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इन 5 नक्सलियों की पहचान बताओ और 60 लाख तक का इनाम पाओ

पुलिस की ओर से एक पोस्टर जारी किया गया है, जिसमें पांच नक्सलियों के नाम और उन पर लाखों रुपए के इनाम की घोषणा की गई है

FP Staff Updated On: May 03, 2018 11:02 AM IST

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इन 5 नक्सलियों की पहचान बताओ और 60 लाख तक का इनाम पाओ

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है. पुलिस की ओर से एक पोस्टर जारी किया गया है, जिसमें पांच नक्सलियों के नाम और उन पर लाखों रुपए के इनाम की घोषणा की गई है. इन पांचों नक्सलियों पर 16 लाख से लेकर 60 लाख रुपए तक का ईनाम है.

पोस्टर में लिखा गया है कि ये पांच नक्सली कई अपराधों में शामिल रहे हैं. ये सभी प्रतिबंधित ऑर्गनाइजेशन- CPI (Maoist) के सदस्य हैं. ये राज्य विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं. साथ ही इन लोगों ने हजारों मासूम आदिवासियों की हत्या भी की है. ऐसे में इन्हें पकड़ने में पुलिस विभाग की मदद करें. अगर आपकी सूचना की मदद से ये पकड़े जाते हैं या पुलिस फायरिंग में इनकी मौत होती है, तो आपको इनाम दिया जाएगा. आपका नाम और पहचान को गोपनीय रखा जाएगा.

आप इन नक्सलियों की जानकारी 07132-222348, 9421699808, 7218878172 पर फोन कर दे सकते हैं. साथ ही आप गढ़चिरौली के एसपी ऑफिस जाकर भी जानकारी दे सकते हैं.

ये हैं वो पांच नक्सली

- मालोजूला वेणुगोपाल उर्फ- भूपति/सोनू/विवेक/लक्ष्मीनारायण/लच्छना अभय (60 लाख रुपए का इनाम)

- दीपक उर्फ- मिलिंग/प्रवीन/अरुण/सुधीर/सह्यादारी तेलतुमबड़े (50 लाख रुपए का इनाम)

- नारमादक्का उर्फ अल्लूरी ऊषारानी किरनकुमार (25 लाख रुपए का इनाम)

- जोगन्ना उर्फ- घीसू/चिमाला नरसैया (20 लाख रुपए का इनाम)

- पहाड़सिंह उर्फ- अशोक/टीपू सुल्तान/कुमारसाईं कतलामी/बाबूराव तोफा (16 लाख रुपए का इनाम)

prize on naxal

इससे पहले गढ़चिरौली के जिला कलेक्टर शेखर सिंह ने पिछले महीने हुई उन दो मुठभेड़ों की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं जिनमें 40 नक्सली मारे गए थे. एक अधिकारी ने बताया कि दोनों मुठभेड़ 22 और 23 अप्रैल को हुई थीं जिनमें क्रमश: 34 और 6 नक्सली मारे गए थे. सिंह ने बताया कि आपराधिक दंड संहिता की धारा 176 के प्रावधान के अनुसार जांच के आदेश दिए गए हैं.

एक अन्य अधिकारी ने बताया 'मुठभेड़ एटापल्ली और अहेरी तहसीलों में हुई थीं. दोनों तहसीलों के उप संभागीय मजिस्ट्रेट जांच करेंगे और अपनी अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे. मुठभेड़ के बाद यह नियमित प्रक्रिया है.' जांच इन आरोपों की पृष्ठभूमि में की जाएगी कि सुरक्षा बलों ने खाने में जहरीली चीज मिला कर 'बेकसूर ग्रामीणों' को मार डाला. नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए कहा है कि दोनों ही मुठभेड़ों में एक भी जवान घायल नहीं हुआ.

सीपीआई (एमएल) लिबरेशन ने मुठभेड़ों की न्यायिक जांच की मांग की है. प्रख्यात तेलुगू लेखक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता वरवरा राव ने मुठभेड़ों की सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने की मांग की है.

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