S M L

गंगा-यमुना को ‘जीवित इंसान' का दर्जा, वैसे ही होंगे अधिकार

गंगा और यमुना के साथ एक ‘जीवित मानव’ की तरह व्यवहार किए जाने का आदेश

Updated On: Mar 21, 2017 08:38 AM IST

Bhasha

0
गंगा-यमुना को ‘जीवित इंसान' का दर्जा, वैसे ही होंगे अधिकार

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में देश की दो पवित्र नदियों गंगा ओैर यमुना को ‘जीवित' का दर्जा देने का आदेश दिया है.

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एक खंडपीठ ने अपने आदेश में दोनों पवित्र नदियों गंगा और यमुना के साथ एक ‘जीवित मानव’ की तरह व्यवहार किए जाने का आदेश दिया.

अधिवक्ता एमसी पंत की दलीलों से सहमति व्यक्त करते हुए अदालत ने इस संबंध में न्यूजीलैंड की वानकुई नदी का भी उदाहरण दिया जिसे इस तरह का दर्जा दिया गया है.

हरिद्वार निवासी मोहम्मद सलीम द्वारा दायर की गयी एक जनहित याचिका पर दिये इस आदेश में अदालत ने देहरादून के जिलाधिकारी को ढकरानी में गंगा की शक्ति नहर से अगले 72 घंटों में अतिक्रमण हटाने के भी आदेश दिए हैं और कहा है कि इसका अनुपालन न होने की स्थिति में उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा.

याचिका में दलील दी गयी थी कि इन पवित्र नदियों से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों राज्य जुड़े हुए हैं लेकिन फिर भी इनकी सहायक नदियों की संपत्ति का प्रभावी वितरण नहीं हो पाया है.

अदालत ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच उत्तराखंड के अलग प्रदेश बनने के बाद से लंबित विभिन्न संपत्तियों के बंटवारे को भी सुलझाने के आदेश दिए.

हाई कोर्ट ने सरकार को अदालत द्वारा पिछले साल दिसंबर में दिए गए आदेश के अनुसार अगले आठ सप्ताह के अंदर गंगा प्रबंधन बोर्ड गठित करने के भी निर्देश दिए.

गंगा और यमुना को एक जीवित मानव की तरह का कानूनी दर्जा देते हुए अदालत ने नमामि गंगे मिशन के निदेशक, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और उत्तराखंड के महाधिवक्ता को नदियों के कानूनी अभिभावक होने के निर्देश दिए हैं और उन्हे गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों की सुरक्षा करने और उनके संरक्षण के लिये एक मानवीय चेहरे की तरह कार्य करने को कहा है.

ये अधिकारी गंगा और यमुना के जीवित मानव का दर्जे को बरकरार रखने तथा इन नदियों के स्वास्थ्य और कुशलता को बढावा देने के लिए बाध्य होंगे.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi