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महिला दिवस: यार लड़कियो! लड़कों से क्यों बराबरी, कुछ बड़ा सोचो ना

'तुम हर बात में हमसे अव्वल हो इसलिए प्लीज खालिस लड़कियों जैसी ही रहो, हमारे जैसे मत बनो'

Updated On: Mar 08, 2017 05:08 PM IST

Nikhil Sachan

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महिला दिवस: यार लड़कियो! लड़कों से क्यों बराबरी, कुछ बड़ा सोचो ना

यार लड़कियों ! सुनो. तुम न ! लड़कों से बराबरी करने की कोशिश भी मत करना. इसलिए नहीं, क्योंकि तुम लड़कों की बराबरी कर नहीं सकती, बल्कि इसलिए, क्योंकि तुम हम लड़कों से बहुत बेहतर हो.

और ये सिर्फ मैं इसलिए नहीं कह रहा क्योंकि आज 8 मार्च है. ऐसा साइंस कहता है. स्टैट्स कहते हैं और तमाम हजार साल का इंसानी तजुर्बा कहता है.

तुम से धड़कता है दिल

इसलिए मेरी तुमसे गुजारिश है कि यार प्लीज ! तुम हम लड़कों जैसा बनकर दुनिया को कम-काबिल और ज्यादा-बोरिंग मत बना देना.

साइंस और स्टैट्स की बात करें? तुम्हें मालूम भी नहीं होगा कि तुम्हारा दिल लड़कों से अधिक तेज धड़कता है.

हर मिनट पूरे 8 बीट्स अधिक. मिनट में 78 बार. शायद इसीलिए तुम हम लड़कों से अधिक प्यारी और दिलकश होती हो.

पास से गुजर जाती हो तो हमारा दिल धक से हो जाता है. शायद इसीलिए हम तुमसे 8 बीट्स कम रह जाते हैं.

तुमने उड़ाये होश हैं 

जानती हो? दसवीं और बारहवीं में लडकियां हर इक साल लड़कों से बेहतर ग्रेड्स लाती हैं. ये स्टैट्स सिर्फ हमारे देश का ही नहीं है. दुनिया भर का है.

गर अब जो कोई तुम्हारे IQ का मजाक उड़ाए या फिर ये कहे कि लडकियां खराब ड्राइवर होती हैं तो ये फैक्ट उसके मुह पर मारना.

यहां तक कि तुम्हें देखकर ड्राइविंग तो हम भूल जाते हैं. गर जो कभी सिग्नल पर तुम दिख जाती हो..you drive us Crazy

तुमसे मेच्योर कौन है?

साइंस कहता है कि लड़कियां लड़कों से जल्दी और कम उम्र में चलना-बोलना सीख जाती हैं. जहां एक लड़की का दिमाग दस साल में मच्योर हो जाता है, वहीं लड़कों का दिमाग 15 से 20 साल में मच्योर हो पाता है.

तुम एक मिनट में 250 शब्द बोल सकती हो और हम लड़के महज 150. तुम इतनी एक्सप्रेसिव कैसे हो यार. और बोलती भी कितना प्यारा हो. हम तो जैसे सब छिपा जाते हैं, रोते भी नहीं हैं, दिल में इतना भर लेते हैं कि दिल काठ का हो जाता है. निष्ठुर हो जाता है

तुम गढ़ती हो दुनिया

तुम एक नए इंसान को भी गढ़ती हो, मां बन कर कितने प्यार से हमें पालती-पोसती हो. खयाल रखती हो. हम तो यार खुद का भी ध्यान रख लें, तो बहुत है. पिछले महीने जो ज़ुराबें खोई थीं, वो आज तक नहीं मिलीं.

इसीलिए यार, तुम हमारे जैसी होने की कोशिश बिलकुल भी मत करना. तुम ऐसी ही प्यारी, मजबूत और काबिल रहना.

थोड़ी पगली सी, बहुत सारी केयरिंग सी, थोड़ी मूडी सी, बेइंतहा खूबसूरत सी. और बिलकुल लड़कियों सी. रहना...ऐसी ही.

एकदम. ऐसी ही. खालिस लड़कियों सी.

(निखिल सचान की फेसबुक वॉल से)

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