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होटलों या रेस्टोरेंट में सर्विस टैक्स चुकाना ग्राहक की मर्जी पर निर्भर

होटलों और रेस्टोरेंट्स में 5-20 फीसदी तक सर्विस चार्ज देना होता था. लेकिन सरकार के आदेश के बाद अब इसे देना जरूरी नहीं होगा

Updated On: Jan 02, 2017 07:20 PM IST

Manish Kumar Manish Kumar

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होटलों या रेस्टोरेंट में सर्विस टैक्स चुकाना ग्राहक की मर्जी पर निर्भर

नए साल में आम लोगों के लिए एक राहत भरी खबर आई है. अब से होटलों और रेस्टोरेंट्स में ग्राहकों को सर्विस चार्ज देना जरूरी नहीं होगा.

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश भर में रेस्टोरेंट ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूल रहे हैं.

मंत्रालय ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज देना पूरी तरह से वैकल्पिक है और ग्राहकों की मर्जी के बगैर इसे वसूला नहीं जा सकता है.

अभी तक होटलों और रेस्टोरेंट्स में 5 से लेकर 20 फीसदी तक सर्विस चार्ज देना होता था. लेकिन इस आदेश के बाद अब ये जरूरी नहीं होगा.

सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स में अंतर होता है. ग्राहक को सर्विस चार्ज के अलावा बिल पर 12.5 फीसदी वैट और 6 फीसदी सर्विस टैक्स भी चुकाना पड़ता है.

यह छूट सर्विस टैक्स पर नहीं बल्कि सर्विस चार्ज पर दी गई है. ऐसे में अब ग्राहक चाहे तो सर्विस चार्ज देने से इनकार कर सकता है.

पिछले कई महीनों से मंत्रालय को रेस्टोरेंट द्वारा जबरन सर्विस चार्ज वसूले जाने पर शिकायतें मिल रही थी. जिसमें टिप के ऐवज में रेस्टोरेंट 5 से लेकर 20 फीसदी तक सर्विस चार्ज ग्राहकों से वसूलने की बात कही जा रही थी. ग्राहकों को यह चार्ज रेस्टोरेंट में कैसी भी सर्विस मिलने पर देना पड़ रहा था.

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ग्राहकों की शिकायतों पर होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया से सफाई मांगी थी.

सरकार को लिखित जवाब में एसोसिएशन ने कहा कि, सर्विस चार्ज देना पूरी तरह से ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर है. होटल में दी गई सुविधा से ग्राहक संतुष्ट नहीं है तो वो इस चार्ज को बिल से हटाने के लिए कह सकता है.

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से अपील की है कि वो सर्विस चार्ज संबंधित कानून को व्यापक बनाने का प्रयास करें. जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस नियम के बारे में जान सकें.

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