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कृष्णा कुमारी: जोधपुर की राजमाता से सांसद तक... जनता ने जिन्हें सिर आंखों पर बिठाया

राजमाता वैसे तो कई दिनों से बीमार चल रही थीं, लेकिन इस बात की खबर उन्होंने जनता तक नहीं पहुंचने दी

Updated On: Jul 03, 2018 03:49 PM IST

Sudhanshu Gaur

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कृष्णा कुमारी: जोधपुर की राजमाता से सांसद तक... जनता ने जिन्हें सिर आंखों पर बिठाया
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जोधपुर के मारवाड़ राजघराने की पूर्व राजमाता और जोधपुर से ही सांसद रहीं कृष्णा कुमारी का सोमवार देर रात को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. बताया जा रहा है कि उन्हें देर रात अचानक दिल का दौरा आया था, जिसके बाद उन्हें शहर के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कहा जा रहा है कि उनकी सेहत में पहले सुधार था, लेकिन अचानक उनके शरीर के अंगो ने काम करना बंद कर दिया और उन्हें मौत की गहरी नींद में सुला दिया.

पूरे जोधपुर को मानती थी अपना परिवार

राजमाता कृष्णा कुमारी पूरे जोधपुर को अपने परिवार का हिस्सा मानती थीं. कहा जाता है कि राजस्थान में महिलाओं को दुत्कारा जाता है लेकिन यहां यह बात गलत साबित होती थी. राजमाता का महल शहर के बाहर है. जब तक वो स्वस्थ थीं, तब तक वो खुद लगभग रोज ही शहर की महिलाओं से मिलने आती थीं. उनकी समस्याओं को सुनती थीं और उनके निवारण की हर संभव कोशिश किया करती थीं. लेकिन ढलती उम्र के साथ-साथ उनका चलना-फिरना मुश्किल होने लगा तो लगा कि उनका इस तरह से महिलाओं से मिलने का सिलसिला टूट जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने महिलाओं को मिलने के लिए अपने घर पर ही बुलाना शुरू कर दिया. वो उन्हीं महिलाओं से शहर के हालचाल मालूम करने लगीं.

Jodhpur-

जनता ने दिया भरपूर प्यार

राजमाता वैसे तो कई दिनों से बीमार चल रही थीं, लेकिन इस बात की खबर उन्होंने जनता तक नहीं पहुंचने दी. इसलिए जब उनके निधन की खबर आई तो पहले तो लोगों ने अफवाह मानकर मानने से इनकार कर दिया. जब उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि हो गई तो जोधपुर में शोक की लहर दौड़ गई.

जब 1971 में वो राजनीति के दंगल में उतरीं तो उन्होंने जोधपुर की जनता से आह्वान किया कि 'समय बदला है, संबंध नहीं.' जनता ने भी उनके इस आह्वान को हाथों-हाथ लिया और लोकसभा चुनाव रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाकर दिल्ली की राजनीति में भेजा.

फोटो यूट्यूब से

फोटो यूट्यूब से

महिलाओं की शिक्षा और विकास की थीं प्रबल हिमायती

पूर्व राजमाता कृष्णाकुमारी महिलाओं के विकास की काफी बड़ी हिमायती मानी जाती थीं. अपने चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने घूंघट प्रथा को हटाने की मुहिम भी छेड़ी थी. उन्होंने महिलाओं को परदे से बाहर आने को भी प्रेरित किया था.

उनका कहना था कि जब महिलाएं परदे से बाहर नहीं आएंगी, उनका विकास संभव नहीं है. वो महिलाओं और बेटियों की शिक्षा की प्रबल समर्थक थीं वो इसके लिए हमेशा जागरूकता कार्यक्रम चलाती रहती थीं. उनके जागरूक कार्यक्रमों का ही नतीजा रहा था कि शहर का एक प्रमुख बालिका स्कूल उनके ही नाम पर स्थापित किया गया था.

फोटो यूट्यूब से

फोटो यूट्यूब से

जनता में थी अच्छी पैठ

जोधपुर की स्थानीय निवासी सोनम सिंह बताती हैं कि राजमाता कृष्णा कुमारी की जोधपुर की जनता में काफी अच्छी पैठ थी. इसका कारण वो बताती हैं कि जब भी मारवाड़ में अकाल, सूखा या और कोई समस्या आई. प्रशासन से पहले हमेशा वो मदद के लिए आगे आईं. उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता के विकास के लिए हर संभव कार्य किया. जनता में पैठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जब सन 2008 में जोधपुर के मेहरानगढ़ फोर्ट में हुए हादसे के बाद लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था, जनता प्रशासन की कोई अपील नहीं मान रही थी, उस दौरान राजमाता की एक अपील पर जनता शांत हो गई थी.

आधुनिक युग में जीती थीं राजमाता 

अक्सर कहा जाता है कि पुरानी पीढ़ी के लोगों की सोच  अब के हिसाब से नहीं है.  वो बदलते समय और जमाने के साथ अपने आप को नहीं बदलते हैं. लेकिन कृष्णा कुमारी इस मामले में जमाने से बिलकुल उलट थीं. वो बदलते जमाने के साथ बदलती रहीं. उनकी बचपन में ही शादी कर दी गई थी. उन्होंने अपने परिवार की पांच पीढ़ियों के साथ अपना जीवन गुजारा और उन पीढ़ियों को बदलते समय के साथ बदलने की पूरी आजादी दी. उन्होंने अपने बेटे के अच्छे भविष्य के लिए केवल 8 साल की उम्र में ही अपने से अलग करके विदेश पढ़ाई के लिए भेज दिया था. उन्होंने सभी संतानों की पढ़ाई के साथ ही उनके अच्छे परिवारों में विवाह भी किए.

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