समय और नियम के अनुसार ट्रांसफर सुनिश्चित किया जाए

भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाली केंद्रीय सतर्कता आयोग का भी यही मानना है और वो भी नियमित तबादले के विचार का समर्थन करता है. सतर्कता आयोग भी मंत्रालयों का ये सलाह देता रहा है कि वो अपने यहां के संवेदनशील पदों की पहचान करके उन पदों पर बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों का समयानुसार तबादला करते रहें जिससे कि वहां पर उस व्यक्ति का कोई निहित स्वार्थ उत्पन्न न हो सके.

सीवीसी ने अपने निर्देश संख्या 004/VGL/090 में कहा है कि आयोग ने कई सालों तक सतर्कता प्रबंधन के दौरान ये महसूस किया है कि कई सरकारी विभागों में सालों से तबादला नहीं हुआ है ऐसे में एक ही पद पर सालों से एक ही आदमी काम कर रहा है. लगातार एक ही जगह और एक ही पद पर काम करने से उस पद पर बैठे व्यक्ति के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की संभावना बढ़ जाती है. इससे न केवल उस पद पर बैठे अधिकारी या कर्मचारी के निहित स्वार्थ के विकसित होने का खतरा बना रहता है बल्कि ये संस्था की सेहत के लिए प्रतिकूल होता है. आयोग इस बात पर जोर देता है कि संवेदनशील पदों पर बैठे लोगों का समय और नियम के अनुसार ट्रांसफर सुनिश्चित किया जाए. आयोग चाहता है कि केवल मंत्रालयों में ही नहीं बल्कि पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग और बैंकों में भी ये निश्चित किया जाना चाहिए कि एक जगह पर लंबे समय तक जमे अधिकारियों का समयानुसार तबादला हो जाए.

लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), कैबिनेट सेक्रेटेरियट, सॉलिसिटर जनरल के ऑफिस और अटॉर्नी जनरल के दफ्तर में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को इससे मुक्त रखा गया है. यहां काम करने वालों का तबादला उनके शीर्ष अधिकारी की सलाह और उस अधिकारी के तबादले की इच्छा पर निर्भर करेगा.

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान

मंत्रालयों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग को दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले तीन साल में बाबुओं के खिलाफ 39 हजार से ज्यादा मामलों में विभागीय जांच शुरू हुई है. इनमें से कई मामले वित्तीय अनियमितताओं से भी जुड़े हुए हैं. सीबीआई ने भी 2014-17 के दौरान 139 आईएएस, आईपीएस, आईआरएस और आईएफएस अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं.

Indian Prime Minister Narendra Modi (C) speaks to the media on the opening day of the monsoon session of the Indian parliament in New Delhi, India, July 21, 2015. India's parliament was adjourned on the first day of a new session after opposition lawmakers demanded the resignation of leaders tainted by corruption allegations, deepening an impasse that has stalled the government's reform agenda. REUTERS/Adnan Abidi - RTX1L6JL

कार्मिक मंत्रालय के मुताबित उसने विभागों में होनेवाले भ्रष्टाचार को हतोत्साहित करने के लिए कई इतंजाम किए हैं. कार्मिक मंत्रालय का दावा है कि उसके इस कदम से विभागों में प्रशासन बेहतर हुआ है. मंत्रालय ने भ्रष्टाचार में कमी के लिए डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ते चलन की वजह से ‘लेस कैश’ अर्थव्यवस्था और वित्तीय लेन देन में पारदर्शिता को जिम्मेदार ठहराया है. मंत्रालय के मुताबिक जरुरत के अनुसार व्यवस्था में सुधार और सिस्टम को पारदर्शी बनाने से भ्रष्टाचार को कम करने में सहायता मिलती है. अन्य बातों के साथ साथ जन-धन, आधार और जरुरतमंदों तक सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे उन तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने से भी इसमें सहायता मिली है. सीधे लाभान्वितों तक सहायता की मुहिम, ई गवर्नेंस की शुरुआत और इस पूरे व्यवस्था के सरलीकरण का भी लाभ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में मिला है.

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इसके साथ ही केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने इंटीग्रिटी इंडेक्स प्रॉजेक्ट शुरु किया है जो कि विभागों में न केवल भ्रष्टाचार को पनपने से रोकेगा बल्कि विभाग को पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा. इस इंडेक्स के माध्यम से विभागों की उन क्षेत्रों के पहचान में सहायता की जाएगी जहां पर बेहतरी का गुंजाईश होगी.

पहले चरण में इस इंडेक्स के लिए 14 सेक्टर्स के 25 विभागों का चयन किया गया है. नीरव मोदी घोटाले से जूझ रहा पंजाब नेशनल बैंक इस सूची में शामिल है. बैंक के अलावा अन्य क्षेत्रों में पावर, कोयला, स्टील, ट्रांसपोर्ट, माइनिंग, डिफेंस, भारी उद्योग, कॉमर्स, टेक्सटाइल, ऑयल एवं गैस, सोशल सेक्टर में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, शहरी विकास और स्थानीय निकाय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) शामिल हैं.

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