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Ganesh Visarjan 2018: देशभर में आज हो रहा है बप्पा का विसर्जन, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

विसर्जन के लिए जाते वक्त पूरे रास्ते भक्त नाचते गाते हैं, भक्ति गीतों से गणपति को खुश किया जाता है, रंग-बिरंगे अबीर उड़ाए जाते हैं, फूलों से होली खेली जाती है

Updated On: Sep 23, 2018 10:40 AM IST

FP Staff

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Ganesh Visarjan 2018: देशभर में आज हो रहा है बप्पा का विसर्जन, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

अनंत चतुर्दशी के दिन श्री गणेश प्रतिमा का विसर्जन होता है. आज अनंत चतुर्दशी है और इसी दिन बप्पा वापस अपने घर जाने के लिए तैयार हैं. दस दिन तक अपने भक्त के घर में विराजमान होने के बाद गणपति अपने घर वापस चले जाते हैं और पुनः अगले वर्ष गणेश चतुर्थी के दिन आ जाते हैं. उनके विसर्जन से पहले पूरे विधि विधान के साथ उनकी पूजा अर्चना की जाती है. गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जन के लिए उठाने से पहले उनकी अराधना की जाती है. उन्हें पुष्प अर्पित किया जाता है. मोदक का भोग लगता है. दूर्वा चढ़ाई जाती है. इसके बाद भगवान गणेश जी की दिव्य आरती होती है और फिर उनको अबीर और गुलाल के साथ विदाई गीत गाते हुए विदा किया जाता है. दस दिन तक भक्तों का कल्याण करने वाले और संकटों का नाश करने वाले विध्नहर्ता विनायक के विदा होने के अवसर पर जहां एक तरफ भक्तों की आंखों में आंसू होते हैं वहीं जुबान पर भक्ति गीत भी होते हैं.

रास्ते में उड़ाए जाते हैं रंग-बिरंगे अबीर

विसर्जन के लिए जाते वक्त पूरे रास्ते भक्त नाचते गाते हैं. भक्ति गीतों से गणपति को खुश किया जाता है. रंग-बिरंगे अबीर उड़ाए जाते हैं. फूलों से होली खेली जाती है. लोग एक दूसरे से गले मिलते हैं. सब भेद भाव को भुलाते हुए भाई चारे के साथ यह पर्व लोगों को एक सूत्र में बंधकर रहने और राष्ट्रवाद का संदेश देता है. रास्ते में प्रसाद का वितरण भी होता रहता है. कई लोग भक्तों को शीतल जल पिलाते रहते हैं. फलों और लड्डू का प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है. अंत में नदी या जलाशय में प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है. मुंबई में गणेश विसर्जन की एक अलग ही छवि देखने को मिलती है. विसर्जन देखने के हजारों लोगों की भीड़ लगी होती है. लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस की व्यवस्था भी दुरुस्त रहती है. यहां बप्पा को समुद्र में विसर्जित किया जाता है. विसर्जन के बाद लोगों में मोदक का प्रसाद बांटा जाता है.

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त दिनांक 23 सितम्बर 2018 को प्रातः 8 बजे से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक चलेगा. इसके बाद फिर दोपहर 2 बजे से शुरू होकर 3.30 बजे तक और फिर शाम 6 बजकर 30 मिनट से रात 11 बजे तक चलेगा.

विसर्जन के समय न करें ये काम विसर्जन के समय कोई भी चीज प्रतिमा से अलग न करें, चाहे वो प्रतिमा पर अर्पित कोई मूल्यवान वस्त्र या आभूषण ही क्यों ना हो. इस प्रकार प्रतिमा का विसर्जन करके भक्त अपने घरों को वापस लौट जाते हैं.

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