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भारत-वियतनाम संबंध के बहाने राम माधव ने साधा चीन पर निशाना

राम माधव ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र की भूराजनीति के कारण नव उपनिवेशवाद की संभावना दिख रही है

Bhasha Updated On: Jul 03, 2017 07:30 PM IST

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भारत-वियतनाम संबंध के बहाने राम माधव ने साधा चीन पर निशाना

बीजेपी के वरिष्ठ नेता राम माधव ने सोमवार को कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र की भूराजनीति के कारण नव उपनिवेशवाद की संभावना दिख रही है और कुछ देश धन, बाजार और सैन्य ताकत के जरिए अपना प्रभाव स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं.

'भारत वियतनाम संबंधों के उभरते आयाम' विषय पर व्याख्यान में राम माधव ने कहा, 'हम उपनिवेशवाद की बुराइयों को जानते हैं. ये हमारे मस्तिष्क में ताजा हैं.' इंडिया फाउंडेशन से जुड़े राम माधव ने कहा, 'हमारे लिए यह जरूरी है कि हम यह सुनिश्चित करें कि उस उपनिवेशवाद का 21वीं सदी का प्रारूप हमें परेशान नहीं करे और सफल नहीं होने पाए.'

इशारे में किया चीन के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान 

माधव की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब चीन की ओर से दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर दावा किया जा रहा है, जिन पर वियतनाम, दक्षिणपूर्व और पूर्वी एशियाई देशों के दावे भी रहे हैं .

राम माधव ने वियतनाम और भारत की ओर से संयुक्त और स्वतंत्र रूप से मिलकर ऐसी ताकतों और चलन को परास्त करने की वकालत की .

उन्होंने कहा कि हिंद महासागर की भू राजनीति ने नव उपनिवेशवाद की संभावना को बल दिया है और कुछ देश धन, बाजार और सैन्य ताकत के जरिए प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं.

माधव की टिप्पणी को सिक्किम के पास डोक लाम क्षेत्र में चीन और भारतीय सैनिकों की तनातनी के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है .

भारत के दक्षिण चीन सागर में वाणिज्यिक हित जुड़े हुए हैं जो समुद्र के रास्ते महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. राम माधव ने कहा कि भारत प्रशांत क्षेत्र में नए वैश्विक पावरहाउस के रूप में उभर कर सामने आया है. वैश्विक शक्ति की धुरी प्रशांत एटलांटिक से हस्तांतरित होकर इस क्षेत्र में आ गई है.

उन्होंने कहा कि लेकिन यह क्षेत्र बड़ी सैन्य शक्तियों का केंद्र बन गया है जिनके व्यापक रक्षा बजट सैन्य गतिविधियों और खरीद को बढ़ा रहे हैं. ऐसा अनुमान व्यक्त किया गया है कि 2025 तक विश्व की आधी पनडुब्बियां और युद्धपोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में होंगे.

बीजेपी नेता ने कहा कि ऐसी स्थितियों में भारत और वियतनाम को साथ आना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और भावनाओं की रक्षा की जा सके और नौवहन कानून का सम्मान हो.

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