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महंगाई नापने का नया पैमाना: अप्रैल में घटी महंगाई और बढ़ा औद्योगिक उत्पादन

IIP की नई सीरीज में ग्रोथ रेट काफी ज्यादा दिख रही है

FP Staff Updated On: May 12, 2017 08:17 PM IST

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महंगाई नापने का नया पैमाना: अप्रैल में घटी महंगाई और बढ़ा औद्योगिक उत्पादन

केंद्र सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI/डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन इंडेक्स (IIP/आईआईपी) के आधार वर्ष में बदलाव किया है. अब 2004-05 की बजाय 2011-12 को आधार वर्ष बनाया गया है. यानी अब आंकड़ों की गणना 2011-12 के आधार पर की जाएगी. आईआईपी की नई सीरीज में 809 आइटम जोड़े गए हैं, जबकि इससे पहले 620 आइटम शामिल थे.

नई सीरीज का असर यह रहा कि इसमें थोक और खुदरा महंगाई में गिरावट नजर आई है. वहीं औद्योगिक उत्पादन दर में रफ्तार दर्ज की गई है. नए आंकडों के अनुसार, अप्रैल में थोक महंगाई 3.85 प्रतिशत और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 2.99 प्रतिशत दर्ज की गई. वहीं मार्च में थोक महंगाई दर 5.29 फीसदी रही थी. मार्च में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार 2.7 प्रतिशत रही. वहीं फरवरी में आईआईपी ग्रोथ 1.9 फीसदी रही.

आईआईपी की ग्रोथ बढ़ी

IIP की नई सीरीज में ग्रोथ रेट काफी ज्यादा दिख रही है. डब्ल्यूपीआई से अप्रत्यक्ष कर के इंपैक्ट को हटाने का फैसला भी लिया गया. इसका मतलब ये हुआ कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू होने के बाद महंगाई पर क्या असर पड़ा , इसका अनुमान लगाना मुश्किल हो जाएगा. एक उच्च स्तरीय पैनल ने 2011-12 के आधार पर आईआईपी मापने का नया मैथड तैयार किया है.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) और राष्ट्रीय खातों का आधार वर्ष पहले ही बदल दिया था. खुदरा महंगाई पहले ही साल 2011-12 के आधार पर तय की जाती है. कई अर्थशास्त्री और थिंक टैंक लंबे समय से आईआईपी और डब्ल्यूपीआई के आधार वर्ष बदलने की मांग कर रहे थे. उनका कहना था कि इससे जीडीपी आंकडे सही और यथार्थ के ज्यादा करीब रहेंगे. सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि डब्ल्यूपीआई सीरीज़ भारत में छह बार बदली गई हैं. इससे पहले 1952-53, 1961-62, 1970-71, 1981-82, 1993-94 और 2004-05 में ऐसा किया गया था.

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