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‘नमामि गंगे’ योजना में 2600 करोड़ का इस्तेमाल नहीं हुआ: कैग

कैग ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि संशोधित अनुमान की तुलना में आवंटित राशि का 6 से 63 प्रतिशत तक ही इस्तेमाल किया गया है

FP Staff Updated On: Dec 19, 2017 07:33 PM IST

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‘नमामि गंगे’ योजना में 2600 करोड़ का इस्तेमाल नहीं हुआ: कैग

संसद में नमामि गंगे योजना पर मंगलवार को कैग की रिपोर्ट पेश की गई. इस रिपोर्ट के अनुसार नमामि गंगे योजना के तहत जो धनराशि आवंटित की गई थी उसका समुचित उपयोग नहीं किया जा सका है. कैग ने अपनी रिपोर्ट साल 2014-15 से साल 2016-17 तक के लिए दी है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि संशोधित अनुमान की तुलना में आवंटित राशि का 6 से 63 प्रतिशत तक ही इस्तेमाल किया गया है.

कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि नमामि गंगे योजना के तहत विभिन्न एजेंसियों, संस्थानों और सरकारों के पास कुल मिलाकर करीब 2600 करोड़ रुपए की राशि पड़ी हुई है. यानी इसका इस्तेमाल नहीं किया गया है.

कैग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कार्य योजना को अंतिम रूप नहीं दिए जाने की वजह से स्वच्छ गंगा निधि में से एक भी रुपए का इस्तेमाल नहीं किया जा सका है और इसके तहत कुल 198.14 करोड़ रुपए अभी भी बैंकों में पड़े हैं.

नमामि गंगे योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए मई 2017 तक, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में नदी संरक्षण क्षेत्र की पहचान तक नहीं की गई थी. सिर्फ उत्तराखंड में पहचानकार्य प्रगति पर था.

गंगा नदी में मल विसर्जन और मल-त्याग की गतिविधि पर लगाम लगाने के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत 951.11 करोड़ रुपए में से बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों ने सिर्फ 490.15 करोड़ रुपए का ही उपयोग किया है.

कैग ने यह भी खुलासा किया है कि उत्तराखंड को छोड़कर नमामि गंगे योजना के तहत शामिल अन्य चार राज्य बिहार, झारखंड ,उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल 31 मार्च 2017 तक,100 प्रतिशत व्यक्तिगत घरेलू शौचालय के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सके.

कैग की यह रिपोर्ट बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि नमामि गंगे योजना पीएम मोदी की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक है.

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