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सुपर पावर बनना है, तो खेल को प्राथमिकता दीजिए

हर पार्टी ने खेल को लेकर वो रवैया नहीं अपनाया है, जिसकी जरूरत है

Updated On: Feb 01, 2017 11:38 AM IST

Dilip Tirkey Dilip Tirkey
लेखक पूर्व हॉकी कप्तान और ओलिंपियन है. राज्यसभा के वर्तमान सांसद और सदन में बीजेडी के नेता हैं

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सुपर पावर बनना है, तो खेल को प्राथमिकता दीजिए

एक खिलाड़ी के नाते मुझे हमेशा इस बात की तकलीफ रही है कि खेलों को बजट में कभी अहमियत नहीं मिलती. मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन-सी पार्टी सत्ता में है.

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हर पार्टी ने खेल को लेकर वो रवैया नहीं अपनाया है, जिसकी उम्मीद मुझे रही है. जितनी रकम खेल बजट के लिए तय की जाती है, वो ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है. इस रकम से आप खेलों की महाशक्ति नहीं बन सकते.

ओलिंपिक पदक के लिए चाहिए 8 साल की तैयारी  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार खेलों की बात करते हैं. वो 2020 के लिए टास्क फोर्स से लेकर तमाम बातें कर चुके हैं. लेकिन उन सबके लिए जरूरी है कि जरूरी रकम बजट में दी जाए.

मोदी जी तो 2020 की बात कर रहे हैं. मेरा कहना है कि अगर आप 2024 की तैयारी करना चाहते हैं, तो भी अभी से उसके लिए तैयारियां जरूरी है. ओलिंपिक में पदक के लिए कम से कम छह से आठ साल की तैयारी जरूरी है.

खिलाड़ियों पर होता है कम खर्च 

मैंने कई बार सदन में मुद्दा उठाया है कि पैसे बढ़ाए जाने चाहिए. एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में एक एथलीट पर हर दिन 22 रुपए खर्च होते हैं. जमैका में प्रतिदिन 19 पैसे खर्च होते हैं.

भारत में प्रतिदिन सिर्फ तीन पैसे खर्च किए जाते हैं. समझ सकते हैं कि अगर जमैका जैसा देश भारत से ज्यादा पैसे खर्च करता है, तो उसका क्या मतलब है.

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड कितना पैसा खर्च करते हैं, इस बारे में हम लगातार पढ़ते रहते हैं. इसका मतलब यही है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली जी को गंभीरता से खेल के बारे में सोचना होगा.

क्या है सरकार से उम्मीद

मुझे जेटली जी से इसलिए भी उम्मीद है, क्योंकि उनका खेलों से जुड़ाव रहा है. वो क्रिकेट प्रशासन में रहे हैं.

भले ही क्रिकेट और ओलिंपिक खेलों में बहुत फर्क है. लेकिन उम्मीद है कि कम से कम वो खिलाड़ियों की समस्या समझेंगे. बजट में कुछ पैसे हर बार बढ़ते हैं. लेकिन वो नाकाफी हैं.

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मेरा मानना है कि हमें इस लिहाज से भी सोचना चाहिए कि कई देशों के मुकाबले हम बहुत ज्यादा खेलों में हिस्सा लेते हैं.

ओलिंपिक पदक लायक खेलों को पहचानना जरूरी 

हमारा फोकस साफ नहीं है. हमें ओलिंपिक में पदक के लायक खेलों को पहचानना होगा और उन पर फोकस करना होगा. इसके साथ, ध्यान रखना चाहिए कि जो पैसा बजट में मिलता है, उसका बड़ा हिस्सा स्टाफ फंड में चला जाता है.

हमारे यहां खेलों के विकास में खर्च काफी कम है. हमें उस लिहाज से देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एशियाई खेल, एशिया कप, वर्ल्ड कप जैसे इवेंट के अलावा स्कूल गेम, ग्रामीण खेल पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

खेलों में शुरुआती स्तर पर सबसे ज्यादा कमियां हैं. हमें देखना होगा कि खेलों के बजट में बड़ा हिस्सा शुरुआती स्तर पर हो.

ओडिशा पर भी ध्यान दीजिए

मेरे लिए खेलों के साथ अपने राज्य पर बात करना भी जरूरी है. हमारा प्रदेश ओडिशा आदिवासी राज्य माना जाता है. हमें बार-बार प्राकृतिक आपदाओं से जूझना पड़ता है. ऐसे में इस राज्य पर नजरे इनायत होना जरूरी है.

तमाम मेडिकल कॉलेज की घोषणाएं होती रही हैं, जो पूरी नहीं हुई हैं. अर्बन और रूरल हाउसिंग पर खास ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

ओडिशा में प्राकृतिक संपदा भरी पड़ी है. उनके सही इस्तेमाल के लिए पैसों की जरूरत होती है. हमारे राज्य को स्पेशल पैकेज दिया जाना चाहिए.

(लेखक का परिचय- लेखक पूर्व हॉकी कप्तान और ओलिंपियन है. राज्यसभा के वर्तमान सांसद और सदन में बीजेडी के नेता हैं)

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