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लीक हुए सीक्रेट सरकारी दस्तावेजों को लेकर मोदी सरकार क्यों परेशान है?

लगातार लीक होते सीक्रेट दस्तावेजों ने केंद्र सरकार की पेशानी पर बल ला दिए हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Nov 17, 2017 05:06 PM IST

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लीक हुए सीक्रेट सरकारी दस्तावेजों को लेकर मोदी सरकार क्यों परेशान है?

केंद्र सरकार संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों के आधार पर दायर की जा रही जनहित याचिकाओं को लेकर परेशान है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसी मुद्दे को लेकर एक अपील दायर की है. केंद्र सरकार की तरफ से गुरुवार को अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा, 'याचिकाकर्ता जिन दस्तावेजों का सहारा लेकर याचिका दायर कर रहे हैं, वह काफी संवेदनशील है. इन दस्तावेजों के आधार पर जनहित याचिका दाखिल करने पर रोक लगनी चाहिए.'

केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, 'याचिकाकर्ता के द्वारा दायर की जाने वाले कई दस्तावेज ऐसे होते हैं जो देश की जांच एजेंसियों और कैबिनेट की बैठक से जुड़े होते हैं, जिन्हें आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया है. याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों को कैसे हासिल कर रहे हैं?'

supreme court

गौरतलब है कि केंद्र सरकार का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील दस्तावेज प्रलोभन देकर हासिल किए जा रहे हैं. यह देश की आईटी एक्ट और सीक्रेट एक्ट में अपराध की श्रेणी में आते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील के बाद कहा है कि इस मसले पर जल्द ही समाधान निकाला जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के जज यूयू ललित और एके गोयल की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को आश्वस्त किया है कि जल्द ही इस मसले पर समाधान निकाल लिया जाएगा.

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देश में पिछले कुछ सालों से सरकार के अहम दस्तावेजों के लीक होने की लगातार खबर आ रही है. सरकार के गोपनीय दस्तावेजों की लीक होने के बाद मोदी सरकार की परेशानी बढ़ गई है. याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों के सहारे देश की अदालतों में सरकार के खिलाफ कई याचिकाएं दायर कर रहे थे.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि कुछ असंतुष्ट अधिकारी सरकार के गोपनीय दस्तावेज जानबूझ कर लीक कर रहे हैं. सीबीआई, ईडी और कैबिनेट नोट जैसे संवेदनशील दस्तावेज लीक होना गंभीर अपराध है. लिहाजा इन दस्तावेजों के आधार पर जनहित याचिका दाखिल करने पर रोक लगनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या सरकार ने इस मसले पर अब तक किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की है? इस पर देश के अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल का कहना था कि सरकार इसको लेकर बेहद गंभीर है. सीबीआई, ईडी जैसी जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों को संरक्षित करने में नाकाम साबित हुई हैं. सरकार इस दिशा में अब काम करना शुरू कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रविशंकर कुमार से जब फर्स्टपोस्ट हिंदी ने इस बारे में बात की तो उनका कहना था, 'देखिए आरटीआई एक्ट में भी यह प्रावधान है कि देश की सुरक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज की सूचना नहीं दी जाएगी. सरकार की चिंता लीक हो रहे या बैक डोर से आ रहे दस्तावेजों को लेकर है, जो सही भी है. जब तक कोर्ट ओरिजिनल डॉक्यूमेंट नहीं देखेगी तब तक किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकती है. किसी डॉक्यूमेंट की फोटो कॉपी अगर कोई व्यक्ति कहीं से लाकर कोर्ट में दाखिल करता है, उसको साक्ष्य के तौर पर कोर्ट कैसे स्वीकार करेगी?

रविशंकर कुमार आगे कहते हैं, 'मान लीजिए कोई आदमी डॉक्यूमेंट हासिल कर कोर्ट को दे दे तो उसकी प्रमाणिकता कोर्ट कैसे साबित करेगी? अनऑफिशियली अगर कोई आदमी कोर्ट में दस्तावेज प्रस्तुत करता है तो ये सीक्रेट एक्ट का वॉयलेशन होगा. किसी अज्ञात आदमी से प्राप्त डॉक्यूमेंट कोर्ट की नजर में प्रमाणिक नहीं होता है, लेकिन अगर कोर्ट इस डॉक्यूमेंट को वास्तविक दस्तावेजों से मिलान करवा ले तो फिर कार्रवाई हो सकती है.'

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गौरतलब है कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले की आंच छत्तीसगढ़ सरकार तक भी पहुंच चुकी है. इस मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे के विदेशी बैंक खाते का मामला भी शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा है कि साल 2006-07 में राज्य कैबिनेट के निर्णय से जुड़े ऑरिजिनल डॉक्यूमेंट अदालत में पेश करे.

प्रशांत भूषण

प्रशांत भूषण

गुरुवार को अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर डील मामले में सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा था. सरकार का कहना था कि सरकारी दस्तावेज के नोटिफिकेशन को हासिल करना आईटी एक्ट में अपराध है. देश के अटॉर्नी जनरल ने सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा की डायरी लीक मामले का जिक्र किया. जिस पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण का कहना था कि एक अनजान आदमी यह दस्तावेज मेरे घर पहुंचा गया था.

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