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मशहूर कवयित्री कमला दास को गूगल ने डूडल बनाकर दी श्रद्धांजलि

कमला दास पैदा तो हिंदू परिवार में हुईं लेकिन 68 साल की उम्र में इस्लाम कबूल किया और तब से इन्हें कमला सुरैया के नाम से जाना जाने लगा

FP Staff Updated On: Feb 01, 2018 08:48 AM IST

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मशहूर कवयित्री कमला दास को गूगल ने डूडल बनाकर दी श्रद्धांजलि

आज गूगल का डूडल कमला दास के नाम है. कमला दास भारत की नामचीन कवयित्री और मलयालम लेखिका थीं. दास ने महिलाओं की सेक्सुअल जिंदगी और शादी-ब्याह से जुड़ी परेशानियों को अपनी रचनाओं में उकेरा. भारत के इतिहास में दास शायद पहिला लेखिका थीं जिन्होंने नारी विमर्श पर खुलकर बहुत कुछ लिखा.

कमला दास पैदा तो हिंदू परिवार में हुईं लेकिन 68 साल की उम्र में इस्लाम कबूल किया और तब से इन्हें कमला सुरैया के नाम से जाना जाने लगा.

केरल के त्रिचूर जिले में 31 मार्च 1934 को कमला दास का जन्म हुआ. मशहूर अखबार मातृभूमि के कार्यकारी संपादक वीएम नायर और नालापत बलमानी अम्मा के घर में इनका जन्म हुआ. बलमानी अम्मा खुद भी मलयाली कवयित्री थीं. दास का बचपन कलकत्ता में गुजरा जहां इनके पिता वॉलफोर्ड ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते थे. दास ने भी अपनी मां की तरह लिखना शुरू किया. इनके चाचा नालापत नारायण मेनन भी प्रसिद्ध लेखक थे जिनका असर कमला दास की जिंदगी पर पड़ा. कविताओं के प्रति दास का आकर्षण इतना बढ़ा कि बहुत कम उम्र से ही उन्होंने लिखने-पढ़ने का काम शुरू कर दिया.

15 साल की उम्र में दास की शादी माधव दास से हुई जो कि पेशे से बैंकर थे. उनके पति ने लिखने के लिए प्रेरित किया और आगे चलकर उनकी रचनाएं अंग्रेजी और मलयालम दोनों भाषाओं में छपने लगीं. सन 1976 में कमला दास ने अपनी आत्मकथा-माई स्टोरी रिलीज की. दास की रचनाएं हों या उनकी खुद की जिंदगी, उनमें एक खास तरह की दिलेरी देखी जाती है.

उत्तर औपनिवेशिक काल में कमला दास ने नारीवादी लेखकों में अपना अलग मुकाम हासिल किया. उनकी कई पुस्तकें ऐसी हैं जिसमें उन्होंने महिलाओं की समस्याओं को केंद्र में रख कर नारीवादी विषय उठाए. नतीजतन घरेलू और सेक्सुअल हिंसा से परेशान महिलाओं ने कमला दास को अपना आदर्श माना. कविता की दुनिया में दास के योगदान को देखते हुए देश ने उन्हें 'मदर ऑफ मॉडर्न इंडियन इंग्लिश पोएट्री' से नवाजा. दास की रचनाएं आज भी महिलाओं के लिए आदर्श साबित हो रही हैं.

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