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दार्जिलिंग: पुलिस और जीजेएम के बीच हुई झड़प में ASI की मौत

पुलिस ने बताया कि गुरुंग के दार्जिलिंग पहाड़ियों में पातलेबास के पास होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद वहां छापेमारी की गई थी

Bhasha Updated On: Oct 13, 2017 04:43 PM IST

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दार्जिलिंग: पुलिस और जीजेएम के बीच हुई झड़प में ASI की मौत

दार्जिलिंग पहाड़ियों के पास वन-क्षेत्र में सुरक्षा बलों की छापेमारी के बाद गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के प्रमुख बिमल गुरुंग के कथित समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में एक उप निरीक्षक की मौत हो गई और अन्य चार पुलिसकर्मियों घायल हो गए.

सुरक्षा बलों को संदेह था कि गुरूंग वहां छिपे हैं.

पुलिस ने बताया कि गुरुंग के दार्जिलिंग पहाड़ियों में पातलेबास के पास होने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद वहां छापेमारी की गई थी. गुरुंग के खिलाफ पिछले माह लुकआउट नोटिस जारी किया गया था.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सिद्दीनाथ गुप्ता ने बताया कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के समर्थक और गुरुंग के वफादारों ने पुलिस दल को रोकने के लिए उनपर गोलियां चला दी, जिससे पश्चिम बंगाल पुलिस के उप-निरीक्षक अमिताभ मलिक की गोली लगने से मौत हो गई और अन्य चार पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए.

जीजेएम ने पुलिस की गोलीबारी में अपने तीन समर्थकों के मारे जाने का दावा किया है. हालांकि पुलिस ने इसकी कोई पुष्टि नहीं की है.

पुलिस ने बताया कि मौके से छह एके-47 राइफल और एक 9एमएम पिस्तौल बरामद की गई है. झड़पें अभी जारी हैं.

पातलेबास के पास हुई झड़प

गुप्ता ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘हमने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है और छापेमारी जारी है.’ पुलिसकर्मियों का एक बड़ा दल मौके पर भेजा गया है क्योंकि बल को विश्वास है गुरुंग दार्जिलिंग में है और इसी इलाके में छिपे हैं.

जीजेएम, बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का सहयोगी दल है.

गुरुंग के वहां छिपे होने की खबर मिलने के बाद पुलिस के खोज दल ने आज सुबह पांच बजे पातलेबास के पास वन क्षेत्र में एक ठिकाने पर छापेमारी की जिसके बाद यह झड़प शुरू हुई. यह स्थान गुरुंग का गढ़ माना जाता है.

पुलिस ने बताया कि जब उनकी तलाश शुरू की गई तो कथित जीजेएम सर्मथकों ने उनपर गोलीबारी की और पत्थर फेंके.

अगस्त से, अपने खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम)अधिनियम के तहत कई मामले दर्ज होने के बाद गुरुंग छिपे हुए हैं. उनपर दार्जिलिंग और निकटवर्ती इलाकों में हुए कई विस्फोटों में संलिप्त होने का आरोप है.

पहाड़ियों में 104 दिन तक चला अनिश्चितकालीन बंद समाप्त होने के बाद यह पहली हिंसक घटना है. 26 सितंबर को गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अपील के बाद गुरुंग ने अनिश्चितकालीन बंद वापस ले लिया था.

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