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किताब में गोधरा कांड ने मचाया बवाल, पीएम मोदी की छवि खराब करने को लेकर 4 लोगों पर दर्ज हुई FIR

किताब में गोधरा कांड के बारे में कहा गया है कि 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगो के समय नरेंद्र मोदी गुजरात सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, वहीं मोदी समर्थकों का कहना है कि छात्रों को उनके प्रधानंमत्री के बारे में गलत जानकारी दी गई है

Updated On: Sep 24, 2018 10:59 AM IST

FP Staff

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किताब में गोधरा कांड ने मचाया बवाल, पीएम मोदी की छवि खराब करने को लेकर 4 लोगों पर दर्ज हुई FIR

गोधरा कांड ने इस बार एक और नया मोड़ लिया है लेकिन एक नए रूप में. दरअसल असम के एक जाने माने प्रकाशक और 3 लेखकों पर कक्षा 12वीं की किताब में लिखे गए गोधरा कांड को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक असम स्टेट बोर्ड की कक्षा 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की किताब में गोधरा कांड के बारे में गलत जानकारी दी गई है. सूत्रों के अनुसार किताब में गोधरा कांड के बारे में कहा गया है कि साल 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगो के समय नरेंद्र मोदी गुजरात सरकार का नेतृत्व कर रहे थे. वहीं मोदी समर्थकों का कहना है कि छात्रों को उनके प्रधानंमत्री के बारे में गलत जानकारी दी गई है.

तीन लेखकों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

आपको बता दें कि 390 पन्नों की उस किताब को गुवाहाटी स्थित असम बुक डिपो ने प्रकाशित किया है. उस किताब की विषयवस्तु एनसीईआरटी द्वारा दी गई है जिसे असम हाईयर सेकेंडरी एजुकेशनल काउंसिल साल 2011 से फॉलो कर रहा है. असम बुक डिपो राज्य का करीब 90 साल पुराना और जाना माना प्रकाशन हाउस है. जिन तीन लेखकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है उनमें गुवाहाटी के आर्य विद्यापीठ कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस विभाग से रिटायर हुए एचओडी दुर्गाकांत शर्मा, गोआलपाड़ा कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस विभाग से रिटायर हुए एचओडी रफीख जमान और मिर्जा इलाके के डीके कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस विभाग के एचओडी मानस प्रतीम बरुआ का नाम शामिल है. इनमें से दुर्गाकांत शर्मा की कुछ वर्ष पहले ही मौत हो चुकी है.

असम बुक डिपो के खिलाफ भी दर्ज हुई FIR

असम बुक डिपो और इन तीनों लेखकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 505 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. आपको बता दें कि इस किताब के एक चैप्टर में Godhra Incident and Anti-Muslim Riot in Gujarat का जिक्र है. इस किताब के 376 नंबर पन्ने पर लिखा है कि इस हादसे में रेल का एक पूरा कोच जल गया था जिसमें मौजूद 57 यात्रियों (महिला और बच्चे समेत) की मौत हो गई थी. इस घटना के पीछे मुस्लिमों का हाथ है इस बात पर शक कर दूसरे ही दिन गुजरात के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले मुसलमान लोगों पर हमला कर दिया गया था.

किताब में साफ तौर पर लिखा गया पीएम मोदी का नाम

यह दंगा करीब एक महीने तक चला था और इसमें हजारों लोगों की जान गई थी. जिनकी जान गई उसमें ज्यादातर लोग मुस्लिम थे. किताब में लिखा है कि उस समय गुजरात सरकार का नेतृत्व नरेंद्र मोदी कर रहे थे और वह मूक दर्शक बने हुए थे. वहीं कुछ लोगों का तो यह कहना था कि राज्य प्रशासन के कुछ लोगों ने ही उस समय मुस्लिमों को मारने में हिंदुओं की मदद की थी. आपको बता दें कि एनसीईआरटी की किताब में भी गोधरा कांड का जिक्र है पर उसमें नरेंद्र मोदी के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है जबिक असम बुक डिपो की प्रकाशित इस किताब में मोदी का नाम साफ साफ लिखा गया है.

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