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गॉडमैन टू टाइकून : सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया योग गुरु बाबा रामदेव को नोटिस, जनवरी 2019 में होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में योग गुरु पर लिखी गई किताब 'गॉडमैन टू टाइकून : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ बाबा रामदेव' के बिक्री एवं प्रकाशन पर रोक लगाई है

Updated On: Nov 30, 2018 01:08 PM IST

FP Staff

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गॉडमैन टू टाइकून : सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया योग गुरु बाबा रामदेव को नोटिस, जनवरी 2019 में होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार यानी आज योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश की चुनौती देने वाली एक याचिका पर दिया है. बता दें कि हाई कोर्ट ने अपने आदेश में योग गुरु पर लिखी गई किताब 'गॉडमैन टू टाइकून : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ बाबा रामदेव' के बिक्री एवं प्रकाशन पर रोक लगाई है. इस किताब में कथित रूप से रामदेव के जीवन के बारे में अपमानजनक बातें लिखी गई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2019 के लिए स्थगित कर दी है.

किताब के प्रकाशन व बिक्री पर 4 अगस्त 2017 को रोक लगा दी गई थी

कोर्ट ने यह निर्देश बाबा रामदेव की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया था. जस्टिस अनु मल्होत्रा ने अपने फैसले में कहा कि विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभिप्राय किसी के प्रति आपत्तिजनक विचार व्यक्त करना नहीं है. निचली अदालत ने अप्रैल 2018 में किताब के प्रकाशन व बिक्री पर लगी रोक हटा ली थी. इस फैसले को रामदेव ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. किताब के प्रकाशन व बिक्री पर चार अगस्त 2017 को रोक लगा दी गई थी.

इन तथ्यों के संबंध में विवाद निचली अदालत में अभी विचाराधीन है

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि बाबा रामदेव बेशक एक गणमान्य व्यक्ति हैं लेकिन एक आदमी की तरह उन्हें भी सम्मान व सामाजिक साख का अधिकार है. किताब के कुछ अंशों में उन्हें एक खलनायक के रूप में पेश किया गया है लेकिन, जब तक वह तथ्य कोर्ट में साबित नहीं हो जाता है, उसे प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इन तथ्यों के संबंध में विवाद निचली अदालत में अभी विचाराधीन है.

बाबा रामदेव के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर इस समय वह तथ्य किताब से नहीं हटाए गए तो उससे बाबा रामदेव की साख को अपूर्णीय क्षति होगी. कोर्ट ने स्वामी शंकर देव के गायब होने व स्वामी योगानंद की हत्या से जुड़े तथ्य किताब से हटाने का निर्देश दिया है क्योंकि इस बाबत बाबा रामदेव के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं. हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि निचली अदालत इन दोनों मामलों में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर चुकी है.

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