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3 तलाक की तरह निकाह हलाला और बहुविवाह भी खत्म कराने पर अड़ी केंद्र सरकार

सुप्रीम कोर्ट खुलते ही सरकार अपना पक्ष रखेगी और यह दलील देगी कि 'लैंगिक न्याय, गैर-भेदभाव, सम्मान और समता के मद्देनजर तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह की मान्यता पर गौर फरमाया जाए.

FP Staff Updated On: Jun 29, 2018 04:28 PM IST

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3 तलाक की तरह निकाह हलाला और बहुविवाह भी खत्म कराने पर अड़ी केंद्र सरकार

केंद्र सरकार तीन तलाक की तरह निकाह हलाला और बहुविवाह भी खत्म कराने की तैयारी में है. सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने के बारे में गंभीरता से सोच रही है.

न्यूज18 को कानून मंत्रालय के अति विश्वस्त सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है. एक सूत्र ने कहा, हमारे रूख में कोई बदलाव नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक केस की सुनवाई के दौरान निकाह हलाला और बहुविवाह का मुद्दा शामिल नहीं था लेकिन अब हमारा जवाब तैयार है. इस मामले में भी हम वैसा ही रूख अपनाएंगे.

मई 2016 में तीन तलाक की सुनवाई करते वक्त तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने निकाह हलाला और बहुविवाह पर जिरह करने से मना कर दिया था.

इस साल मार्च में तीन जजों की बेंच ने बहुविवाह और निकाह हलाला के खिलाफ दायर याचिकी सुनवाई की थी. इस बेंच में सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खनविलकर और जस्टिस चंद्रचूड़ शामिल थे. यह याचिका बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय, समीरा बेगम, नफीसा बेगम और मौलिम मोहसिन हुसैन ने दायर की थी. उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लिकेशन एक्ट की धारा 2 को असंवैधानिक घोषित किया जाए. याचिका में यह भी कहा गया है कि निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथा संविधान की धारा 14,15 और 21 का उल्लंघन है.

सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के खुलते ही सरकार अपना पक्ष रखेगी और यह दलील देगी कि 'लैंगिक न्याय, गैर-भेदभाव, सम्मान और समता के मद्देनजर तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह की मान्यता पर गौर फरमाया जाए.'

तीन तलाक मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में जो दलील दी थी जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम देशों ने भी इन प्रथाओं को इस्लाम या आवश्यक मजहबी रीतियों का जरूरी अंग नहीं बताया है.

यह ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है कि सरकार की ओर से शायरा बानो मामले के दौरान दायर शपथ पत्र में कहा गया है कि 'मुस्लिम देशों या बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी वाले देश जहां इस्लाम राज्य धर्म है, ने इस क्षेत्र में सुधार किए हैं और तलाक कानून और बहुविवाह को नियंत्रित किया है.'

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