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चार साल के अंतराल के बाद सरकार ने की गांधी पीस प्राइज के विजेताओं की घोषणा

गांधी पीस प्राइज उन लोगों और संस्थानों को दिया जाता है जो अहिंसा और अन्य गांधीवादी तरीकों से देश में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन लाने में अपना योगदान देते हैं

Updated On: Jan 17, 2019 01:46 PM IST

FP Staff

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चार साल के अंतराल के बाद सरकार ने की गांधी पीस प्राइज के विजेताओं की घोषणा

केंद्र सरकार ने बुधवार को साल 2015 से 2018 के बीच गांधी पीस प्राइज के लिए चुने गए विजेताओं के नाम की घोषणा की. पिछली बार साल 2014 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को यह सम्मान दिया गया था. इसके बाद से अब तक सरकार ने इस पुरस्कार से किसी को सम्मानित नहीं किया था.

गांधी पीस प्राइज उन लोगों और संस्थानों को दिया जाता है जो अहिंसा और अन्य गांधीवादी तरीकों से देश में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन लाने में अपना योगदान देते हैं.

एनडीटीवी के अनुसार सरकार ने साल 2015 के गांधी पीस प्राइज का विजेता कन्याकुमारी में ग्रामीण विकास और शिक्षा के लिए काम कर रहे विवेकानंद केंद्र को चुना है.

वहीं 2016 का यह पुरस्कार संयुक्त रूप से अक्षय पात्र फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल को दिया गया है.

अक्षय पात्र फाउंडेशन ने देशभर के बच्चों तक मिड-डे मील पहुंचाने में सराहनीय काम किया है. वहीं सुलभ इंटरनेशनल मैनुअल स्कैवेंजरों की मुक्ति के लिए काम करता है.

साल 2017 के लिए यह अवॉर्ड एकई अभियान ट्रस्ट को दिया गया है, जो ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा के लिए काम करता है. वहीं 'योहेई ससाकावा' को 2018 के गांधी पीस प्राइज से नवाजा गया है. योहेई ससाकावा कुष्ठरोग उन्मूलन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के गुडविल एंबेसडर हैं.

कब-कब और किसे दिया गया यह पुरस्कार

इन पुरस्कारों के विजेताओं का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लालकृष्ण आडवाणी और अन्य की ज्यूरी ने किया है. यह पुरस्कार देने की घोषणा महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के मौके पर वर्ष 1995 में हुई थी. पुरस्कार के तहत एक करोड़ रुपए, एक प्रशस्ति पत्र, एक बैज और हस्तशिल्प का एक आइटम दिया जाता है.

साल 2000 में यह पुरस्कार संयुक्त रूप से नेल्सन मंडेला और ग्रामीण बैंक ऑफ बांग्लादेश को दिया गया था.

2005- आर्कबिशप डेसमंड टूटू को इस अनार्ड से सम्मानित किया गया.

फिर 8 साल के अंतराल के बाद 2013 में चिपकू आंदोलन से जुड़े पर्यावरणवादी चांदी प्रसाद वादी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

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