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जनरल बिपिन रावत के बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत है

डोकलाम विवाद खत्म होने के बाद सेना प्रमुख का यह बयान मामले की गंभीरता को दिखाता है, जिसके लिए भारत को पूरी तरह तैयार रहना होगा

Updated On: Sep 07, 2017 12:30 PM IST

Amitesh Amitesh

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जनरल बिपिन रावत के बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत है

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने एक बार फिर से ऐसा बयान दिया है जो देश के सामने की चुनौतियों से पूरे देश को आगाह करने वाला है. सेना प्रमुख ने कहा है कि भारत को चीन के साथ दो मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए जबकि, पाकिस्तान के साथ सुलह की कोई गुंजाइश नहीं दिखती.

सेना प्रमुख ने आगाह किया है कि उत्तरी क्षेत्र में चीन से लगी सीमा पर धीरे-धीरे हालात बड़े संघर्ष में बदल सकता है. उस वक्त केवल एक जगह तक ही संघर्ष सीमित नहीं रह सकता, बल्कि धीरे-धीरे पूरी उत्तरी सीमा पर संघर्ष की नौबत आ सकती है. ऐसे हालात में पाकिस्तान भी पश्चिमी सीमा पर इस तरह के हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है.

photo: Firstpost/ Manoj Kumar.

उन्होंने कहा, 'हमें तैयार रहना होगा. हमारे संदर्भ में, युद्ध जैसी स्थिति हकीकत के दायरे में है.' जनरल रावत ने कहा कि बाहरी सुरक्षा खतरों का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के लिए तीनों सेवाओं में सेना की सर्वोच्चता बनी रहनी चाहिए.

सेना प्रमुख जनरल रावत का बयान ऐसे वक्त में आया है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शिजिंपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देश डोकलाम विवाद को अतीत का अध्याय बताकर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हुए हैं.

सेंटर फॉर लैंड वार स्टडीज के एक सम्मेलन में बोलते हुए जनरल बिपिन रावत का बयान भारत-चीन संबंध और इस वक्त भारत के सामने मौजूदा चुनौतियों को बयां करने के लिए काफी है.

दरअसल, जनरल रावत उस संभावित खतरे की तरफ सबका ध्यान दिलाना चाहते हैं जिसको लेकर हमेशा आशंका बनी रहती है. जनरल रावत अतीत के अध्यायों से सबक लेकर आगे अपनी तैयारी को चुस्त करने की तरफ इशारा कर रहे हैं. उनको अभी भी चालबाज ड्रैगन की बातों पर भरोसा नहीं हो रहा है. उन्हें आशंका है कि आने वाले दिनों में फिर चीन सीमा पर किसी तरह के तनाव के हालात को पैदा कर सकता है.

डोकलाम में भारत को मिली कूटनीतिक जीत के बाद अब दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य होने की बात भले ही कही जा रही हो, लेकिन, लगता है जनरल रावत डोकलाम विवाद के वक्त चीन की सीनाजोरी को भूलने के मूड में नहीं हैं.

73 दिनों तक जब दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी थीं तो उस वक्त चीन की तरफ से दी जा रही धमकी को इतनी आसानी से भुलाया भी नहीं जा सकता. यही वजह है कि चीन को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियों को पुख्ता करने की तरफ भारतीय सेना प्रमुख इशारा कर रहे हैं.

पाकिस्तान के साथ आजादी के बाद से ही टकराहट होती रही है. लेकिन, हर बार पाकिस्तान को मात मिली है. 1965 से लेकर 1971 का युद्ध हो या फिर करगिल की लड़ाई, हर मोर्चे पर पाकिस्तान को पटखनी मिली है.

लेकिन, लगातार हार के बाद भी पाकिस्तान सबक सीखने के बजाए सीमा पर उकसावे की कार्रवाई करता रहता है. पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता. सीधी लड़ाई में हार जाने के बाद अब उसकी तरफ से लगातार कश्मीर में आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने की कोशिश होती रही है.

ऐसे में आतंकवाद की फैक्ट्री बन चुके पाकिस्तान से भारत सामान्य संबंधों की उम्मीद कैसे कर सकता हैय़ भारत के खिलाफ जहर बोने और उगलने वाले देश से कभी भी शांति की उम्मीद कैसे की जा सकती है. सेना प्रमुख का कहना है कि पाकिस्तान की सेना, वहां की राजसत्ता और वहां के लोगों के मन में यह बात बैठा दी जा चुकी है कि भारत उनका दुश्मन है.

जनरल रावत इसी ओर इशारा कर रहे हैं. जनरल रावत बताना चाह रहे हैं कि जब पाकिस्तान हार के बावजूद अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है तो फिर वो चीन के साथ हालात बिगड़ने पर चुप कैसे रह सकता है ?

सेना प्रमुख बता रहे हैं कि अगर चीन के साथ लगी उत्तरी सीमा पर युद्ध के हालात बनते हैं तो पाकिस्तान भी इसका फायदा उठाने की कोशिश करेगा. ऐसे में हमें उस वक्त युद्ध पाकिस्तान भी दूसरी तरफ से मोर्चा खोल सकता है. लिहाजा हमें एक साथ दोनों मोर्चों पर लड़ाई के लिए अपने-आप को तैयार करना होगा.

bipin rawat, बिपिन रावत

जनरल रावत ने तीन महीने पहले भी इसी तरह का बयान दिया था. उस वक्त जनरल रावत ने कहा था कि हम एक साथ ढ़ाइ मोर्चे पर लडाई के लिए तैयार हैं. उस वक्त जनरल बिपिन रावत ने एक साथ चीन, पाकिस्तान और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर एक साथ लड़ाई लड़ने की बात की थी.

लेकिन, डोकलाम विवाद खत्म होने के बाद सेना प्रमुख का यह बयान मामले की गंभीरता को दिखाता है, जिसके लिए भारत को पूरी तरह तैयार रहना होगा.

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