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'395 साल के न्यायिक इतिहास का तीसरा वकील, जिस पर महात्मा गांधी के बाद लगा आजीवन बैन'

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस वकील पर आजीवन बैन लगा दिया गया

Updated On: Feb 15, 2019 06:22 PM IST

FP Staff

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'395 साल के न्यायिक इतिहास का तीसरा वकील, जिस पर महात्मा गांधी के बाद लगा आजीवन बैन'

चेन्नई के एक वकील मनिकांदन वाथन चेट्टियर को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है क्योंकि उन पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पूरी जिंदगी के लिए बैन लगा दिया गया और वह इस फैसले को चुनौती दे रहे हैं.

barandbench के मुताबिक जब यह याचिका शुक्रवार को सुनवाई के लिए सामने आई तो वकील ऑन रिकॉर्ड और अपील करने वाले वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि वह इस मामले से छुट्टी लेना चाहते हैं.

अपीलकर्ता वकील को फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है. मनिकांदन बीते साल फरवरी में बार काउंसिल के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे. काउंसिल का फैसला था कि मनिकांदन को आजीवन कानूनी पेशे से दूर रखा जाए.

अपीलकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को भी अपनी याचिका में चुनौती दी थी. अपीलकर्ता ने दावा किया है कि वह 395 साल के न्यायिक इतिहास में भारत में तीसरा आदमी है जिस पर जीवन भर के लिए कानूनी प्रोफेशन से दूर रहने के लिए बैन लगाया गया. इससे पहले श्यामाजी कृष्ण वर्मा और महात्मा गांधी के साथ ऐसा किया गया था.

अपीलकर्ता का दावा है कि उसने कानूनी अधिकारों के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया है और उसने तमिलनाडु में एक राज्य व्यापी फर्जी जमानत रैकेट का खुलासा किया गया था और इसे 2015 में मद्रास हाईकोर्ट को ट्रांसफर किया गया.

इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट ने रैकेटियर का पीछा करने के बजाय 2015 में अपीलकर्ता पर ही बैन लगा दिया. इस प्रतिबंध को बीसीआई द्वारा आजीवन बैन में बदल दिया गया था, अपीलकर्ता ने बताया कि इस वजह से वह कानूनी समुदाय से अलग हो गया है.

अपीलकर्ता को उसकी अनुपस्थिति में और उसकी जानकारी के बिना उसके कक्ष से बाहर निकाल दिया गया और उसकी केस फाइलों सहित उसके सामान को जब्त कर लिया गया. अपीलकर्ता ने प्रार्थना की है कि बीसीआई ने उस पर प्रतिबंध लगाने के आदेशों को अलग रखा है और उसे मुआवजा दिया जा रहा है जिसमें उसे 10 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. अपीलकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 140 का भी हवाला दिया है.

जब यह मामला आज सामने आया, तो अपील के लिए उपस्थित वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कोर्ट को सूचित किया कि अपीलकर्ता द्वारा अपील में कुछ बदलाव किए गए थे और इसमें वकीलों की सहमति नहीं ली गई थी. उन्होंने कहा कि वकीलों की पूरी टीम के साथ वह शर्मिंदा हैं.

अपीलकर्ता द्वारा अपील में कुछ जजों के खिलाफ कुछ विवादित आरोप लगाए गए थे. इसी मामले में गोंसाल्वेस ने अपील वापस लेने और नए सिरे से अपील करने के लिए अपीलकर्ता को मनाने के लिए कोर्ट की अनुमति मांगी. हालांकि, अपीलकर्ता ने इसके बजाय एक और वकील को शामिल करने की इच्छा जताई और बदलाव करने से इनकार कर दिया.

न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता के साथ खंडपीठ में शामिल न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने जजों पर टिप्पणी करने और टिप्पणी करने के आरोपों पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, ' जजों के खिलाफ लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं, जजों को पार्टियों के रूप में दर्शाना, महाधिवक्ता... यह एक अजीब अपील है.'

कोर्ट ने वकीलों को इस मामले से छुट्टी दे दी और अपीलकर्ता को फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है.

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