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डोर स्टेप डिलीवरी का पहला लाभार्थी: 1 रुपए में होने वाले फोटोस्टेट के लिए देने पड़े 50 रुपए

दिल्ली में डोर स्टेप डिलीवरी के पहले लाभार्थी अनुज ने योजना के फायदे गिनाने के साथ यह भी बताया है कि लोगों को कैसी मुश्किलें आ सकती हैं

Updated On: Sep 19, 2018 02:44 PM IST

Kangkan Acharyya

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डोर स्टेप डिलीवरी का पहला लाभार्थी: 1 रुपए में होने वाले फोटोस्टेट के लिए देने पड़े 50 रुपए

सत्ताईस वर्षीय अनुज कुमार के लिए किसी सरकारी सेवा को हासिल करने का यह पहला अनुभव था. उन्होंने ‘डोर स्टेप डिलीवरी ऑव सर्विसेज’ के तहत ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अर्जी डाली थी. और,सरकारी सेवा हासिल करने का उनका यह पहला अनुभव सुखद रहा.

दिल्ली की प्रदेश सरकार ने 10 सितंबर से डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज की शुरुआत की है और इस योजना के अंतर्गत पहले पहल अर्जी देने तथा सेवा हासिल करने वाले दिल्ली के नागरिकों में एक अनुज कुमार भी हैं.

उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शकूरपुर के निवासी अनुज ने कहा, 'मैं सबेरे अखबार पढ़ रहा था कि मेरी नजर एक विज्ञापन पर गई. विज्ञापन में बताया गया था कि दिल्ली सरकार ने उसी दिन से यह योजना शुरू की है. सो, मैंने योजना की तहत मुहैया की जा रही सेवा को हासिल करने का फैसला किया.'

मजे की बात यह भी रही कि जैसे ही उन्होंने कॉल सेन्टर को फोन लगाया, सेंटर में बैठे एक्जिक्यूटिव ने तुरंत फोन उठाया और पूछा कि आपको कौन सी सेवा हासिल करनी है.

फिलहाल इस योजना के अंतर्गत 40 सेवाएं फराहम की जा रही हैं. इन सेवाओं को हासिल करने के लिए दिल्ली के नागरिकों को 1076 नंबर पर फोन लगाना होगा. योजना के अंतर्गत एक मोबाइल सहायक अर्जी लगाने वाले के घर पहुंचेगा और आवेदन की प्रक्रिया डिजिटल फार्मेट में पूरी करेगा. योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आवेदक को अपनी जरूरत की सेवा घर पर रहते हुए ही मिल जाए और जबतक नियम के हिसाब से जरूरी न हो, उसे सरकारी दफ्तर का चक्कर ना लगाना पड़े.

अनुज ने बताया कि उन्हें अपनी जरूरत की सेवा बड़ी आसानी से हासिल हो गई. उनका कहना है, 'मैंने सुना है कि योजना की शुरुआत के पहले दिन कई लोगों ने फोन लगाने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुए जबकि मुझे ऐसी किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा.'

अनुज फिलहाल एक प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाते हैं और इसके साथ ही साथ कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे ड्राइविंग लाइसेंस की जरुरत थी लेकिन समय की कमी के कारण में लाइसेंस नहीं बनवा पा रहा था. इसी कारण मैंने इस योजना के सहारे लाइसेंस बनवाने का फैसला किया.'

कॉल सेंटर से यह भी पूछा गया कि मोबाइल सहायक किस वक्त आपके घर आये तो आपको सुविधा होगी.

अनुज बताते हैं, 'मैंने कहा कि 12 सितंबर की तारीख मेरे लिए ठीक रहेगी. मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि मोबाइल सहायक बिल्कुल मेरे बताये वक्त पर पहुंचा.'

बीते 10 सितंबर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने राज्य की जनता की सहूलियत के लिए योजना की शुरुआत की थी.

बीते 10 सितंबर को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने राज्य की जनता की सहूलियत के लिए योजना की शुरुआत की थी.

डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज नाम की इस योजना से जुड़े अपने अनुभवों का साझा करते हुए अनुज ने आगे बताया कि मोबाइल सहायक ने उनके डॉक्यूमेंट्स स्कैन किए फिर उसी सिस्टम पर अपलोड किया तथा सरकार की तरफ से ली जा रही फीस भी ली. अनुज को उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि आपका पेमेंट मिल गया है, साथ ही यह कन्फर्मेशन भी आई कि आपने फलां सेवा हासिल करने के लिए अर्जी दी है.

अनुज ने कहा, 'ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के संबद्ध अधिकारी से सिस्टम पर मेरा अपॉइंटमेंट फटाफट फिक्स हो गया, मुझे ड्राइविंग स्किल की जरूरी जांच के लिए दो दिन बाद का समय मिला.'

