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NEET छात्रों को बड़ा तोहफा, 15% तक घटा पर्सेंटाइल

नीट पीजी और नीट एसएस के लिए 15% पर्सेंटाइल घटाने का फैसला लिया गया है. इससे 18000 छात्रों को फायदा पहुंचने वाला है

FP Staff Updated On: Apr 27, 2018 07:32 PM IST

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NEET छात्रों को बड़ा तोहफा, 15% तक घटा पर्सेंटाइल

मोदी सरकार ने NEET PG और NEET SS मेडिकल एंट्रेस की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स को बड़ा तोहफा दिया है. जनरल कैटेगरी के लिए 50 और SC/ST/OBC के लिए ज़रूरी 40 पर्सेंटाइल को अब 15% और घटा दिया गया है. यानी के इन दोनों की परीक्षाओं के लिए जनरल कैटेगरी में अब क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल 35 जबकि रिजर्व्ड कैटेगरी में 25 हो गया है.

हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा ने ट्वीट कर बताया कि नीट पीजी और नीट एसएस के लिए 15% पर्सेंटाइल घटाने का फैसला लिया गया है. नड्डा के मुताबिक इससे 18000 छात्रों को फायदा पहुंचने वाला है.

फिलहाल क्या है स्थिति

कैटेगरी - पहले ज़रूरी पर्सेंटाइल - अब ज़रूरी पर्सेंटाइल जनरल - 50 - 35 SC/ST/OBC- 40 - 25 अनरिज़र्व्ड PH - 45 - 30 रिज़र्व्ड PH - 40 - 25

क्या है पर्सेंटाइल

पर्सेंटाइल और पर्सन्टेज में काफी फर्क है. परीक्षा के कुल मार्क्स में से आप कितने हासिल करते हैं वो पर्सन्टेज होती है. जैसे 100 मार्क्स की परीक्षा थी तो आपने 85 हासिल किए, ऐसे में आपकी पर्सन्टेज 85% है. पर्सेंटाइल जानने के लिए फ़ॉर्मूला- आपके कुल कितने नंबर आए X 100 / आपकी कैटेगरी में सबसे ज्यादा कितने नंबर हासिल किए गए.

इसे ऐसे समझें-

आपके नीट में 295 मार्क्स आए X100/ आपकी कैटेगरी में टॉपर के 396 मार्क्स आए = आपकी पर्सेंटाइल हुई 74.49%. इसे नीट की परीक्षा में आपकी कैटेगरी में कितने स्टूडेंट शामिल हुए उस फ़ॉर्मूले से भी जाना जा सकता है.

इस फैसले से क्या फर्क पड़ेगा?

दिल्ली में IIT और NEET के लिए कोचिंग देने वाले उदय प्रताप बताते हैं कि इससे कम नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स के लिए भी एडमिशन का रास्ता आसन हो जाएगा. उदय ये भी कहते हैं कि सरकार ने ये फैसला प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के दबाव में लिया है, जिनकी सीट्स अभी भी खाली हैं. पर्सेंटाइल घटाने से वो और एडमिशन ले सकेंगे लेकिन इससे क्वालिटी पर फर्क पड़ना तय है.

साल 2017 में भी कई जगह ऐसे मामले सामने आए थे जहां 720 में से सिर्फ 145 मार्क्स हासिल करने वाले स्टूडेंट का एडमिशन हो गया था. उसकी पर्सेंटाइल तो नियमों के तहत 50.09 थी लेकिन उसकी पर्सन्टेज 20.13% ही थी. उदय भी कहते हैं कि डॉक्टर का काम जीवन बचाने वाला होता है ऐसे किसी प्रोफेशन में दोयम दर्जे के स्टूडेंट्स आने लगे और डॉक्टर बनने लगे तो काफी नुकसान हो सकता है.

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