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व्यापमं घोटाले में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के 47 छात्र बर्खास्त

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों छात्रों को बर्खास्त करने के निर्देश दिए थे जिसके तहत यह कार्रवाई हुई

Updated On: Mar 31, 2017 08:14 PM IST

IANS

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व्यापमं घोटाले में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के 47 छात्र बर्खास्त

व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा आयोजित पीएमटी के जरिए गड़बड़ी कर गांधी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन पाने वाले 47 छात्रों को बर्खास्त कर दिया गया है. इन छात्रों ने साल 2008 से 2012 के बीच मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लिए थे.

कॉलेज के डीन डॉ एम.सी सनगोरा ने शुक्रवार को बताया कि पीएमटी एडमिशन में हुई गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर 47 छात्रों को गुरुवार को बर्खास्त किया गया.

बर्खास्त छात्रों की सूची जारी कर दी गई है. वैसे ये छात्र लंबे समय से कॉलेजों से बाहर ही थे, क्योंकि वे पिछले कई सालों से संदिग्ध रहे हैं.

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दो छात्रों को छोड़कर किसी ने पढ़ाई पूरी नहीं की 

सनगोरा ने आगे बताया कि इन छात्रों ने साल 2008 से 2012 के बीच एडमिशन लिए थे, मगर दो छात्रों को छोड़कर किसी की भी पढ़ाई पूरी नहीं हुई है.

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ज्यादातर छात्र पहले-दूसरे सेमेस्टर से ही आगे नहीं निकले और उन्हें व्यापम और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अपनी जांच में संदिग्ध पाते हुए कॉलेजो से निकाल दिया था. तेरह छात्रों ने कोर्ट से स्थगन पाया था, उनमें से दो ने पढ़ाई पूरी कर ली और वे इंटर्नशिप कर रहे हैं.

साल 2013 में व्यापम घोटाले का खुलासा होने के बाद बड़ी संख्या में पीएमटी में गड़बड़ियां सामने आई थीं. इस मामले की जांच एसटीएफ ने की तो इन छात्रों को दोषी पाया गया जिसकी एफआईआर भोपाल के कोह-ए-फिजा थाने में दर्ज कराई गई थी. उसके बाद इन छात्रों के दाखिले रद्द कर दिए गए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों छात्रों को बर्खास्त करने के निर्देश दिए थे, उसी के तहत यह कार्रवाई हुई है.

क्या है व्यापमं घोटाला ?

व्यापमं घोटाले को देश के शिक्षा जगत के सबसे बड़े घोटाले के तौर पर जाना जाता है. मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) स्वायत्ता प्राप्त संस्था है. इसका गठन 70 के दशक में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए परीक्षाएं आयोजित करने के लिए किया गया था.

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शिवराज सिंह सरकार की सिफारिश पर सीबीआई व्यापमं घोटाले की जांच कर रही है

2013 से पहले तक इस संस्था की विश्वसनीयता पर कोई सवाल खड़ा नहीं हुआ. लेकिन फिर एक के बाद एक घोटाले सामने आते गए जिससे इसकी साख को गहरा धक्का पहुंचा.

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व्यापमं घोटाला पर्दाफाश होने के बाद इससे जुड़े कई आरोपियों और गवाहों की एक-एक कर संदिग्ध हालत में मौत ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. सरकारी दावे के अनुसार व्यापमं घोटाले से जुड़े 34 लोगों की मौत हुई है. जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का आरोप है कि 50 से अधिक आरोपियों और गवाहों की मौत हुई . सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की जांच सीबीआई कर रही है.

एफआईआर मेडिकल परीक्षा के अलावा टीचर, कॉन्स्टेबल, फूड इंस्पेक्टर, फॉरेस्ट गार्ड आदि परीक्षाओं में गड़बड़ी से संबधित हैं. एक ही घोटाले में इतनी बड़ी संख्या में एफआईआर सीबीआई ने इससे पहले बिहार के चारा घोटाले में ही दर्ज की थीं.

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