दो दिन बाद यानि 14 सितंबर को अनुज ने लाइसेंस के लिए जरूरी ड्राइविंग स्किल टेस्ट दिया और उन्हें लाइसेंस मिल गया. इस तरह वे बहुचर्चित डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज योजना के प्रथम लाभार्थी बने.

अनुज बताते हैं, 'मैं अक्सर सुना करता था कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में लोगों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. लेकिन शुक्र कहिए डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज योजना का जो मुझे इस काम में बड़ी आसानी हुई.'

अनुज के पिता अरविन्द कुमार साठ साल के हैं. उन्हें अपनी उम्र के बाकी तमाम नागरिकों की तरह ही सरकारी सेवा हासिल करने के क्रम में सरकारी दफ्तरों में बड़े भ्रष्टाचार और उपेक्षा के बरताव का सामना करना पड़ा है. वे मानते हैं कि उनका बेटा बहुत सौभाग्यशाली है जो उसे सरकारी सेवा हासिल करने की अपनी पहली कोशिश में ही इतनी सहूलियत का एहसास हुआ.

अनुज के पिता बताते हैं, 'पहले राशन-कार्ड को रिन्यू करवाने तक में भारी जद्दोजहद करनी पड़ती थी. आपूर्ति विभाग के दफ्तर में कतार लगाने के लिए मैं एकदम सबेरे घर से निकलता था. जैसे ही दफ्तर का दरवाजा खुलता, अर्जी लगाने वाले लोग अपने अपने दस्तावेज जमा करने के लिए एक-दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़ते थे. लेकिन फिर जल्दी ही हमें एहसास हो जाता था कि यह तो लड़ाई की शुरुआत भर है. राशन-कार्ड नया करवाने के लिए हमें दफ्तर के कम से कम छह दफे चक्कर काटने होते थे. लेकिन मेरे बेटे को तो नई योजना के सहारे बस चार दिन के भीतर लाइसेंस हासिल हो गया.'

डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज योजना की शुरुआत सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार मिटाने के मकसद से की गई है. लेकिन क्या योजना से यह मकसद पूरा होगा? अनुज का जवाब था कि भ्रष्टाचार, 'पूरी तरह तो खत्म नहीं हो सकता.'

अनुज ने बातों का सिलसिला जारी रखते हुए आगे बताया, 'स्कीम बेशक महत्वाकांक्षी है और बहुत मुमकिन है कि सरकारी सेवाओं को हासिल करने में हमें जो रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है उसमें थोड़ी आसानी हो जाए लेकिन अधिकारियों को ध्यान रखना होगा कि सरकारी दफ्तरों के इर्द-गिर्द मंडराने वाले बिचौलियों का बोरिया-बिस्तर बंध जाय.'

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के सिलसिले में बिचौलिए के साथ हुए अपने अनुभव का साझा करते हुए अनुज ने बताया, 'जब मैं जरूरी ड्राइविंग स्किल टेस्ट देने ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस पहुंचा तो मुझसे कहा गया कि आपको अपने दस्तावेजों की फोटोकॉपी फिर से देनी होगी. लेकिन मैं फोटोकॉपी करवाने गया तो देखा कि दफ्तर के बाहर कुछ लोग खड़े हैं और वे फोटोकॉपी के लिए प्रति पन्ना 50 रुपए ले रहे हैं जबकि आम तौर पर खर्चा 1 रुपया (प्रति पन्ना) ही लगता है. मुझे फोटोकॉपी और प्रिन्टआउट्स पर 220 रुपए खर्च करने पड़े क्योंकि वहां कोई दूसरा फोटोकॉपी की सेवा मुहैया कराने वाला वाला मौजूद नहीं था. मेरा मानना है कि सरकार को इन लोगों पर नजर रखनी चाहिए ताकि ये लोग वहां अपना धंधा ना चला सकें.'

फ़र्स्टपोस्ट ने अनुज से जानना चाहा कि क्या वे डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज योजना को बेहतर बनाने के लिए कोई सुझाव देना चाहेंगे ? इस पर अनुज ने जवाब दिया, 'मेरे घर आने वाले मोबाइल सहायक ने कहा कि जरूरी ड्राइविंग स्किल टेस्ट के वक्त मुझे कोई दस्तावेज जमा नहीं करना होगा. लेकिन जब मैं वहां पहुंचा तो मुझसे कहा गया कि आपको दस्तावेज की हार्डकॉपी जमा करानी होगी. सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि योजना को लेकर अलग-अलग स्तर पर समझ में जो अंतर दिख रहा है वह ना रहे.'

योजना की शुरुआत के चौथे दिन तक डोर स्टेप डिलीवरी कॉल सेंटर को 71,637 कॉल प्राप्त हुए और सरकार ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसके मुताबिक मोबाइल सहायक 372 घरों तक पहुंचे हैं. अभी तक ऐसा कोई सरकारी आंकड़ा जारी नहीं हुआ जिससे पता चले कि कितने लोगों को योजना के अंतर्गत सचमुच सेवा हासिल हुई है.

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