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गोरखपुर ग्राउंड रिपोर्ट: 'मेरी बच्ची बार-बार पूछ रही थी, पापा मैं कब ठीक होउंगी'

गोरखपुर बहादुर कुशवाहा अपनी कहानी सुनाते हुए बेहद भावुक हो जाते हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Aug 18, 2017 11:23 AM IST

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गोरखपुर ग्राउंड रिपोर्ट: 'मेरी बच्ची बार-बार पूछ रही थी, पापा मैं कब ठीक होउंगी'

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 7 अगस्त से लेकर 16 अगस्त की दोपहर तक लगभग 112 बच्चों की मौतें हुई हैं. कॉलेज में हो रही लगातार मौतों को लेकर गोरखपुर के आसपास रहने वाले जिले को लोगों में दहशत है.

मेडिकल कॉलेज में जो मौतें हो रही हैं वह ज्यादातर 100 नंबर वार्ड के इंटेसिव केयर यूनिट में हो रही हैं. इस वार्ड में ज्यादातर बच्चे इंसेफेलाइटिस बुखार का इलाज कराते हैं.

पिछले 9 अगस्त की बात है. रात को 10 बजे थे. गोरखपुर के एकला नंबर वार्ड 2 के रहने वाले बहादुर निषाद ने अपनी चार साल की बच्ची को इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती कराई. आईसीयू के बगल वाले लॉन में दोनों तरफ लगभग 100 से भी ज्यादा परिजन जमीन पर लेटे थे. सभी के बच्चे इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती थे. सभी लोगों को अंदर से ये डर सता रहा था कि कहीं अंदर से मेरे बच्चे के नाम की आवाज तो नहीं आ रही है.

Gorakhpur Child Death

बहादुर निषाद जब बच्चे को अस्पताल ले कर आ रहे थे तो बच्ची बार-बार बोल रही थी कि पापा मैं कब ठीक हो जाऊंगी. मुझे मेला देखने जाना है. मुझे खिलौना खरीद दो.

बहादुर कुशवाहा बताते हैं कि बच्ची को भर्ती के बाद से ही मुझको बच्ची से मिलने नहीं दिया गया. बहादुर कुशवाहा रात से सुबह तक बच्ची से मिलने की बात करते रहे. लेकिन, अस्पताल प्रशासन ने मिलने नहीं दिया.

बहादुर कुशवाहा 10 तरीख को सुबह 9 बजे जब डॉक्टर से मिलने पहुंचे तो, डॉक्टर ने बहादुर कुशवाहा से पूछा कि गाड़ी लेकर आए हो? बच्चे को कैसे ले जाओगे ? बहादुर कुशवाहा हैरान ने होकर पूछा कि मेरी बच्ची तो ठीक है. इस पर डॉक्टर ने जवाब दिया कि बच्ची तुम्हारी तो खत्म हो गई.

बहादुर कुशवाहा जब बच्ची के पास पहुंचे तो उनके होश उड़ गए. बहादुर कुशवाहा का आरोप है कि उनकी बेटी का ठीक से इलाज नहीं किया गया. वो रोते हुए बताते हैं कि मैं रात को ही अपनी बेटी से मिलना चाहता था लेकिन डॉक्टरों ने मुझे मिलने नहीं दिया और सुबह में उसका मृत शरीर मुझे दे दिया गया.

बहादुर कुशवाहा जैसे ही कई और पिता भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज से अपने बच्चों के पार्थिव शरीर लेकर वापस लौटे हैं. गोरखपुर के खोराबार क्षेत्र के किशुन गुप्ता की भी कहानी कुछ ऐसी ही हैं. किशुन गुप्ता की बेटी की मौत 10 अगस्त की रात मेडिकल कॉलेज में हुई थी.

किशुन गुप्ता की बेटी की मौत भी 10 अगस्त को ऑक्सीजन सप्लाई रुकने की वजह से हुई थी. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी पिछले दिनों किशुन गुप्ता से मिलने उनके घर पहुंचे थे.

kishun gupta

किशुन गुप्ता

बीआरडी कॉलेज में ही एक बच्चे का इलाज करा रहे रामानुज श्रीवास्तव 9 तारीख की उस शाम को याद करते हुए कहते हैं, लगातार बच्चों को लेकर उनके माता-पिता बाहर जा रहे थे. जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज चारों तरफ सुनाई दे रही थी. ऐसा लग रहा था पूरे अस्पताल में मातम पसरा हुआ है. मृत बच्चों के शरीर देखकर हर कोई रो रहा था.

हमारी भी घबराहट बढ़ रही थी कि कहीं हमारे बच्चे के साथ तो कुछ न हुआ है. इंसेफेलाइटिस वार्ड पर तैनात गार्ड और पुलिस अंदर जाने नहीं दे रहे थे. साढ़े छह से आठ बजे के भीतर भीतर उसी वार्ड में लगभग पांच से सात बच्चों ने देखते-देखते दम तोड़ दिया. मैं और मेरी पत्नी बस भगवान को याद करते हुए समय काटने की कोशिश कर रहे हैं.

बहादुर कुशवाहा, किशुन गुप्ता जैसे और भी कई माता-पिता हैं जो अपने बच्चों को खो चुके हैं. लेकिन अस्पताल में अब भी सैंकड़ों की संख्या में इंसेफेलाइटिस के शिकार बच्चे भर्ती हैं. अस्पताल के बाहर आस लगाए बच्चों के अभिभावक जमीनों पर लेटे हुए दिखाई देते हैं. अब भी बच्चों की मौत का सिलसिला अनवरत जारी है. आईसीयू में एक-एक बेड पर दो से तीन नवजात बच्चों का इलाज किया जा रहा है. लाख राजनीति के बावजूद अस्पताल की स्थिति बेहतर होती नहीं दिख रही है.

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