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अर्थव्यवस्था ऐसी कार की तरह है जिसके तीन टायर पंक्चर हो गए हैं: चिदंबरम

चिदंबरम ने कहा, सरकारी खर्च को बनाए रखने के लिए सरकार ने पेट्रोल, डीजल और यहां तक कि एलपीजी (रसोई गैस) पर भी टैक्स लगाना जारी रखा है

Updated On: Jun 04, 2018 10:24 AM IST

FP Staff

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अर्थव्यवस्था ऐसी कार की तरह है जिसके तीन टायर पंक्चर हो गए हैं: चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता पी चिदंबरम ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसी कार की तरह हो गई है जिसकी तीन टायरें पंक्चर हैं. उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर भी मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया.

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई की संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा, ‘निजी निवेश, निजी उपभोग, निर्यात और सरकारी खर्च किसी अर्थव्यवस्था के चार ग्रोथ इंजन हैं. यह किसी कार की चार टायरों की तरह हैं. अगर एक या दो टायरें पंक्चर हों तो गाड़ी धीमी पड़ जाती है लेकिन हमारे यहां तो तीन टायरें पंक्चर हो चुकी हैं.’

उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च सिर्फ स्वास्थ्य देखभाल और कुछ सुविधाओं में जारी है. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘इस खर्च को बनाए रखने के लिए सरकार ने पेट्रोल, डीजल और यहां तक कि एलपीजी (रसोई गैस) पर भी टैक्स लगाना जारी रखा है. यह उन टैक्स के नाम पर लोगों से पैसा वसूली कर रही है और इनमें से कुछ पैसे जनसुविधाओं पर खर्च कर रही है.’

उन्होंने सवाल किया कि क्या आपने हाल में बिजली में कोई निवेश देखा है. पूर्व वित्त मंत्री ने जीएसटी के ‘पांच स्लैब’ के लिए भी मोदी सरकार की आलोचना की.

न्यूज एजेंसी एएनआई से चिदंबरम ने कहा, '10 बड़ी कंपनियां जो दिवालिया हुई हैं उनमें 5 स्टील कंपनियां हैं. फिर ऐसे सेक्टर में आप निवेश होने की बात कैसे सोच सकते हैं.'

एएनआई ने चिदंबरम के बयान में लिखा कि 'नोटबंदी के बाद सरकार 5 टैक्स स्लैब के साथ जीएसटी लेकर आई. इसके ऊपर सेश अलग से. बाकी देशों में जीएसटी बस एक टैक्स सिस्टम है लेकिन अपने यहां यह दो तरह के सिस्टम पर चल रहा है. पांच स्लैब होने के बावजूद जीएसटी क्या है, उसके बारे में कल्पना भी नहीं कर सकते.'

पीटीआई-भाषा के मुताबिक, चिदंबरम ने कहा कि मुद्रा लोन के तहत प्रति व्यक्ति को औसतन 43,000 रुपए मिलने हैं. इस छोटी राशि से कोई बड़ा निवेश नहीं कर सकता. अपवाद में वह पकौड़ा स्टॉल खोल सकता है. चिदंबरम ने यह बयान पीएम मोदी के पकौड़ा बेचने वाले बयान के जवाब में दिया.

एनडीटीवी ने पीटीआई के हवाले से लिखा, 'बीजेपी वाली केंद्र सरकार ने समाज के एक खास वर्ग को यह संदेश दे दिया है कि वे दोयम दर्जे के नागरिक हैं. खाने-पीने, सामाजिक आचरण और रोमियो स्कॉड जैसे मुद्दों को लेकर काफी अशांति है.'

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