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अनंतनाग मुठभेड़ से J&K में फिर लौटा घेराबंदी और तलाशी अभियान का दौर

राज्यपाल शासन में सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान में सख्ती बरतने का फैसला लिया है. आतंक के खिलाफ इस अभियान के बाद सड़कों पर विरोध-प्रदर्शनों के बढ़ने की संभावना है

Sameer Yasir Updated On: Jun 23, 2018 04:15 PM IST

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अनंतनाग मुठभेड़ से J&K में फिर लौटा घेराबंदी और तलाशी अभियान का दौर

संवेदनशील दक्षिणी कश्मीर के सिरीगुफवारा गांव में सुरक्षाबलों ने आधी रात में करीब 2 बजे से घेराबंदी कर के तलाशी लेना शुरू किया. शुक्रवार को अहले सुबह 6 बजे सुरक्षाबलों को कामयाबी मिली और उन्होंने एक मकान को निशाने पर लेकर घेर लिया. उस मकान में 4 आतंकवादी छिपे हुए थे. इन आतंकवादियों के आईएसआईएस की स्थानीय यूनिट के साथ मिलकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने का अंदेशा था. सुरक्षाबलों की घेरे को देखते हुए आतंकवादियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. जल्द ही वहां पर बड़ा एनकाउंटर शुरू हो गया.

राज्यपाल शासन लगने के बाद आतंकियों से मुठभेड़ में आई है तेजी

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक इस एनकाउंटर में 6 लोगों की मौत हो गई. मारे गए लोगों में 4 आतंकवादियों के साथ-साथ एक स्थानीय नागरिक और एक पुलिसकर्मी भी शामिल है. मार गिराए गए 4 आतंकवादियों में से 2 स्थानीय थे.

बीजेपी के पीडीपी के साथ गठबंधन तोड़ने की घोषणा के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लग चुका है. राज्यपाल शासन लगने के बाद घाटी में तीसरे दिन ही इस घटना में एक स्थानीय नागरिक की भी मौत हो गई और उनकी पत्नी गोली लगने से घायल हो गई.

रमजान के दौरान घाटी में कुछ दिनों तक शांति छाई हुई थी और आम लोगों ने इससे राहत की सांस भी ली थी मगर रमजान खत्म होने के साथ ही खामोश बंदूकों से फिर आग निकलने लगी है. सीजफायर की समाप्ति के साथ ही फिर से रक्तपात की आशंका बढ़ गई है. आने वाले दिनों में घाटी में संघर्ष बढ़ने के आसार हैं क्योंकि सुरक्षाबलों ने सख्ती से तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. खास कर के दक्षिणी कश्मीर से सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के सफाए के लिए कमर कस ली है और इसके लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है.

जम्मू-कश्मीर में रमजान के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ फिर ऑपरेशन ऑलआउट शुरू कर दिया है (फोटो: पीटीआई)

जम्मू-कश्मीर में रमजान के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ फिर से 'ऑपरेशन ऑलआउट' शुरू कर दिया है (फोटो: पीटीआई)

इधर सिरीगुफवारा गांव के ग्रामीणों ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने गांव में आतंकवादियों के ठिकाने को घेरने के बाद घर में रहने वाले मकान मालिक और उनकी पत्नी को बाहर निकलने का मौका तक नहीं दिया जिससे मकान मालिक की मौत हो गई. और उनकी पत्नी गोली लगने से घायल हो गई. स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के मुताबिक आतंकवादियों के खिलाफ किसी भी अभियान की शुरुआत करने से पहले वहां पर और आसपास रहने वाले स्थानीय नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकाल लिया जाता है जिससे की उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंच सके. लेकिन ग्रामीणों के आरोपों से सुरक्षाबलों ने इनकार किया है और कहा है कि आतंकवादियों की गोली से स्थानीय नागरिक को नुकसान पहुंचा है न कि उनकी कार्रवाई से.

मुठभेड़ में एक स्थानी पति-पत्नी भी फंसे, पति की गोली लगने से मौत

चश्मदीदों के मुताबिक सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच एनकाउंटर का शिकार बने मोहम्मद युसूफ राठर और उनकी पत्नी हफीजा उस समय घर के अंदर थे जिस समय सुरक्षा बलों ने मकान की घेराबंदी की थी. एनकाउंटर के वक्त वो लोग उस घर के अंदर ही फंसे हुए थे. सिरीगुफवारा गांव के नौशेरा-नौपुरा इलाके में रहने वाले स्थानीय नागरिक मुश्ताक बल्ला ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया की फायरिंग की शुरुआत सुबह 6 बजे से हुई थी. बल्ला के मुताबिक 'वहां पर कुछ घरों का समूह है और हमें अभी तक स्पष्ट रुप से यह पता नहीं चला है कि राठर की मौत कैसे हुई. एनकाउंटर के दौरान उन घरों से धुंआ निकल रहा था.'

जिस समय सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ जोरों से चल रही थी उसी वक्त नाराज स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन शुरू कर दिया. लोगों के बीच जब यह खबर फैली की एनकाउंटर के दौरान एक निर्दोष नागरिक की जान चली गई है और लगभग एक दर्जन लोग गोली लगने से घायल हो गए हैं, तो सैकड़ों की संख्या में युवा एनकाउंटर वाली जगह पर जमा हो गए और आजादी के नारों और सरकार विरोधी स्लोगनों के साथ उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प भी हुई जिसके बाद सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों को पैलेट और टियर गैस से जवाब दिया.

