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अभिभावकों के विरोध के खिलाफ गाजियाबाद के 128 पब्लिक स्कूल आज हैं बंद

स्कूल संचालक इस मामले में गुरुवार को डीएम को ज्ञापन भी देंगे

FP Staff Updated On: May 04, 2017 11:27 AM IST

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अभिभावकों के विरोध के खिलाफ गाजियाबाद के 128 पब्लिक स्कूल आज हैं बंद

यूपी के सीबीएसई संचालित स्कूलों में अभिभावकों के विरोध प्रदर्शन और राज्य और जिला प्रशासन के सख्त रवैये के विरोध में सीबीएसई स्कूल संचालक संगठन के लोग भी अब मैदान में उतर गए हैं.

इसी सिलसिले में गुरुवार को गाजियाबाद के सभी सीबीएसई स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया गया है.

यह फैसला इंडिपेंडेंट स्कूल्स फेडरेशन ऑफ इंडिया डिस्ट्रिक्ट की बुधवार को हुई बैठक में लिया गया. स्कूल संचालक इस मामले में गुरुवार को डीएम को ज्ञापन भी देंगे.

लेकिन दूसरी तरफ अभिभावकों ने स्कूल के इस कदम को मनमानी बताया है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि जो भी स्कूल प्रशासन के आदेशों को नहीं मानते हैं सरकार को उनका अधिग्रहण कर लेना चाहिए.

हिंदी न्यूज वेबसाइट दैनिक जागरण में छपी खबर के अनुसार इंडिपेंडेंट स्कूल्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (गाजियाबाद) की बैठक बुधवार को सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में हुई.

बैठक में फेडरेशन के जिलाध्यक्ष सुभाष जैन ने आरोप लगाया कि स्कूलों की जांच के लिए प्रशासन की ओर से जो कमिटी बनाई गई है वह सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के विरुद्ध बनाई गई है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निजी शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थान के खर्चों के अनुसार फीस तय करने का अधिकार है.

गाजियाबाद के सभी स्कूल गुरुवार को बंद रहेंगे

गाजियाबाद के सभी स्कूल गुरुवार को बंद रहेंगे

टैक्स में छूट नहीं

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी 11 जुलाई 2014 को दिए अपने फैसले में निजी स्कूलों को सही ठहराते हुए शासनादेश के आधार पर तत्कालीन डीएम की ओर से जारी निर्देशों पर रोक लगा दी थी.

सभी स्कूल सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं और रीजनेबल सरप्लस के आधार पर ही स्कूलों को चलाया जा रहा है.

निजी स्कूलों को न तो किसी प्रकार की कोई मदद मिलती है और न ही किसी प्रकार की छूट मिलती है. उन पर सभी टैक्स कमर्शिल ही लगाए जाते हैं.

स्कूलों की आमदनी से जुड़ी पूरी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास जाता है. ऐसे में अगर कोई भी स्कूल कुछ गलत करता है तो वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की पकड़ में जरूरत आता.

स्कूल फेडरेशन के सदस्यों का कहना है कि वे लोग फीस नियम के अनुसार ही बढ़ा रहे हैं इसीलिए पेरेंट्स उसका विरोध नहीं कर रहे. जो लोग विरोध कर रहे हैं वो ऐसा अपनी नेतागिरी चमकाने और निजी फायदे के लिए कर रहे हैं.

इन लोगों की शिकायत पर जिला प्रशासन ने स्कूलों के खिलाफ 7-7 कमेटियां बना दीं और उनसे हर छोटे-छोटे मुद्दे पर जवाब मांगा जाने लगा.

जिसके विरोध में इन लोगों ने गुरुवार 4 मई को सांकेतिक रूप से स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है.

इस मसले पर दोनों पक्ष अदालत की शरण में गए हैं

इस मसले पर दोनों पक्ष अदालत की शरण में गए हैं

कोर्ट में अपील

सुभाष जैन ने हिंदी न्यूज वेबसाइट नवभारत टाइम्स को बताया कि उनका फेडरेशन इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में अपील करने भी जा रही है. मंगलवार को एडीएम फाइनेंस को ज्ञापन सौंपकर उन्हें इस बात की जानकारी भी दे दी गई है.

ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के विरुद्ध बनाई गई जांच समिति के विरोध में वे लोग हाईकोर्ट में अपील करने जा रहे हैं. जब तक कोई आदेश नहीं आ जाता तब तक कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.

अगर ऐसा होता है तो यह कोर्ट के आदेश की अवमानना होगी.

वहीं, दूसरी ओर शिक्षा बचाओ अभियान के संयोजक और बीएसपी नेता सतपाल चौधरी का कहना है कि प्राइवेट स्कूल संचालकों की 4 मई को हड़ताल गैर कानूनी है.

उनका कहना है कि प्रशासन स्कूल संचालकों की जांच कर रहा है तो उनके संचालकों को इसमें सहयोग करने की बजाय इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ने हड़ताल की घोषणा की है.

उनका कहना है कि जिस प्रकार एक सड़क के लिए किसानों की पुश्तैनी जमीन का सरकार अधिग्रहण कर सकती है तो शिक्षा जैसे राष्ट्र निर्माण के लिए स्कूल भवनों का अधिग्रहण क्यों नहीं किया जा सकता.

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