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अब कार्टून चैनल नहीं दिखा सकेंगे कोला-जंक फूड के विज्ञापन

संसद में जंक फूड पर रोक के बारे में जानकारी सूचना एवं टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने गुरुवार को दी

Updated On: Feb 08, 2018 01:57 PM IST

FP Staff

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अब कार्टून चैनल नहीं दिखा सकेंगे कोला-जंक फूड के विज्ञापन

सरकार ने गुरुवार को कहा कि नौ जानीमानी फूड कंपनियों ने कार्टून चैनलों पर कोला और जंक फूड के विज्ञापन नहीं देने का वादा किया है.

पिछले साल दिसंबर में सरकार ने टीवी पर कंडोम के विज्ञापन दिखाने से रोक दिया था, यह कहते हुए कि यह बच्चों के लिए 'अश्लील' है.

क्या कहा मंत्री ने

जंक फूड पर रोक के बारे में जानकारी संसद में सूचना एवं टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने गुरुवार को दी. राठौर ने कहा, इस बारे में टीवी चैनलों को बहुत जल्द निर्देश भेजे जाएंगे. उन्होंने कहा कि भ्रामक विज्ञापनों को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसआई) ने 11 सदस्यीय समिति बनाई थी. इस समिति ने अपनी रिपोर्ट दी और इस पर अमल हो रहा है. उन्होंने कहा कि नौ नामी फूड कंपनियों ने भरोसा दिलाया कि वे ऐसे विज्ञापन नहीं देंगे.

कमेटी की सिफारिशों पर फैसला

बच्चों पर जंक फूड का कितना असर पड़ता है, इसे जानने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी. कमेटी की सिफारिश के मुताबिक, कम उम्र में बच्चों की खाने-पीने की आदतें उनकी पूरी जिंदगी पर असर डालती हैं.

कई चैनलों पर पड़ेगा असर

जंक फूड के विज्ञापन पर रोक से कई कार्टून चैनलों की कमाई पर असर पड़ सकता है. इन चैनलों में पोगो और निकलोडियोन का नाम प्रमुख है. ऐसे कार्टून चैनलों की कमाई बच्चों से जुड़े विज्ञापनों से ही होती है. जैसे कैंडी, चॉकलेट और हेल्थ ड्रिंक्स के विज्ञापन.

मोटापा बन रहा खतरा

बच्चों में मोटापा सेहत के नजरिए से चुनौती बनता जा रहा है. मोटापा उन इलाकों में बड़ी समस्या है जहां पूर्व में अक्सर अकाल पड़ा करते थे. ऐसा माना जाता है कि अकाल वाले इलाकों में लोग खाना मिलने पर खूब खाते थे जिससे शरीर में चर्बी जमा होती गई. उनमें ज्यादा खाने वाला जीन अगली पीढ़ियों में ट्रांसफर होता चला गया. इसका असर अब बच्चों पर भी देखने में आ रहा है. जबकि भारत के जिन इलाकों में भूखमरी जैसी कोई समस्या नहीं थी, वहां मोटापा जैसी बीमारी का खतरा कम नजर आता है. ऐसे इलाकों में भोजन मौजूद होने पर भी लोग कम खाया करते थे. इससे उनमें चर्बी बढ़ने का खतरा पैदा नहीं हुआ.

मोबाइल, टीवी से बढ़ता मोटापा

बच्चे आजकल घर के बाहर की एक्टिविटी पर कम ध्यान देते हैं. पहले की तरह अब वे पार्क में खेलने-कूदने भी नहीं जाना चाहते. लिहाजा उनका ज्यादा समय मोबाइल फोन, टैबलेट, टीवी और वीडियो गेम पर बीत रहा है. इससे उनमें मोटापा का खतरा और बढ़ता जा रहा है.

(भाषा से इनपुट)

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