बिजबेहरा अस्पताल के मेडिकल अफसर डॉ. मोहम्मद शफी के अनुसार 'इस अस्पताल में 13 घायल लाए गए थे जिसमें से अधिकतर को गोली लगी थी और केवल 2 लोग पैलेट लगने से घायल हुए थे.' शफी का कहना था सबसे पहले एक महिला को अस्पताल में लाया गया जिसके हाथ में गोली लगी थी. उसके बाद ही गोली लगने से घायल अन्य लोग अस्पताल पहुंचाए गए.

Srinagar : Governor Narinder nath Vohra reviewed a wide range of security management issues relating to the State with senior Civil, Police, Central Police, Army and Central Intelligence Agency officers in a meeting held at the Raj Bhavan at Srinagar on Wednesday, June 20, 2018. (PTI Photo) (PTI6_20_2018_000246B)

गवर्नर एन एन वोहरा जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद श्रीगनर में पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए (फोटो: पीटीआई) 

घटना वाले दिन सुबह से एनकाउंटर की कवरेज कर रहे फोटो जर्नलिस्ट हिलाल शाह का कहना था कि अस्पताल और एनकाउंटर स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल था.

डॉ. शफी के अनुसार एक महिला जिसके दाएं हाथ में गोली लगी थी, 2 अन्य लोग जिन्हें पैलेट लगा था और एक लड़का सिर की चोट के साथ अस्पताल में भर्ती हुआ था. जबकि राठर को जब तक अस्पताल लाया गया तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. जबकि उनकी पत्नी हफीजा को बाद में बेहतर इलाज के लिए एसकेआईएमएस में शिफ्ट कर दिया गया.

गुप्त सूचना के बाद सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ शुरू किया ऑपरेशन

राज्य के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) शेष पाल वैद्य के मुताबिक 'एनकाउंटर की शुरुआत सुबह के समय हुई थी. हमें गोपनीय सूत्रों से जानकारी मिली थी कि एक मकान में 3 से 4 आतंकवादी छिपे हुए हैं. मुठभेड़ के बाद 3 आतंकवादियों के शव बरामद कर लिए गए हैं जबकि इस एनकाउंटर में एक पुलिस का जवान भी शहीद हो गया. इस घटना में 2 स्थानीय लोग भी इस हमले में घायल हो गए थे जिनमें से 1 की मौत हो गई.'

केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा घाटी में एकतरफा संघर्ष विराम की समाप्ति की घोषणा के साथ ही लगभग प्रतिदिन सामान्य नागरिकों की मौत हो रही है. इन घटनाओं से घाटी में तनाव बढ़ गया है. जिस तरह से शुक्रवार को सिरीगुफवारा गांव में सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ तलाशी और घेराव की शुरुआत की है वो आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है. क्योंकि सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान में सख्ती बरतने का फैसला लिया है. सुरक्षाबलों के आतंकवादियों के खिलाफ अभियान के बाद सड़कों पर विरोध-प्रदर्शनों के बढ़ने की संभावना है.

Stone Pelting in J&K

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की कार्रवाई बढ़ने से स्थानीय नागरिकों का विरोध-प्रदर्शन का दौर तेज हो गया है (फोटो: पीटीआई)

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक एनकाउंटर स्थल के आसपास लगभग 40 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि सौ से अधिक लोग घायल हो चुके हैं. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जिस पैलेट का उपयोग असमान्य परिस्थितियों में कभी-कभार करने का भरोसा दिलाया था वो पैलेट अब सुरक्षाबलों की पहली पसंद बन चुका है.

राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि जिस तरह से बीजेपी ने गठबंधन की सरकार से बाहर हो कर राज्य को सीधे केंद्र के अधीन कर दिया है उससे राज्य में तबाही के हालात पैदा होने की आशंका है. कश्मीर घाटी में सामान्य नागरिकों, सुरक्षाबलों, आतंकवादियों की मौत की संख्या बढ़ेगी और तबाह मकानों और बर्बाद बागीचों की तस्वीरें चारों ओर दिखाई देंगी. बीजेपी के साथ गठबंधन टूटने के बाद पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेताओं का कहना है कि वो अब तक सामान्य कश्मीरी को मारने वाली बंदूक और उसको चलाने वाले लोगों की बीच प्रतिरोधक का काम कर रहे थे.

इस भूमिका को न घाटी के लोग समझ रहे हैं, न ही दिल्ली इसे स्वीकारने को तैयार है

पीडीपी के प्रवक्ता रफी मीर के मुताबिक उनकी इस भूमिका को न तो घाटी के लोग समझ पा रहे हैं और न ही दिल्ली स्वीकार करने को तैयार है. मीर का कहना है कि 'उनका मकसद लोगों का दिल जीतना नहीं बल्कि लोगों को मारने का सिलसिला जारी रखना है. लेकिन उनकी सख्ती की यह पॉलिसी निश्चित रुप से फेल हो जाने वाली है.'

इधर श्रीनगर में सेना के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया का कहना है कि 'उस इलाके में तलाशी के दौरान एक घर से फायरिंग किए जाने के बाद सेना ने एनकाउंटर शुरू किया जिसमें कुल 4 आतंकवादी मारे गए.'

इस घटना के बाद श्रीनगर समेत 3 जिलों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं. श्रीनगर के अलावा अनंतनाग और पुलवामा जिले में भी इंटरनेट सेवाएं अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई हैं.

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