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सौभाग्य योजना: हर वर्ष 28,000 MW अतिरिक्त बिजली की होगी जरूरत

'प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना-सौभाग्य' के तहत दिसंबर 2018 तक बिजली से वंचित सभी परिवारों को बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है

Bhasha Updated On: Sep 27, 2017 04:16 PM IST

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सौभाग्य योजना: हर वर्ष 28,000 MW अतिरिक्त बिजली की होगी जरूरत

देश में वंचित परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने के लिये मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई 'सौभाग्य योजना' के लिए कम से कम 28 हजार मेगावाट सालाना अतिरक्त बिजली की जरूरत होगी.

योजना के क्रियान्वयन से पेट्रोलियम प्रोडक्ट खास कर केरोसीन पर दी जाने वाली सब्सिडी में कमी आने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम होगी. आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से 10 करोड़ मानव श्रम दिवस रोजगार सृजित होंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में बिजली से वंचित लगभग चार करोड़ परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए इसी हफ्ते 16,300 करोड़ रुपए की लागत वाली 'प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना-सौभाग्य' की शुरूआत की थी. इसके तहत दिसंबर 2018 तक बिजली से वंचित सभी परिवारों को बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

बुधवार को ऊर्जा मंत्रालय ने योजना से जुड़ी विशेषताओं, उद्देश्य, क्रियान्वयन रणनीति और इसके परिणाम के बारे में ‘बार-बार पूछे जाने वाले सवाल’ के तहत विस्तार से जानकारी दी.

खपत के आधार पर 8000 करोड़ यूनिट ऊर्जा की जरूरत

इसमें योजना के क्रियान्वयन से बिजली की मांग में बढ़ोतरी के बारे में कहा गया, ‘बिजली से वंचित चार करोड़ परिवारों को इसके दायरे में लाने से 28 हजार मेगावाट सालाना अतिरिक्त बिजली की जरूरत होगी. वहीं खपत के आधार पर 8 हजार करोड़ यूनिट ऊर्जा की आवश्यकता होगी.’ इसमें यह माना गया है कि हर परिवार औसतन एक किलोवाट क्षमता का उपयोग दिन में आठ घंटा करेगा.’

हालांकि लोगों की आय और बिजली इस्तेमाल बढ़ने के साथ बिजली की मांग बढ़ेगी और यह अनुमान बदलता जाएगा. योजना से आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के बारे में बयान में कहा गया है, ‘बिजली के उपयोग से केरोसीन की खपत घटेगी. इससे केरोसीन पर दी जाने वाली सालाना सब्सिडी में कमी आने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों का आयात कम होगा.’

बयान के अनुसार, ‘साथ ही प्रत्येक घर में बिजली होने से रेडियो, टेलीविजन, इटरनेट, मोबाइल आदि की पहुंच सुधरेगी. इससे उन्हें सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं मिल पाएंगी. किसानों को नई कृषि तकनीक, मशीनरी, गुणवत्तापूर्ण बीज, योजनाओं आदि के बारे में जानकारी मिल सकेगी जिससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी. किसान और युवा कृषि आधारित लघु उद्योग लगाने पर भी विचार कर सकते हैं.’

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