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शोपियां में सेना के खिलाफ केस वापिस नहीं लेगी कश्मीर सरकार, होगी जांच

एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सैनिकों ने तब गोलीबारी की जब एक भीड़ ने एक जूनियर कमिशन आफिसर की पीटने और उसकी राइफल छीनने का प्रयास किया

FP Staff Updated On: Jan 30, 2018 11:33 AM IST

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शोपियां में सेना के खिलाफ केस वापिस नहीं लेगी कश्मीर सरकार, होगी जांच

जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को कहा कि शोपियां में गोलीबारी में शामिल सेना की एक यूनिट के खिलाफ पुलिस की प्राथमिकी को तार्किक अंत तक ले जाया जाएगा, जिसमें दो नागरिकों की मौत हो गई थी. महबूबा ने ऐसा कहकर अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी को झटका दिया है, जिसने हत्या का मामला वापस लेने की मांग की थी.

महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा में यह बात हंगामे के बीच पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कही. महबूबा ने गोलीबारी की घटना और भाजपा विधायक आर एस पठानिया की प्राथमिकी तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर विधानसभा में हंगामे के बीच यह बात कही. पठानिया ने कहा कि उनकी पार्टी मजिस्ट्रेट जांच का समर्थन करती है ताकि कानून अपना काम कर सके.

अधिकारियों ने कल बताया कि प्राथमिकी सेना की गढ़वाल यूनिट के खिलाफ रनबीर दंड संहिता की धारा 302 और 307 के तहत दर्ज की गई है. प्राथमिकी में सेना के एक मेजर का भी उल्लेख है जिसने शनिवार को घटना के समय सैन्य कर्मियों का नेतृत्व किया था.

जम्मू कश्मीर पुलिस प्रमुख एस पी वैद ने कहा कि शोपियां मामले में प्राथमिकी दर्ज करना जांच की शुरूआत है और सेना के पक्ष पर भी गौर किया जाएगा. मुफ्ती ने कहा कि वह नहीं मानतीं कि पुलिस की कार्रवाई से सेना का मनोबल कम होगा.

महबूबा ने कहा, ‘हम सेना और अन्य सुरक्षा बलों से कह रहे हैं कि वे अत्यंत संयम बरतें लेकिन यह भी तथ्य है कि पहले जब कोई मुठभेड़ होती थी, या यहां तक कि कोई फर्जी मुठभेड़ भी होती थी, गांव खाली हो जाते थे. लेकिन अब जब कोई मुठभेड़ शुरू होती है तो सैकड़ों लोग सुरक्षा बलों पर पथराव में लिप्त हो जाते हैं.’

वहीं पठानिया ने सैन्य कर्मियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि मामले में मजिस्ट्रेट जांच का आदेश पहले ही दे दिया गया है और कानून को अपना काम करने देना चाहिए.

नेशनल कान्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मजिस्ट्रेट जांच का आदेश देने के साथ ही सैन्य कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि भ्रमित करने वाले संकेत दिये जा रहे हैं.

एक संवाददाता सम्मेलन में यह पूछे जाने पर कि क्या सेना का पक्ष भी जांच में शामिल होगा, डीजीपी वैद ने कहा, ‘सेना का पक्ष, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अपने लोगों को खोने वाले लोगों के बयान भी इसमें शामिल होंगे.’

वैद ने कहा, ‘ हम सभी तथ्यों और मामले के जमीनी सबूतों को देखेंगे और सेना से पूछताछ की जाएगी.’ वहीं एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सैनिकों ने तब गोलीबारी की जब एक भीड़ ने एक जूनियर कमिशन आफिसर की पीटने और उसकी राइफल छीनने का प्रयास किया.

(साभार न्यूज18)

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